मुंबई: महाराष्ट्र सरकार ने आम लोगों की सेहत और खाद्य सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए बड़ा फैसला लिया है। राज्य में एनालॉग (नॉन-डेयरी) पनीर के निर्माण, भंडारण, परिवहन, वितरण और बिक्री पर एक वर्ष के लिए प्रतिबंध लगा दिया गया है। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू किया गया है।
सरकार के अनुसार, जांच में पाया गया कि बाजार में बड़ी मात्रा में ऐसा पनीर बेचा जा रहा था जो देखने और स्वाद में असली पनीर जैसा लगता है, लेकिन वह दूध से नहीं बना होता। इसके बजाय उसमें वनस्पति तेल, स्टार्च, इमल्सीफायर और अन्य कृत्रिम पदार्थों का इस्तेमाल किया जाता है। कई मामलों में इसे असली पनीर बताकर ग्राहकों को परोसा जा रहा था।
महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) ने अप्रैल 2025 से मार्च 2026 के बीच 308 नमूनों की जांच की। इनमें 109 नमूने गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरे। कई नमूने असुरक्षित और घटिया गुणवत्ता के पाए गए, जिसके बाद सरकार ने सख्त कार्रवाई का फैसला लिया।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह प्रतिबंध असली दूध से बने पनीर पर नहीं, बल्कि केवल एनालॉग या नॉन-डेयरी पनीर पर लागू है। इसका उद्देश्य लोगों को धोखे से बचाना और सुरक्षित खाद्य पदार्थ उपलब्ध कराना है।
नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ 6 महीने तक की जेल और 1 लाख तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। होटल, रेस्टोरेंट, कैटरिंग सेवाएं और क्लाउड किचन भी इस प्रतिबंध के दायरे में आएंगे l