- यूरायपुर/बस्तर। छत्तीसगढ़ की समृद्ध आदिवासी कला और संस्कृति को देश के सबसे प्रतिष्ठित मंचों में से एक पर खास पहचान मिलने जा रही है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की ओर से 15 अगस्त 2026 को आयोजित होने वाले ‘At Home’ समारोह की निमंत्रण किट में बस्तर की पारंपरिक ढोकरा ढलाई और पिटवा लौह शिल्प को शामिल किया गया है।
इस विशेष निमंत्रण किट को तैयार करने वाली करीब 130 लोगों की टीम में बस्तर के लगभग 50 कलाकार शामिल हैं। राष्ट्रीय डिजाइन संस्थान (NID), अहमदाबाद के विशेषज्ञों और कलाकारों ने मिलकर तीन महीने से ज्यादा समय तक इस किट पर काम किया। पूरी किट को हाथ से तैयार किया गया है और इसे पर्यावरण के अनुकूल रखने पर भी जोर दिया गया है।
ढोकरा ढलाई में दिखेगी बस्तर की संस्कृति
बस्तर की ढोकरा कला भारत की प्राचीन धातु-कला परंपराओं में से एक मानी जाती है। राष्ट्रपति भवन की निमंत्रण किट में शामिल ढोकरा कलाकृति के जरिए बस्तर की सामुदायिक परंपराओं और पवित्र वनों के संरक्षण की झलक दिखाई गई है।
इस कलाकृति में प्रकृति और स्थानीय जीवन के बीच के रिश्ते को दर्शाया गया है। खास तौर पर महुआ जैसे स्थानीय पेड़ों को बचाने वाली सामुदायिक परंपराओं को इसका हिस्सा बनाया गया है।
पिटवा शिल्प से तैयार हुई घंटी और कलाकृतियां
निमंत्रण किट में बस्तर का पिटवा यानी लौह शिल्प भी खास आकर्षण है। इस पारंपरिक कला में पुराने या रिसाइकल किए गए लोहे को गर्म करके और पीटकर अलग-अलग आकृतियां और उपयोगी वस्तुएं तैयार की जाती हैं।
खास बात यह है कि पिटवा शिल्प में लोहे को ढालने के बजाय उसे हाथ से गर्म करके और पीटकर आकार दिया जाता है। राष्ट्रपति भवन की किट में इसी तकनीक से तैयार लोहे की घंटी और डिस्प्ले फ्रेम में रखी गई कलाकृतियों का इस्तेमाल किया गया है।
कला के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश
इस बार ‘At Home’ की निमंत्रण किट को सिर्फ एक आमंत्रण पत्र के तौर पर नहीं, बल्कि भारत की लोककला, जनजातीय विरासत और पर्यावरण संरक्षण को दर्शाने वाले माध्यम के रूप में तैयार किया गया है।
छत्तीसगढ़ के ढोकरा और पिटवा शिल्प के जरिए बस्तर की कला के साथ-साथ प्रकृति और स्थानीय समुदायों के बीच सदियों पुराने संबंध को भी सामने लाया गया है।
बस्तर के कलाकारों के लिए बड़ा सम्मान
राष्ट्रपति भवन जैसे प्रतिष्ठित मंच के लिए तैयार की गई निमंत्रण किट में बस्तर की कला को शामिल किया जाना स्थानीय शिल्पकारों के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। इससे देशभर में बस्तर के पारंपरिक शिल्प को पहचान मिलने के साथ कलाकारों की आजीविका और हस्तशिल्प को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
बस्तर की मिट्टी, आग, लोहा और कलाकारों के हाथों की मेहनत अब राष्ट्रपति भवन के ‘At Home’ समारोह की कहानी का हिस्सा बनने जा रही है