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रायपुर में तिरंगा यात्रा में उमड़ा राष्ट्रभक्ति का सैलाब, बस्तर के 92 गांवों में पहली बार फहरेगा तिरंगा

सीएम विष्णुदेव साय ने किया नेतृत्व, स्कूली बच्चों ने थामा एक किलोमीटर लंबा तिरंगा; गृहमंत्री विजय शर्मा 12 से 14 अगस्त तक बस्तर के 31 प्रमुख नक्सल प्रभावित स्थलों का करेंगे दौरा

by desk

राजधानी रायपुर में सोमवार को आयोजित तिरंगा यात्रा में राष्ट्रभक्ति और राष्ट्रीय गौरव का उत्साह देखने को मिला। बलबीर सिंह जुनेजा इंडोर स्टेडियम से सुभाष स्टेडियम तक निकली इस यात्रा का नेतृत्व मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने किया। यात्रा में बड़ी संख्या में स्कूली विद्यार्थी, जनप्रतिनिधि, एनसीसी कैडेट्स, स्काउट्स, पूर्व सैनिक, खिलाड़ी, धर्माचार्य, स्वयंसेवी संगठनों और विभिन्न समाजों के प्रतिनिधि शामिल हुए।

यात्रा के दौरान स्कूली विद्यार्थियों के हाथों में करीब एक किलोमीटर लंबा तिरंगा विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। पूरे मार्ग पर लोगों में देशभक्ति का उत्साह दिखाई दिया।

सीएम साय बोले- तिरंगा हमारी आन, बान और शान

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि तिरंगा देश की आन, बान और शान है। यह भारत की एकता, अखंडता और स्वाभिमान के साथ देश के लिए बलिदान देने वाले असंख्य वीरों की स्मृति का प्रतीक है।

उन्होंने कहा कि भारत में अलग-अलग भाषाएं, संस्कृतियां और परंपराएं होने के बावजूद तिरंगा देश के करोड़ों नागरिकों को एक सूत्र में जोड़ता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘हर घर तिरंगा’ अभियान देशवासियों में राष्ट्रभक्ति और राष्ट्रीय गौरव की भावना को और मजबूत कर रहा है।

वीर नारायण सिंह और गुंडाधुर को किया नमन

तिरंगा यात्रा के दौरान छत्तीसगढ़ के वीर सपूत शहीद वीर नारायण सिंह और आदिवासी जननायक गुंडाधुर को भी श्रद्धांजलि और नमन किया गया। आयोजन में शामिल लोगों ने देश और प्रदेश के लिए बलिदान देने वाले वीरों को याद किया।

बस्तर में अब उन जगहों पर फहरेगा तिरंगा जहां कभी था नक्सली आतंक

तिरंगा अभियान का सबसे महत्वपूर्ण चरण बस्तर में देखने को मिलेगा। जिन इलाकों में कभी नक्सली हिंसा और दहशत के कारण राष्ट्रध्वज फहराना चुनौतीपूर्ण माना जाता था, अब उन्हीं क्षेत्रों में तिरंगा यात्रा निकालने और राष्ट्रीय ध्वज फहराने की तैयारी की जा रही है।

गृहमंत्री विजय शर्मा 12 से 14 अगस्त तक बस्तर के नक्सली हिंसा से जुड़े 31 प्रमुख स्थलों का दौरा करेंगे। इन स्थानों पर तिरंगा फहराने की तैयारी की जा रही है।

तिरंगा यात्रा के साथ सामने आएगी शहादत की कहानी

बस्तर में प्रस्तावित यात्रा को केवल तिरंगा यात्रा तक सीमित नहीं रखा गया है। यात्रा मार्ग पर संबंधित नक्सली घटनाओं से जुड़े पोस्टर लगाए जाएंगे। इन पोस्टरों पर QR कोड दिए जाएंगे। QR कोड स्कैन करने पर संबंधित घटना की तारीख, शहीद जवानों की जानकारी और उस स्थान से जुड़ा इतिहास सामने आएगा।

इस पहल का उद्देश्य बस्तर के संघर्ष, सुरक्षा बलों के बलिदान और नक्सल हिंसा के इतिहास को नई पीढ़ी तक पहुंचाना है।

नारायणपुर से शुरू होकर कई नक्सल प्रभावित इलाकों से गुजरेगी यात्रा

गृहमंत्री की प्रस्तावित यात्रा नारायणपुर से शुरू होकर धौड़ाई, कन्हारगांव, कोडेनार, बोदली, सातधार, बारसुर, गीदम, दंतेवाड़ा, कुआकोंडा, भुसारास घाटी, चिंगावरम, सुकमा, एर्राबोर, दोरनापाल, पोलमपल्ली, बुर्कापाल, मिनपा-ताड़मेटला, चिंतलनार, जगरगुंडा, सिलगेर, टेकलगुड़ेम, आवापल्ली, बीजापुर, उसूर, गलगम, नंबी, ताड़पाला और करेगुट्टा पहाड़ी सहित प्रमुख नक्सली घटना स्थलों से होकर गुजरेगी।

इन इलाकों में तिरंगा फहराने की पहल को शांति और लोकतांत्रिक व्यवस्था की मजबूती के संदेश से जोड़कर देखा जा रहा है।

बस्तर के 92 गांवों में पहली बार फहरेगा राष्ट्रीय ध्वज

15 अगस्त को बस्तर संभाग के 92 गांवों में पहली बार राष्ट्रीय ध्वज फहराने की तैयारी है। इनमें सुकमा के 50, बीजापुर के 33 और नारायणपुर के 9 गांव शामिल हैं।

इन गांवों में लंबे समय तक नक्सली प्रभाव और हिंसा के कारण राष्ट्रीय पर्वों और तिरंगा फहराने जैसे आयोजनों में कठिनाइयां रही थीं। अब इन क्षेत्रों में तिरंगा फहराने को शांति और मुख्यधारा से जुड़ाव के महत्वपूर्ण संदेश के रूप में देखा जा रहा है।

500 से अधिक स्कूल और प्रमुख स्थान शहीदों के नाम पर होंगे

बस्तर संभाग में 500 से अधिक स्कूलों, प्रमुख चौराहों और सामुदायिक भवनों का नामकरण नक्सल उन्मूलन अभियान में बलिदान देने वाले वीर जवानों के नाम पर किए जाने की भी तैयारी है।

इस पहल के जरिए शहीद जवानों की स्मृतियों को स्थानीय स्तर पर संरक्षित करने और आने वाली पीढ़ियों को उनके बलिदान से परिचित कराने का प्रयास किया जा रहा है।

बंदूक और भय की जगह तिरंगा और विकास का संदेश

बस्तर में इस पूरे अभियान का व्यापक संदेश उन क्षेत्रों की पहचान को बदलने से जुड़ा है, जिन्हें लंबे समय तक नक्सली हिंसा और भय के लिए जाना जाता रहा है। अब इन्हीं इलाकों में तिरंगा, विकास और शहीदों की स्मृतियों को नई पहचान देने की कोशिश की जा रही है।

रायपुर की तिरंगा यात्रा से लेकर बस्तर के दुर्गम गांवों तक होने वाले आयोजनों को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर राष्ट्रभक्ति, शांति, लोकतांत्रिक व्यवस्था और राष्ट्रीय एकता के संदेश से जोड़ा गया है।

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