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बारिश के मौसम में बच्चों की सेहत पर बढ़ा संक्रमण का खतरा, इन आसान उपायों से रखें सुरक्षित…

मानसून की दस्तक के साथ ही बच्चों की सेहत को लेकर अतिरिक्त सतर्कता जरूरी हो जाती है। बारिश के दौरान बढ़ी नमी, जलभराव और दूषित पानी के कारण बच्चों में सर्दी-जुकाम, खांसी,

by desk

नई दिल्ली। मानसून की दस्तक के साथ ही बच्चों की सेहत को लेकर अतिरिक्त सतर्कता जरूरी हो जाती है। बारिश के दौरान बढ़ी नमी, जलभराव और दूषित पानी के कारण बच्चों में सर्दी-जुकाम, खांसी, बुखार, पेट से जुड़ी समस्याओं और त्वचा संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है। ऐसे में बच्चों की साफ-सफाई, खान-पान और दैनिक दिनचर्या पर विशेष ध्यान देना बेहद जरूरी है।

साफ-सफाई पर दें विशेष ध्यान

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, मानसून के दौरान संक्रमण से बचाव के लिए व्यक्तिगत स्वच्छता सबसे अहम है। बच्चों को नियमित रूप से हाथ धोने की आदत डालें और उनके नाखून छोटे रखें। बारिश में भीगने या कपड़े गीले होने पर उन्हें तुरंत बदल दें। घर के आसपास पानी जमा न होने दें, क्योंकि ठहरा हुआ पानी मच्छरों के पनपने का कारण बन सकता है। रात में मच्छरदानी का इस्तेमाल भी बच्चों को मच्छरजनित बीमारियों से बचाने में मदद कर सकता है।

खान-पान में बरतें सावधानी

बारिश के मौसम में बच्चों को ताजा और घर का बना भोजन देना बेहतर माना जाता है। खुले में बिकने वाले खाद्य पदार्थ, कटे हुए फल और लंबे समय से रखे जूस से बचना चाहिए। बच्चों को पर्याप्त मात्रा में साफ और सुरक्षित पानी पिलाएं। पानी की गुणवत्ता को लेकर संदेह हो तो उसे उबालकर या उचित तरीके से फिल्टर करके ही इस्तेमाल करें।

मौसमी फल, सब्जियां और संतुलित आहार बच्चों के समग्र स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण हैं। किसी भी विशेष खाद्य पदार्थ या घरेलू नुस्खे को बच्चे की उम्र और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार ही अपनाना चाहिए।

गीले कपड़ों और त्वचा का रखें ख्याल

बारिश में भीगने के बाद बच्चों को लंबे समय तक गीले कपड़ों में न रहने दें। कपड़े और जूते अच्छी तरह सुखाकर इस्तेमाल करें। पैरों को साफ और सूखा रखना जरूरी है, क्योंकि लगातार नमी रहने से फंगल संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है।

बच्चों की पर्याप्त नींद और नियमित दिनचर्या भी उनके स्वास्थ्य के लिए जरूरी है। मौसम अनुकूल होने पर सुबह की हल्की धूप में कुछ समय बिताना भी उपयोगी हो सकता है।

इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज

मानसून में डेंगू, मलेरिया और अन्य संक्रमणों का खतरा भी बढ़ सकता है। यदि बच्चे को लगातार या तेज बुखार, उल्टी-दस्त, अत्यधिक कमजोरी, सांस लेने में परेशानी या त्वचा पर असामान्य चकत्ते जैसे लक्षण दिखाई दें, तो बिना देरी किए डॉक्टर से सलाह लें। बच्चों को बिना चिकित्सकीय सलाह के दवाएं देना उचित नहीं है।

विशेषज्ञों के मुताबिक, मानसून में थोड़ी अतिरिक्त सावधानी और स्वच्छता की आदतें अपनाकर बच्चों को कई मौसमी संक्रमणों से बचाया जा सकता है। माता-पिता को बच्चों के खान-पान, स्वच्छता और स्वास्थ्य में होने वाले किसी भी असामान्य बदलाव पर नजर रखनी चाहिए।

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