प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘दिमागी नक्सल’ वाले बयान को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। बीजेपी ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम की टिप्पणी को लेकर उन पर निशाना साधा है। बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने इस मुद्दे पर कांग्रेस से सवाल करते हुए पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के 2006 के बयान का भी जिक्र किया।
दरअसल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त को लाल किले से देश को संबोधित करते हुए कहा था कि सरकार ने जंगलों में हथियार उठाने वाले नक्सलवाद के खिलाफ बड़ी सफलता हासिल की है, लेकिन वैचारिक स्तर पर ‘दिमागी नक्सल’ अब भी मौजूद हैं। पीएम ने आरोप लगाया था कि माओवादी सोच रखने वाले लोगों ने कुछ प्रभावशाली संस्थानों और नीति-निर्माण की प्रक्रियाओं में अपनी जगह बनाई है।
चिदंबरम के बयान से शुरू हुआ विवाद
पीएम मोदी की टिप्पणी के अगले दिन कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि उन्हें ‘दिमागी नक्सल’ कहे जाने पर गर्व है। चिदंबरम के इसी बयान को लेकर बीजेपी ने कांग्रेस पर हमला बोला।
सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि चिदंबरम ने पीएम मोदी के बयान के तुरंत बाद प्रतिक्रिया देते हुए खुद को ‘दिमागी नक्सल’ शब्द से जोड़ लिया। उन्होंने कांग्रेस से पूछा कि पार्टी नक्सलवाद पर मनमोहन सिंह के पुराने रुख के साथ है या चिदंबरम के मौजूदा बयान के साथ।
मनमोहन सिंह के 2006 के बयान का हवाला
बीजेपी प्रवक्ता ने तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के 13 अप्रैल 2006 के बयान का उल्लेख किया। उस समय मनमोहन सिंह ने नक्सलवाद को देश की आंतरिक सुरक्षा के सामने सबसे बड़ी चुनौती बताया था।
त्रिवेदी ने इसी बयान को आधार बनाकर कांग्रेस की वर्तमान स्थिति पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को स्पष्ट करना चाहिए कि वह नक्सलवाद को लेकर मनमोहन सिंह के आकलन को सही मानती है या पी. चिदंबरम की टिप्पणी को।
यूपीए सरकार पर भी साधा निशाना
बीजेपी नेता ने कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार के दौरान नक्सलवाद की स्थिति को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि उस दौर में नक्सलवाद का प्रभाव कई जिलों तक फैला हुआ था। त्रिवेदी ने 2010 के दंतेवाड़ा हमले का भी जिक्र किया और नक्सल हिंसा में सुरक्षाबलों तथा आम लोगों की मौतों के आंकड़ों का हवाला दिया।
हालांकि, इन आंकड़ों और आरोपों को त्रिवेदी ने राजनीतिक तर्क के तौर पर पेश किया और इस रिपोर्ट में उनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं की गई है।
बीजेपी ने मोदी सरकार की नक्सल नीति को बताया सफल
सुधांशु त्रिवेदी ने दावा किया कि नरेंद्र मोदी सरकार के कार्यकाल में नक्सलवाद से प्रभावित इलाकों का दायरा काफी कम हुआ है। उनके मुताबिक, कई ऐसे क्षेत्र जिन्हें पहले नक्सल प्रभावित माना जाता था, अब उस श्रेणी से बाहर हो चुके हैं।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की कार्रवाई से पहले के मुकाबले नक्सलवाद का भौगोलिक प्रभाव काफी सीमित हुआ है। बीजेपी ने इसे सशस्त्र नक्सलवाद के खिलाफ सरकार की बड़ी उपलब्धि के रूप में पेश किया।
‘दिमागी नक्सल’ पर आगे भी जारी रह सकता है विवाद
पीएम मोदी की टिप्पणी और चिदंबरम के जवाब के बाद ‘दिमागी नक्सल’ शब्द राजनीतिक बहस का नया मुद्दा बन गया है। बीजेपी इसे नक्सली विचारधारा के खिलाफ वैचारिक लड़ाई से जोड़ रही है, जबकि विपक्ष की ओर से इस टिप्पणी को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
फिलहाल इस मुद्दे पर बीजेपी और कांग्रेस के बीच बयानबाजी तेज है और आने वाले दिनों में यह राजनीतिक बहस और बढ़ सकती है।