आज पूरे देश में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व अपार श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। मान्यता है कि द्वापर युग में भगवान विष्णु ने धरती पर अधर्म का नाश करने और धर्म की स्थापना के लिए मथुरा में कंस के कारागार में श्रीकृष्ण के रूप में अवतार लिया था।
मंदिरों में भव्य सजावट
मथुरा, वृंदावन, द्वारका सहित देशभर के प्रमुख कृष्ण मंदिरों को फूलों, रोशनी और झूलों से सजाया गया है। रात 12 बजे कान्हा के जन्म के साथ ही मंदिरों में शंखनाद, घंटियों की गूंज और “नंद घर आनंद भयो” के जयकारों से माहौल भक्तिमय हो उठेगा।
झांकियां और दही-हांडी
कई शहरों में झूला दर्शन, झांकियां और रासलीला का आयोजन किया जा रहा है। महाराष्ट्र और गुजरात में परंपरागत दही-हांडी प्रतियोगिताएं भी बड़े स्तर पर आयोजित हो रही हैं, जिनमें युवाओं के “गोविंदा” दल हिस्सा ले रहे हैं।
व्रत और पूजा-विधि
भक्त निर्जला व्रत रखकर रात्रि में विधि-विधान से बाल गोपाल का अभिषेक करेंगे और माखन-मिश्री का भोग अर्पित करेंगे। घरों में भी झूला सजाकर लड्डू गोपाल की पूजा-अर्चना की जा रही है।