आगरा, उत्तर प्रदेश: भारत का ताजमहल दुनिया की सबसे प्रसिद्ध ऐतिहासिक इमारतों में से एक है और New7Wonders of the World की 2007 में घोषित सूची में शामिल सात स्मारकों में से एक है। आगरा में यमुना नदी के किनारे स्थित इस स्मारक का निर्माण मुगल सम्राट शाहजहां ने अपनी पत्नी मुमताज महल की मृत्यु के बाद उनकी याद में करवाया था। मुख्य मकबरे का निर्माण 17वीं शताब्दी में हुआ और पूरे परिसर को तैयार करने में कई वर्षों का समय लगा। सफेद संगमरमर, विशाल गुंबद, चार मीनारें, बारीक नक्काशी और पत्थरों की जड़ाई इसका प्रमुख आकर्षण हैं। ताजमहल केवल एक मकबरा नहीं, बल्कि मुगलकालीन वास्तुकला, शिल्पकला और उद्यान-योजना का महत्वपूर्ण उदाहरण है। 1983 में UNESCO ने इसे World Heritage Site के रूप में सूचीबद्ध किया। इसके सदियों पुराने इतिहास और वास्तुशिल्पीय महत्व के कारण आज भी दुनिया भर से लोग इसे देखने आते हैं।
ताजमहल कहां स्थित है?
ताजमहल आगरा, उत्तर प्रदेश में यमुना नदी के दक्षिणी किनारे पर स्थित है।
यह मुगलकालीन आगरा शहर के ऐतिहासिक स्मारकों के समूह का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
किसने बनवाया था ताजमहल?
ताजमहल का निर्माण मुगल सम्राट शाहजहां ने करवाया था।
शाहजहां की पत्नी मुमताज महल का निधन 1631 में हुआ था। उनके निधन के बाद शाहजहां ने उनकी स्मृति में एक भव्य मकबरा बनवाने का आदेश दिया।
मुमताज महल को शुरुआत में बुरहानपुर में दफनाया गया था। बाद में उनके अवशेषों को आगरा लाया गया और ताजमहल परिसर में दफनाया गया।
ताजमहल कब बनाया गया?
ताजमहल के निर्माण की शुरुआत 1630 के दशक में हुई।बमुख्य मकबरे का निर्माण लगभग 1630–1640 के दशक में पूरा हुआ माना जाता है, जबकि पूरे परिसर—जिसमें मस्जिद, मेहमानखाना, मुख्य द्वार और उद्यान आदि शामिल हैं—को पूरा होने में अधिक समय लगा।
ताजमहल परिसर के निर्माण को सामान्यतः 17वीं शताब्दी के मध्य तक पूरा माना जाता है।
इसे किसने डिजाइन किया?
ताजमहल को किसी एक व्यक्ति की कृति मानना पूरी तरह सही नहीं होगा। इसके निर्माण में वास्तुकारों, इंजीनियरों, कारीगरों, पत्थर तराशने वालों, सुलेखकारों और जड़ाई कलाकारों की बड़ी टीम शामिल थी।
ऐतिहासिक स्रोतों में उस्ताद अहमद लाहौरी का नाम प्रमुख वास्तुकार के रूप में मिलता है, हालांकि ताजमहल के निर्माण में अनेक विशेषज्ञों की भूमिका थी।
किस पत्थर से बना है ताजमहल?
ताजमहल का मुख्य मकबरा चमकदार सफेद संगमरमर से बनाया गया है। संगमरमर मुख्य रूप से मकराना, राजस्थान से लाया गया था।
इमारत में अलग-अलग रंगों और प्रकार के पत्थरों का इस्तेमाल भी सजावट के लिए किया गया। संगमरमर में कीमती और अर्ध-कीमती पत्थरों की पच्चीकारी (Pietra Dura) की गई है।
ताजमहल की वास्तुकला क्यों खास है?
ताजमहल की वास्तुकला में मुगल, फारसी, तुर्की और भारतीय स्थापत्य परंपराओं का प्रभाव दिखाई देता है।
इसकी प्रमुख विशेषताएं हैं:
– विशाल केंद्रीय गुंबद
– चारों कोनों पर मीनारें
– सफेद संगमरमर की संरचना
– सममित वास्तु योजना
– जटिल पच्चीकारी
– कुरान की आयतों की सुलेख सजावट
– चारबाग शैली का उद्यान
– ज्यामितीय डिजाइन
चार मीनारें क्यों बनाई गईं?
मुख्य मकबरे के चारों कोनों पर चार मीनारें हैं।
इनका निर्माण वास्तुशिल्पीय संतुलन के साथ किया गया था। प्रत्येक मीनार को थोड़ा बाहर की ओर झुकाकर बनाए जाने की बात भी व्यापक रूप से बताई जाती है, ताकि किसी संरचनात्मक क्षति की स्थिति में वे मुख्य मकबरे पर सीधे न गिरें।
हालांकि इस डिजाइन के उद्देश्य को लेकर लोकप्रिय व्याख्याओं और ऐतिहासिक प्रमाणों में अंतर हो सकता है।
ताजमहल का रंग बदलता हुआ क्यों दिखाई देता है?
सफेद संगमरमर प्रकाश के अनुसार अलग-अलग दिखाई दे सकता है।
सुबह की रोशनी, दिन का उजाला और चांदनी में संगमरमर की सतह पर पड़ने वाला प्रकाश अलग प्रभाव पैदा करता है। इसी वजह से ताजमहल का रंग अलग-अलग समय पर थोड़ा अलग नजर आता है।
ताजमहल में किसकी कब्र है?
मुख्य मकबरे के अंदर मुमताज महल और शाहजहां की समाधियां हैं।
हालांकि पर्यटकों को दिखाई देने वाली सजावटी समाधियां वास्तव में cenotaphs हैं। वास्तविक कब्रें नीचे के कक्ष में स्थित हैं।
ताजमहल को UNESCO ने कब मान्यता दी?
1983 में UNESCO ने ताजमहल को World Heritage Site घोषित किया।
UNESCO के अनुसार ताजमहल मुगल वास्तुकला की उत्कृष्ट उपलब्धियों में से एक है और इसे दुनिया की प्रसिद्ध सांस्कृतिक धरोहरों में गिना जाता है।
आधुनिक दुनिया के सात अजूबों में कैसे शामिल हुआ?
यहां एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है।
2007 में घोषित New7Wonders सूची UNESCO की सूची नहीं है।
इसे New7Wonders Foundation के अभियान के तहत वैश्विक सार्वजनिक मतदान के माध्यम से चुना गया था।
7 जुलाई 2007 को पुर्तगाल के लिस्बन में आयोजित समारोह में आधुनिक दुनिया के सात अजूबों की सूची घोषित की गई।
ताजमहल इस सूची में शामिल सात स्मारकों में से एक था।
2007 के सात आधुनिक अजूबे
ताजमहल के साथ सूची में शामिल थे:
1. चीन की महान दीवार — चीन
2. पेट्रा — जॉर्डन
3. क्राइस्ट द रिडीमर — ब्राज़ील
4. माचू पिच्चू — पेरू
5. चिचेन इट्ज़ा — मेक्सिको
6. ताजमहल — भारत
7. कोलोसियम — इटली
ताजमहल के निर्माण से जुड़ी एक जरूरी बात
ताजमहल के बारे में कई लोकप्रिय कहानियां इंटरनेट और लोककथाओं में मिलती हैं। उदाहरण के लिए, शाहजहां द्वारा अपने लिए यमुना के दूसरी ओर काले संगमरमर का दूसरा ताजमहल बनवाने की कहानी काफी प्रसिद्ध है।
लेकिन काले ताजमहल की कहानी को प्रमाणित ऐतिहासिक तथ्य नहीं माना जाता। इसलिए ताजमहल की खबर लिखते समय ऐसी बातों को तथ्य की तरह प्रस्तुत करना उचित नहीं है।
आज ताजमहल क्यों महत्वपूर्ण है?
आज ताजमहल भारत की महत्वपूर्ण ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों में से एक है। यह मुगलकालीन वास्तुकला, पत्थर की जड़ाई, सुलेख और उद्यान-योजना का अध्ययन करने के लिए भी महत्वपूर्ण स्थल है।
इसके संरक्षण के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) और अन्य संबंधित संस्थाएं काम करती हैं।
ताजमहल की पूरी टाइमलाइन
– 1631: मुमताज महल का निधन।
– 1630 के दशक: ताजमहल परिसर के निर्माण का काम शुरू।
– 17वीं शताब्दी: मुख्य मकबरे और परिसर के अन्य हिस्सों का निर्माण पूरा।
– 1983: UNESCO World Heritage Site में शामिल।
– 7 जुलाई 2007: New7Wonders की सूची में आधुनिक दुनिया के सात अजूबों में शामिल।
– आज: भारत की सबसे प्रसिद्ध ऐतिहासिक धरोहरों में से एक।
Read more:-पहाड़ों के बीच बसा रहस्यमयी शहर, माचू पिच्चू कैसे बना दुनिया का अजूबा….