संयुक्त राष्ट्र की ओर से घोषित अंतरराष्ट्रीय खाद्य हानि एवं अपव्यय जागरूकता दिवस (IDAFLW) हर साल 29 सितंबर को मनाया जाता है। 2026 में इसका सातवां आयोजन है। इसे खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) और संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) मिलकर आयोजित करते हैं।
इस साल की थीम
इस साल की थीम “Transformative Potential of Reducing Food Loss and Waste” है, यानी खाने की हानि और बर्बादी घटाने की बदलाव लाने वाली ताकत। आयोजकों के मुताबिक इससे तीन फायदे मिल सकते हैं: खाद्य सुरक्षा और पोषण बेहतर होगा, प्राकृतिक संसाधनों और ग्रीनहाउस गैसों पर दबाव घटेगा और आर्थिक उत्पादकता बढ़ेगी। रोम में इस मौके पर FAO-UNEP का कार्यक्रम है, जिसे ऑनलाइन भी देखा जा सकता है।
इस दिवस की शुरुआत कैसे हुई
19 दिसंबर 2019 को संयुक्त राष्ट्र महासभा ने प्रस्ताव 74/209 पारित कर 29 सितंबर को यह दिवस घोषित किया। इसका मकसद खाने की हानि और बर्बादी घटाने के लिए जागरूकता और सामूहिक कार्रवाई को बढ़ावा देना है। यह सतत विकास लक्ष्य (SDG) 12.3 से जुड़ा है, जिसके तहत 2030 तक खुदरा और उपभोक्ता स्तर पर प्रति व्यक्ति खाद्य अपव्यय आधा करने का लक्ष्य है।
आंकड़े जो चौंकाते हैं
UNEP (2024) के अनुसार दुनिया में बर्बाद होने वाले खाने का 60% घरों से, 28% फूड सर्विस (होटल-रेस्तरां) से और 12% खुदरा दुकानों से आता है। हर साल 1 ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा कीमत का खाना फेंक दिया जाता है। FAO के अनुसार 2025 में दुनिया में हर 13 में से 1 व्यक्ति भूखा रहा, यानी 60.8 करोड़ से 69.6 करोड़ लोग। FAO (2019) के मुताबिक जो खाना बर्बाद होता है, उससे हर साल 1.26 अरब लोगों का पेट भर सकता है।
भारत में तस्वीर
UNEP की 2021 की रिपोर्ट के अनुसार भारतीय घरों में प्रति व्यक्ति सालाना करीब 50 किलो खाना बर्बाद होता है, जो कुल मिलाकर करीब 6.88 करोड़ टन बैठता है। साथ ही FAO के हवाले से रिपोर्ट्स में कहा गया है कि भारत की 74% से ज्यादा आबादी स्वस्थ आहार का खर्च नहीं उठा पाती। ऐसे में फसल कटाई के बाद के नुकसान और घरेलू बर्बादी पर काबू पाना और जरूरी हो जाता है।
घर पर खाना बचाने के आसान तरीके
जरूरत भर का ही खाना बनाएं और खरीदारी की सूची बनाकर जाएं।
बचे खाने को सही तरीके से रखकर अगले भोजन में इस्तेमाल करें।
फल-सब्जियों को सही तापमान और नमी में स्टोर करें।
समारोहों में बचा खाना जरूरतमंदों तक पहुंचाने वाले संगठनों से जुड़ें।
पर्यावरण से भी जुड़ा मुद्दा
UNEP के अनुसार खाने की हानि और बर्बादी उतनी जमीन घेरती है, जो चीन और भारत के कुल क्षेत्रफल से ज्यादा है। इसे घटाने से जलवायु परिवर्तन से लड़ने में भी मदद मिलती है।