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नवरात्रि में दुर्गा पंडाल से लेकर गरबा तक: ऐसे बनाएं पूजा और उत्सव को खास…

नवरात्रि के दौरान शहरों में सजते हैं भव्य दुर्गा पंडाल, वहीं गरबा और पारंपरिक परिधानों का भी रहता है खास आकर्षण

by desk

नवरात्रि केवल पूजा और व्रत का पर्व नहीं है, बल्कि देश के अलग-अलग हिस्सों में इसे अलग-अलग सांस्कृतिक परंपराओं के साथ मनाया जाता है। कहीं दुर्गा पंडाल आकर्षण का केंद्र होते हैं तो कहीं गरबा और डांडिया की धूम रहती है। घरों में भी मां दुर्गा की पूजा के साथ विशेष सजावट की जाती है।

दुर्गा पंडाल में दिखती हैं अलग-अलग थीम

नवरात्रि के दौरान कई स्थानों पर सार्वजनिक दुर्गा पंडाल बनाए जाते हैं। पंडालों को धार्मिक, सांस्कृतिक या सामाजिक संदेश देने वाली अलग-अलग थीम पर सजाया जाता है।

कई जगह स्थानीय कला, पारंपरिक वास्तुकला और पर्यावरण-अनुकूल सजावट को भी पंडालों में शामिल किया जाता है।

घर को कैसे सजाएं?

नवरात्रि में घर के पूजा स्थान को फूलों, दीपक, रंगोली और पारंपरिक सजावटी सामग्री से सजाया जा सकता है। मिट्टी के दीये और पुन: उपयोग होने वाली सजावटी वस्तुओं का इस्तेमाल भी किया जा सकता है।

गरबा और डांडिया की रहती है धूम

नवरात्रि के दौरान गुजरात समेत देश के कई हिस्सों में गरबा और डांडिया के कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इन आयोजनों में लोग पारंपरिक संगीत के साथ सामूहिक नृत्य करते हैं।

स्थानीय शहरों में क्लब, सामुदायिक संगठन और निजी संस्थाएं भी गरबा कार्यक्रम आयोजित करती हैं।

नवरात्रि में पारंपरिक ड्रेस का क्रेज

गरबा और दुर्गा पूजा कार्यक्रमों में लोग पारंपरिक परिधान पहनना पसंद करते हैं। महिलाओं के बीच चनिया चोली, लहंगा और साड़ी, जबकि पुरुषों के बीच कुर्ता-पायजामा और पारंपरिक जैकेट जैसे परिधान लोकप्रिय रहते हैं।

ड्रेस रेंटल भी हो सकता है विकल्प

जो लोग हर साल नया पारंपरिक परिधान नहीं खरीदना चाहते, उनके लिए ड्रेस रेंटल एक विकल्प हो सकता है। स्थानीय कॉस्ट्यूम स्टोर और कुछ ऑनलाइन सेवाओं पर नवरात्रि के लिए पारंपरिक परिधान किराये पर मिल सकते हैं।

ड्रेस किराये पर लेते समय कीमत, साइज, किराये की अवधि, सिक्योरिटी डिपॉजिट और वापसी की शर्तों की जानकारी पहले लेनी चाहिए।

‘बेस्ट दुर्गा’ चुनने से पहले क्या देखें?

अगर किसी शहर में दुर्गा प्रतिमा या पंडाल प्रतियोगिता आयोजित की जाती है, तो अलग-अलग आयोजकों के मानदंड अलग हो सकते हैं। प्रतिमा की कलात्मकता, पंडाल की थीम, सजावट और पर्यावरण-अनुकूल सामग्री जैसे पहलुओं पर ध्यान दिया जा सकता है।

पर्यावरण-अनुकूल नवरात्रि पर जोर

नवरात्रि उत्सव में प्लास्टिक का कम इस्तेमाल, प्राकृतिक या पुन: उपयोग होने वाली सजावट और स्थानीय सामग्री का उपयोग पर्यावरण पर प्रभाव कम करने में मदद कर सकता है।

नवरात्रि का उत्सव धार्मिक आस्था के साथ स्थानीय कला, संस्कृति और सामुदायिक भागीदारी को भी सामने लाता है।

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