Home » Blog » Chhattisgarh Navratri 2026: जानिए छत्तीसगढ़ में कैसे मनाई जाती है नवरात्रि…

Chhattisgarh Navratri 2026: जानिए छत्तीसगढ़ में कैसे मनाई जाती है नवरात्रि…

मंदिरों में पूजा-अर्चना से लेकर शहरों के दुर्गा पंडाल और गरबा आयोजनों तक, अलग-अलग रूपों में मनाया जाता है नवरात्रि पर्व

by desk

छत्तीसगढ़ में नवरात्रि का अलग रंग: आस्था, परंपरा और भव्य आयोजन का संगम और परंपराओं से भी जुड़ा हुआ है। प्रदेश के अलग-अलग शहरों और गांवों में मां दुर्गा की पूजा, ज्योति कलश, दुर्गा पंडाल, भजन-कीर्तन और गरबा जैसे आयोजन किए जाते हैं।

मंदिरों में होती है विशेष पूजा

नवरात्रि के नौ दिनों में प्रदेश के देवी मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ देखने को मिलती है। मंदिरों में विशेष पूजा, आरती और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।

कई स्थानों पर नवरात्रि के दौरान अखंड ज्योति या ज्योति कलश प्रज्वलित करने की परंपरा भी देखने को मिलती है।

रतनपुर महामाया मंदिर का विशेष महत्व

छत्तीसगढ़ के रतनपुर स्थित मां महामाया मंदिर को प्रमुख देवी स्थलों में गिना जाता है। नवरात्रि के दौरान यहां विशेष धार्मिक आयोजन और श्रद्धालुओं की आवाजाही रहती है।

डोंगरगढ़ में मां बम्लेश्वरी के दर्शन

राजनांदगांव जिले के डोंगरगढ़ स्थित मां बम्लेश्वरी मंदिर भी प्रदेश के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है। नवरात्रि के दौरान यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।

मंदिर पहाड़ी पर स्थित होने के कारण यहां दर्शन के लिए श्रद्धालुओं को सीढ़ियों से भी जाना पड़ता है।

शहरों में सजते हैं दुर्गा पंडाल

रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग, भिलाई, राजनांदगांव और प्रदेश के दूसरे शहरों में नवरात्रि के दौरान अलग-अलग समितियों की ओर से दुर्गा पंडाल बनाए जाते हैं।

पंडालों में मां दुर्गा की प्रतिमा के साथ आकर्षक सजावट और धार्मिक या सामाजिक संदेश वाली थीम भी देखने को मिल सकती है।

गरबा और डांडिया भी बन रहे आकर्षण

शहरी क्षेत्रों में नवरात्रि के दौरान गरबा और डांडिया कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। युवा और परिवार पारंपरिक परिधानों में इन आयोजनों में शामिल होते हैं।

कई आयोजनों में लाइव म्यूजिक, प्रतियोगिताएं और पारंपरिक नृत्य भी शामिल किए जाते हैं।

ज्योति कलश की परंपरा

छत्तीसगढ़ के कई देवी मंदिरों और धार्मिक स्थलों में नवरात्रि के दौरान ज्योति कलश प्रज्वलित करने की परंपरा है। श्रद्धालु अपनी मनोकामना के लिए ज्योति प्रज्वलित करवाते हैं।

इस परंपरा का स्वरूप और धार्मिक विधि अलग-अलग स्थानों पर अलग हो सकती है।

गांवों में दिखती है लोक संस्कृति की झलक

ग्रामीण क्षेत्रों में नवरात्रि के दौरान भजन, जसगीत, देवी गीत और अन्य स्थानीय धार्मिक-सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इससे प्रदेश की लोक परंपराओं और सामुदायिक सहभागिता की झलक मिलती है।

आस्था के साथ संस्कृति का पर्व

छत्तीसगढ़ में नवरात्रि धार्मिक आस्था के साथ स्थानीय संस्कृति, लोककला और सामुदायिक भागीदारी को जोड़ने वाला पर्व भी है। मंदिरों की पूजा से लेकर दुर्गा पंडाल और गरबा आयोजनों तक, प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में नवरात्रि के कई रंग देखने को मिलते हैं।

 

You may also like