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महाअष्टमी 2026: मां महागौरी की पूजा विधि, मंत्र और कन्या पूजन

शारदीय नवरात्रि के आठवें दिन मां दुर्गा के आठवें स्वरूप मां महागौरी की आराधना की जाती है। महाअष्टमी पर दुर्गा पूजा, हवन और कन्या पूजन का विशेष महत्व माना जाता है।

by desk

शारदीय नवरात्रि के आठवें दिन महाअष्टमी का पर्व श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है। इस दिन मां दुर्गा के आठवें स्वरूप मां महागौरी की पूजा-अर्चना की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां महागौरी शांति, पवित्रता, करुणा और सौभाग्य की प्रतीक हैं।

महाअष्टमी पर कई श्रद्धालु विशेष पूजा, दुर्गा सप्तशती का पाठ और हवन करते हैं। अनेक परिवारों में इस दिन कन्या पूजन की परंपरा भी निभाई जाती है। भक्त मां दुर्गा से परिवार की सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और कल्याण की कामना करते हैं।

कौन हैं मां महागौरी? जानिए उनके स्वरूप का महत्व

नवदुर्गा के आठवें स्वरूप मां महागौरी का वर्ण अत्यंत गौर बताया गया है। उन्हें सामान्यतः चार भुजाओं वाली देवी के रूप में दर्शाया जाता है। उनके हाथों में त्रिशूल और डमरू जैसे प्रतीक होते हैं तथा उनका वाहन वृषभ माना जाता है।

धार्मिक मान्यताओं में मां महागौरी को तपस्या, शुद्धता और शांति से जोड़ा जाता है। उनकी पूजा भक्तों को मन की नकारात्मकता दूर करने, संयम अपनाने और जीवन में सकारात्मक दृष्टिकोण रखने की प्रेरणा देती है।

महाअष्टमी पर ऐसे करें मां महागौरी की पूजा

महाअष्टमी के दिन सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें और पूजा स्थल की सफाई करें। मां दुर्गा की प्रतिमा या तस्वीर के सामने दीपक जलाकर पूजा शुरू करें।

पूजा की विधि:

1. संकल्प लें: मां महागौरी का ध्यान कर श्रद्धापूर्वक पूजा का संकल्प करें।

2. दीपक जलाएं: पूजा स्थल पर घी का दीपक प्रज्वलित करें।

3. पूजा सामग्री अर्पित करें: मां को पुष्प, अक्षत, रोली और चंदन चढ़ाएं।

4. मंत्र जाप करें: मां महागौरी के मंत्र का श्रद्धापूर्वक जाप करें।

5. भोग लगाएं: फल, मिठाई या अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार सात्विक प्रसाद अर्पित करें।

6. आरती करें: पूजा के अंत में मां की आरती कर परिवार के सुख-शांति की प्रार्थना करें।

श्रद्धालु अपनी परंपरा के अनुसार दुर्गा सप्तशती का पाठ और हवन भी कर सकते हैं।

मां महागौरी का पूजा मंत्र

महाअष्टमी पर मां महागौरी की आराधना के दौरान इस मंत्र का जाप किया जाता है:

ॐ देवी महागौर्यै नमः॥

भक्त अपनी श्रद्धा और सुविधा के अनुसार मंत्र का जाप कर सकते हैं। पूजा में मन की एकाग्रता और श्रद्धा को विशेष महत्व दिया जाता है।

कन्या पूजन क्यों है महाअष्टमी पर खास?

महाअष्टमी पर कन्या पूजन की विशेष परंपरा है। इसमें छोटी कन्याओं को देवी के स्वरूप के रूप में सम्मान देकर उन्हें भोजन कराया जाता है। कई परिवारों में एक बालक को भैरव स्वरूप मानकर भोजन कराने की परंपरा भी प्रचलित है।

कन्या पूजन में आमतौर पर कन्याओं के पैर धोना, तिलक लगाना, भोजन कराना और सामर्थ्य के अनुसार उपहार या दक्षिणा देना शामिल होता है। इस परंपरा का संदेश बालिकाओं का सम्मान और नारी शक्ति के प्रति श्रद्धा व्यक्त करना है।

कन्या पूजन अष्टमी या नवमी को करने की परंपरा परिवार और क्षेत्र के अनुसार अलग-अलग हो सकती है।

मां महागौरी को क्या भोग लगाएं?

मां महागौरी को नारियल का भोग लगाने की परंपरा प्रचलित है। भक्त फल, मिठाई और अन्य सात्विक प्रसाद भी अर्पित कर सकते हैं। कन्या पूजन में हलवा, पूरी और चने का प्रसाद कई स्थानों पर बनाया जाता है।

महाअष्टमी का धार्मिक महत्व

महाअष्टमी को नवरात्रि के प्रमुख दिनों में गिना जाता है। इस दिन मां दुर्गा की आराधना कर भक्त शक्ति, शांति और समृद्धि की कामना करते हैं। कई स्थानों पर दुर्गा पंडालों और मंदिरों में विशेष अनुष्ठान आयोजित किए जाते हैं।

महाअष्टमी का संदेश केवल पूजा तक सीमित नहीं है, बल्कि साहस, करुणा और नारी शक्ति के सम्मान से भी जुड़ा है। मां महागौरी की आराधना के साथ भक्त नवरात्रि के अंतिम चरण में प्रवेश करते हैं और विजयादशमी की तैयारी करते हैं।

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