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हाथ से नोट्स लिखने वालों का दिमाग करता है अलग तरह से काम? नई रिसर्च में सामने आया बड़ा कनेक्शन

डिजिटल दौर में नोट्स बनाने के लिए टाइपिंग का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। मोबाइल, लैपटॉप और टैबलेट ने लिखने के काम को आसान और तेज जरूर

by desk

नई दिल्ली। डिजिटल दौर में नोट्स बनाने के लिए टाइपिंग का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। मोबाइल, लैपटॉप और टैबलेट ने लिखने के काम को आसान और तेज जरूर बना दिया है, लेकिन नई मनोवैज्ञानिक रिसर्च यह संकेत देती है कि हाथ से नोट्स लिखना दिमाग में जानकारी को प्रोसेस करने और याद रखने के तरीके को प्रभावित कर सकता है। शोध के मुताबिक, हाथ से लिखने के दौरान दिमाग के कई हिस्से एक साथ सक्रिय होते हैं, जिससे सीखने और नई जानकारी को याद रखने में मदद मिल सकती है।

हाथ से लिखने और टाइप करने में दिमाग का अंतर

2024 में Frontiers in Psychology में प्रकाशित एक अध्ययन में नॉर्वेजियन यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी (NTNU) के शोधकर्ताओं ने 36 विश्वविद्यालय छात्रों की ब्रेन एक्टिविटी का अध्ययन किया। इसके लिए हाई-डेंसिटी EEG सिस्टम में 256 सेंसर का इस्तेमाल किया गया।

प्रतिभागियों से एक तरफ डिजिटल पेन की मदद से शब्द लिखने और दूसरी तरफ कीबोर्ड पर वही जानकारी टाइप करने को कहा गया। शोधकर्ताओं ने पाया कि हाथ से लिखने के दौरान दिमाग के अलग-अलग हिस्सों के बीच कनेक्टिविटी अधिक व्यापक थी।

इस गतिविधि में दिमाग के मोटर, विजुअल और सेंसररी प्रोसेसिंग से जुड़े हिस्से शामिल थे। खासतौर पर थीटा और अल्फा फ्रीक्वेंसी में होने वाली गतिविधियों का संबंध पहले के शोध में सीखने और मेमोरी फॉर्मेशन से जोड़ा गया है।

अक्षर बनाने की प्रक्रिया भी हो सकती है अहम

हाथ से लिखते समय दिमाग को सिर्फ शब्द याद नहीं रखने पड़ते, बल्कि उंगलियों और हाथ की गतिविधियों को नियंत्रित भी करना पड़ता है। व्यक्ति यह भी देखता है कि हाथ किस तरह अक्षर बना रहा है और वह अक्षर उसके दिमाग में मौजूद शब्द या अक्षर की जानकारी से मेल खा रहा है या नहीं।

इसके विपरीत, टाइपिंग में आमतौर पर किसी अक्षर को बनाने के बजाय केवल संबंधित की दबाई जाती है। हालांकि टाइपिंग भी ध्यान और कौशल की मांग करती है, लेकिन दोनों गतिविधियों में होने वाली शारीरिक और मानसिक प्रक्रिया एक जैसी नहीं होती।

हाथ से लिखने पर जानकारी को समझना पड़ सकता है ज्यादा जरूरी

हैंडराइटिंग का एक और फायदा इसकी धीमी गति से जुड़ा हो सकता है। कोई व्यक्ति आमतौर पर किसी लेक्चर को उतनी तेजी से हाथ से नहीं लिख सकता, जितनी तेजी से उसे सुना सकता है। इसलिए नोट्स बनाते समय उसे तय करना पड़ता है कि कौन-सी जानकारी जरूरी है और क्या छोड़ना है।

छात्र अक्सर पूरी बात लिखने के बजाय महत्वपूर्ण शब्द, छोटे वाक्य, तीर के निशान या अपने शब्दों में संक्षिप्त जानकारी लिखते हैं। इस प्रक्रिया में उन्हें जानकारी को सुनने के साथ-साथ समझना और उसका सार निकालना पड़ता है।

वहीं, लैपटॉप पर टाइपिंग तेज होने के कारण छात्र कई बार शिक्षक की कही बात को लगभग शब्दशः लिख लेते हैं। इससे जानकारी रिकॉर्ड तो हो जाती है, लेकिन उस समय उसे समझने और प्रोसेस करने पर कम ध्यान जा सकता है।

क्या टाइपिंग से पढ़ाई खराब होती है?

ऐसा कहना सही नहीं होगा। रिसर्च यह साबित नहीं करती कि टाइपिंग खराब है या हर स्थिति में हाथ से लिखना बेहतर है। टाइपिंग लंबे दस्तावेज तैयार करने, तेजी से काम करने और बड़ी मात्रा में जानकारी दर्ज करने के लिए बेहद उपयोगी है।

शोधकर्ताओं का मुख्य संकेत यह है कि हैंडराइटिंग और टाइपिंग दिमाग के लिए बिल्कुल समान गतिविधियां नहीं हैं। हाथ से लिखने में मूवमेंट, टच, विजन और मानसिक प्रोसेसिंग एक साथ जुड़ सकते हैं, जिससे नई जानकारी को याद रखने के लिए अतिरिक्त कनेक्शन बन सकते हैं।

2025 की समीक्षा ने भी बताई व्यापक ब्रेन एक्टिविटी

2025 में प्रकाशित एक व्यापक समीक्षा में भी हाथ से लिखने के दौरान मोटर, सेंसररी और कॉग्निटिव प्रोसेसिंग से जुड़े अपेक्षाकृत व्यापक नेटवर्क के सक्रिय होने की बात सामने आई। हालांकि इस विषय पर अभी और शोध की जरूरत है।

एक महत्वपूर्ण सीमा यह भी सामने आई है कि मूल अध्ययन में टाइपिंग की स्थिति सामान्य कुशल टाइपिंग जैसी नहीं थी, क्योंकि प्रतिभागियों ने टाइपिंग के लिए मुख्य रूप से दाहिनी तर्जनी का इस्तेमाल किया था। आमतौर पर लोग कीबोर्ड पर दोनों हाथों और कई उंगलियों का इस्तेमाल करते हैं। इसलिए इस अंतर को ध्यान में रखना जरूरी है।

छात्रों के लिए क्या सीख?

रिसर्च के आधार पर छात्रों के लिए पूरी तरह डिजिटल नोट्स छोड़ने की जरूरत नहीं है। लेकिन पढ़ाई के दौरान महत्वपूर्ण बिंदुओं को हाथ से लिखना, अपने शब्दों में नोट्स बनाना और जरूरी जानकारी को संक्षिप्त करना सीखने की प्रक्रिया को अधिक सक्रिय बना सकता है।

यानी तकनीक को छोड़ने के बजाय दोनों तरीकों का संतुलित इस्तेमाल किया जा सकता है। लंबे नोट्स या दस्तावेज के लिए टाइपिंग और महत्वपूर्ण कॉन्सेप्ट, रिवीजन पॉइंट्स या याद रखने वाली जानकारी के लिए हाथ से लिखना उपयोगी रणनीति हो सकती है।

निष्कर्ष: हाथ से लिखना सिर्फ पुरानी आदत नहीं है। शुरुआती वैज्ञानिक प्रमाण बताते हैं कि कलम से लिखते समय दिमाग में जानकारी को प्रोसेस करने का तरीका टाइपिंग से अलग हो सकता है। हालांकि यह साबित नहीं हुआ है कि हर व्यक्ति और हर परिस्थिति में हाथ से लिखने से बेहतर याददाश्त होगी। फिर भी छात्रों और सीखने वालों के लिए नोटबुक और पेन को पूरी तरह छोड़ देना शायद सही फैसला नहीं होगा।

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