भारत में दशहरा या विजयादशमी प्रमुख हिंदू त्योहारों में से एक है। यह पर्व नवरात्रि के समापन के बाद दशमी तिथि को मनाया जाता है। देश के अलग-अलग हिस्सों में इसे अलग-अलग धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं के साथ मनाया जाता है।
भगवान राम और रावण की कथा से जुड़ा है दशहरा
दशहरे से जुड़ी प्रमुख धार्मिक मान्यता रामायण की कथा से संबंधित है। मान्यता के अनुसार भगवान राम ने लंका के राजा रावण का वध किया और माता सीता को वापस लेकर अयोध्या लौटे।
इसी विजय की स्मृति में विजयादशमी मनाने की परंपरा बताई जाती है।
बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक
दशहरे को सामान्यतः अच्छाई की बुराई पर विजय के प्रतीक के रूप में देखा जाता है। रावण का पुतला जलाने की परंपरा इसी धार्मिक कथा से जुड़ी हुई है।
नवरात्रि से क्या संबंध है?
नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की पूजा की जाती है। दसवें दिन विजयादशमी मनाई जाती है।
पूर्वी भारत में इसी अवधि में दुर्गा पूजा के समापन के साथ मां दुर्गा की प्रतिमा का विसर्जन किया जाता है।
देश के अलग-अलग हिस्सों में अलग परंपराएं
उत्तर भारत के कई हिस्सों में रामलीला और रावण दहन दशहरे का प्रमुख आकर्षण होते हैं। वहीं पश्चिम बंगाल और कुछ अन्य राज्यों में दुर्गा पूजा के समापन को विशेष महत्व दिया जाता है।
कर्नाटक के मैसूर में दशहरा अपने भव्य सांस्कृतिक आयोजनों के लिए प्रसिद्ध है।
शस्त्र पूजा की भी परंपरा
दशहरे के अवसर पर कई समुदायों और परिवारों में शस्त्र पूजा करने की परंपरा है। कुछ स्थानों पर वाहन, औजार और कार्य से जुड़े उपकरणों की भी पूजा की जाती है।
किसानों के लिए भी विशेष अवसर
भारत के कई ग्रामीण क्षेत्रों में दशहरा कृषि और स्थानीय परंपराओं से भी जुड़ा हुआ है। किसान अपनी कृषि सामग्री और औजारों की पूजा करते हैं।
दशहरे का संदेश
दशहरा धार्मिक कथा के साथ आत्मचिंतन और सदाचार का संदेश देने वाला पर्व भी माना जाता है। इस दिन लोग सत्य, धर्म और सकारात्मक मूल्यों को अपनाने का संकल्प लेते हैं।
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