दक्षिण कश्मीर के कुलगाम में शुक्रवार को पहलगाम जैसा आतंकी हमला हुआ। आतंकवादियों ने ईंट-भट्ठे पर काम कर रहे प्रवासी मजदूरों के नाम पूछे, फिर छत्तीसगढ़ के दो हिंदू मजदूरों को समूह से अलग करके गोली मार दी। हमले में एक मजदूर की मौके पर और दूसरे की अस्पताल में मौत हो गई।
मारे गए युवकों की पहचान 24 वर्षीय दीपक रात्रे और 28 वर्षीय भूपेंद्र के रूप में हुई है। अधिकारियों के अनुसार हमला कुलगाम से करीब 20 किलोमीटर दूर केलाम में हुआ। स्थानीय लोगों के मुताबिक 10-12 राउंड फायर की आवाज सुनी गई। आतंकियों ने हमले से पहले रेकी करके ये इलाका चुना था।
घटना के समय वहां कई प्रवासी मजदूर मौजूद थे, लेकिन हिंदू सिर्फ यही दोनों थे। आतंकी हमले की खबर के तुरंत बाद सुरक्षा बलों ने पूरे इलाके की घेराबंदी कर दी है। गाड़ियों की चेकिंग की जा रही है और पुलिस की गाड़ियां आतंकियों की तलाश में जुट गई हैं।
सूत्रों के अनुसार जांच एजेंसियों को हमले में एक स्थानीय और एक पाकिस्तानी आतंकी के शामिल होने का संदेह है। शुरुआती जांच का फोकस मोहम्मद लतीफ पर है। वह पिछले साल लश्कर-ए-तैयबा/द रेजिस्टेंस फ्रंट (टीआरएफ) में शामिल हुआ था। मामले की जांच जारी है। अभी कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि मृतकों के परिवार को पहले से दिए जा रहे ₹6 लाख के मुआवजे के अलावा मुख्यमंत्री राहत कोष से भी ₹10 लाख की राशि दी जाएगी।
जम्मू-कश्मीर में हर साल करीब 3 से 5 लाख प्रवासी मजदूर मौसमी या अस्थायी काम के लिए पहुंचते हैं। इनमें सबसे ज्यादा मजदूर बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और छत्तीसगढ़ से आते हैं। ये कंस्ट्रक्शन, ईंट-भट्ठों, सड़क परियोजनाओं, बागवानी, कृषि, होटल-पर्यटन और छोटे उद्योगों में काम करते हैं।