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करीब 2 हजार साल पुराना रोम का विशाल कोलोसियम, जानिए किसने बनवाया और कैसे बना दुनिया के 7 अजूबों में शामिल…

आधुनिक विश्व के नए 7 अजूबों में शामिल कोलोसियम (Colosseum) इटली की राजधानी रोम में स्थित एक विशाल प्राचीन एम्फीथिएटर है।

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आधुनिक विश्व के नए 7 अजूबों में शामिल कोलोसियम (Colosseum) इटली की राजधानी रोम में स्थित एक विशाल प्राचीन एम्फीथिएटर है। यह रोमन साम्राज्य की इंजीनियरिंग, वास्तुकला और मनोरंजन संस्कृति का एक महत्वपूर्ण प्रतीक माना जाता है।

कोलोसियम कहाँ स्थित है?

कोलोसियम यूरोपीय देश इटली की राजधानी रोम के केंद्र में स्थित है। यह प्राचीन रोमन साम्राज्य की सबसे प्रसिद्ध संरचनाओं में से एक है।

 निर्माण कब हुआ था?

कोलोसियम का निर्माण लगभग 70 से 72 ईस्वी के बीच शुरू हुआ था। इसका निर्माण रोमन सम्राट वेस्पासियन के शासनकाल में शुरू कराया गया।

निर्माण कार्य उनके बेटे और उत्तराधिकारी टाइटस के शासनकाल में पूरा हुआ और वर्ष 80 ईस्वी में इसका उद्घाटन किया गया। बाद में सम्राट डोमिशियन ने भी इसमें कुछ अतिरिक्त निर्माण कार्य करवाए।

कोलोसियम किसने बनवाया था?

कोलोसियम का निर्माण रोमन सम्राट वेस्पासियन ने शुरू करवाया था। वह फ्लेवियन राजवंश के संस्थापक थे।

वेस्पासियन के बाद उनके पुत्र सम्राट टाइटस ने निर्माण कार्य को पूरा कराया और इसका उद्घाटन किया। इसी कारण इसे मूल रूप से फ्लेवियन एम्फीथिएटर भी कहा जाता था।

कोलोसियम नाम कैसे पड़ा?

इस विशाल इमारत का मूल नाम फ्लेवियन एम्फीथिएटर था।

बाद के समय में इसे कोलोसियम कहा जाने लगा। माना जाता है कि इसके पास रोमन सम्राट नीरो की एक विशाल प्रतिमा, जिसे कोलोसस ऑफ नीरो कहा जाता था, मौजूद थी। इसी विशाल प्रतिमा के कारण धीरे-धीरे इस एम्फीथिएटर का नाम कोलोसियम पड़ गया।

कोलोसियम क्यों बनाया गया था?

कोलोसियम का निर्माण मुख्य रूप से जनता के मनोरंजन के लिए किया गया था। यहां प्राचीन रोमन काल में विभिन्न सार्वजनिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते थे। इनमें ग्लैडिएटर मुकाबले, नाटकीय प्रदर्शन, जानवरों से जुड़े प्रदर्शन और अन्य सार्वजनिक आयोजन शामिल थे।

कोलोसियम कितना बड़ा है?

कोलोसियम अपने समय का सबसे बड़ा एम्फीथिएटर माना जाता था। इसमें अनुमानित रूप से लगभग 50,000 से 80,000 दर्शकों के बैठने की क्षमता थी।

इसकी संरचना में कई मंजिलें और सैकड़ों प्रवेश द्वार बनाए गए थे, ताकि बड़ी संख्या में लोग आसानी से अंदर और बाहर जा सकें।

कोलोसियम का निर्माण कैसे किया गया?

कोलोसियम के निर्माण में पत्थर, कंक्रीट और ईंटों का इस्तेमाल किया गया था। इसकी इंजीनियरिंग इतनी उन्नत थी कि हजारों दर्शकों के आने-जाने के लिए विशेष रास्ते और प्रवेश द्वार बनाए गए थे।

रोमन इंजीनियरिंग का यह अद्भुत उदाहरण आज भी दुनिया भर के वास्तुकारों और इतिहासकारों को आकर्षित करता है।

कोलोसियम को नुकसान कैसे पहुंचा?

सदियों के दौरान कोलोसियम को कई भूकंपों और प्राकृतिक आपदाओं से नुकसान पहुंचा। इसके अलावा, अलग-अलग समय में इसके कुछ हिस्सों के पत्थरों को अन्य निर्माण कार्यों में भी इस्तेमाल किया गया।

इसके बावजूद कोलोसियम का एक बड़ा हिस्सा आज भी मौजूद है और रोम के इतिहास की पहचान बना हुआ है।

कोलोसियम को यूनेस्को विश्व धरोहर का दर्जा कब मिला?

कोलोसियम को अलग से नहीं, बल्कि रोम के ऐतिहासिक केंद्र के हिस्से के रूप में वर्ष 1980 में यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल में शामिल किया गया था।

कोलोसियम दुनिया के 7 अजूबों में कब शामिल हुआ?

वर्ष 2007 में दुनिया भर में हुए वैश्विक मतदान के बाद कोलोसियम को आधुनिक विश्व के नए 7 अजूबों में शामिल किया गया।

कोलोसियम को अजूबा क्यों माना गया?

कोलोसियम को दुनिया का अजूबा इसलिए माना जाता है क्योंकि लगभग 2,000 साल पहले इतनी विशाल और आधुनिक व्यवस्था वाली संरचना का निर्माण करना एक असाधारण उपलब्धि थी।

इसकी वास्तुकला, दर्शकों के बैठने की विशाल व्यवस्था और हजारों लोगों के प्रवेश और निकास की इंजीनियरिंग उस समय के लिए बेहद उन्नत थी।

आज भी कोलोसियम प्राचीन रोमन साम्राज्य की शक्ति, वास्तुकला और इंजीनियरिंग का सबसे बड़ा प्रतीक माना जाता है।

कोलोसियम से जुड़ी खास बातें

  • कोलोसियम को मूल रूप से फ्लेवियन एम्फीथिएटर कहा जाता था।
  • इसका निर्माण सम्राट वेस्पासियन ने शुरू कराया था।
  • वर्ष 80 ईस्वी में सम्राट टाइटस के शासनकाल में इसका उद्घाटन हुआ।
  • यह प्राचीन रोम के सबसे बड़े सार्वजनिक मनोरंजन स्थलों में से एक था।
  • वर्ष 2007 में इसे आधुनिक विश्व के नए 7 अजूबों में शामिल किया गया।

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