केप कैनावेरल। अंतरिक्ष में भटक रहा SpaceX का एक पुराना रॉकेट अगले कुछ दिनों में चांद से टकराने वाला है। यह ‘आवारा’ रॉकेट करीब डेढ़ साल पहले दो मून लैंडर्स को अंतरिक्ष में पहुंचाने के बाद खाली हो गया था और अब भटकते हुए चांद की सतह से टकराने की दिशा में बढ़ रहा है। वैज्ञानिकों के मुताबिक 5 अगस्त (बुधवार) को रॉकेट का ऊपरी हिस्सा चांद के पश्चिमी हिस्से में स्थित आइंस्टीन क्रेटर के पास गिरेगा।
अंतरिक्ष ट्रैकिंग विशेषज्ञ बिल ग्रे के अनुमान के अनुसार रॉकेट करीब 5400 मील प्रति घंटे यानी लगभग 8700 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चांद से टकराएगा। यह गति आवाज की रफ्तार से करीब सात गुना ज्यादा है। टक्कर चांद के उस हिस्से पर होगी जो सूर्य की रोशनी में रहता है।
एक्सपर्ट्स के मुताबिक टक्कर के बाद निकलने वाला मलबा और धूल कई किलोमीटर तक अंतरिक्ष में फैल सकता है। लॉस अलामोस नेशनल लेबोरेटरी के वैज्ञानिक बेंजामिन फर्नांडो ने कहा कि चांद पर गुरुत्वाकर्षण कम है और हवा नहीं है, इसलिए धूल को उड़ाकर दूर ले जाने वाली कोई प्रक्रिया नहीं होगी। उन्होंने बताया कि इस घटना से वैज्ञानिक अंतरिक्ष मलबे से भविष्य के अंतरिक्ष यात्रियों को कितना खतरा हो सकता है, इसे बेहतर समझना चाहते हैं।
फर्नांडो के अनुमान के मुताबिक इस टक्कर से चांद की सतह पर करीब 90 फीट (27 मीटर) चौड़ा और 16 फीट (5 मीटर) गहरा गड्ढा बन सकता है। नासा का लूनर रिकॉनिसेंस ऑर्बिटर और दक्षिण कोरिया का डानुरी लूनर ऑर्बिटर इस घटना की तस्वीरें टक्कर से पहले और बाद में कैद करेंगे।
रॉकेट का यह हिस्सा करीब 40 फीट (12 मीटर) लंबा और लगभग 4500 किलोग्राम वजन का है। इसे 15 जनवरी 2025 को दो प्राइवेट मून लैंडर्स को अंतरिक्ष में भेजने के लिए इस्तेमाल किया गया था। इनमें से एक फायरफ्लाई एयरोस्पेस का ब्लू घोस्ट था, जिसने निजी अंतरिक्ष यान के रूप में पहली बार पूरी तरह सफल चंद्र लैंडिंग की थी। दूसरा जापान की कंपनी आईस्पेस का लैंडर चांद पर उतरने के दौरान दुर्घटनाग्रस्त हो गया था।
यह पहली बार नहीं है जब कोई खराब पड़ा रॉकेट चांद से टकराएगा। साल 2022 में एक चीनी रॉकेट का हिस्सा चांद के सुदूर हिस्से में गिरा था। नासा ने भी अपोलो मिशन और 2009 के एलसीआरओएसएस मिशन के दौरान रॉकेट के हिस्सों को जानबूझकर चांद पर गिराया था।
वैज्ञानिकों का कहना है कि आने वाले वर्षों में चांद पर इंसानों और रोबोटिक मिशनों की संख्या बढ़ने वाली है। ऐसे में अंतरिक्ष मलबे की निगरानी और ट्रैफिक नियंत्रण को बेहतर बनाना जरूरी होगा।