सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को एक जनहित याचिका पर अगले हफ़्ते सुनवाई के लिए सहमति दी। इसमें CEC ज्ञानेश कुमार के निलंबन की माँग की गई है। साथ ही इस बात को चुनौती दी गई है कि उनके नेतृत्व वाला चुनाव आयोग कथित तौर पर बाक़ी दो चुनाव आयुक्तों की मंज़ूरी के बिना फ़ैसले ले रहा है। मामला मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची व वी. मोहना की पीठ के सामने उठाया गया।
याचिका में क्या सवाल उठाए गए हैं
याचिका पटना के निवासी राकेश कुमार सिंह ने दायर की है। इसमें अदालत से तय करने को कहा गया है कि क्या CEC वे शक्तियाँ अकेले इस्तेमाल कर रहे हैं जो क़ानूनन पूरे आयोग की हैं। अगर जवाब हाँ है, तो ऐसे फ़ैसलों को अनधिकृत घोषित करने और उचित क़ानूनी कार्रवाई की माँग की गई है। (deccanchronicle)
रिकॉर्ड तलब करने की माँग
याचिका में आयोग के मूल रिकॉर्ड मँगाने की माँग है। इनमें बैठकों के ब्योरे, एजेंडा, अनुमोदन पत्रक, फ़ाइल नोटिंग, कार्य-आवंटन आदेश, IT एक्सेस रिकॉर्ड, सर्वर लॉग और डेटाबेस में बदलाव का इतिहास शामिल हैं।
पृष्ठभूमि: इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट
यह याचिका इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट की पृष्ठभूमि में आई है। रिपोर्ट के मुताबिक़ चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में SIR से जुड़े फ़ैसलों और आदेशों पर कम से कम 14 बार रिकॉर्ड में आपत्ति दर्ज की। उनका कहना था कि ये आदेश उनकी जानकारी के बिना जारी हुए।
क्वो वारंटो नोटिस की माँग
याचिका में ज्ञानेश कुमार को क्वो वारंटो नोटिस जारी करने की भी माँग की गई है। अगली सुनवाई में मुख्य सवाल यह रहेगा कि तीन सदस्यीय चुनाव आयोग में फ़ैसले कैसे लिए जाने चाहिए और CEC की व्यक्तिगत भूमिका की सीमा क्या है।
आगे क्या
अभी सिर्फ़ सुनवाई के लिए मामला सूचीबद्ध होने की बात सामने आई है। अदालत का कोई फ़ैसला या टिप्पणी नहीं आई है।
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