हमारा देश भारत 15 अगस्त 1947 को स्वतंत्र हुआ…उस समय देश के पास संसाधन सीमित थे, गरीबी और अशिक्षा व्यापक थी, उद्योग और तकनीक बहुत पीछे थे…लेकिन उस पीढ़ी के पास एक बड़ी पूँजी थी — आशा, संघर्ष, अनुशासन और राष्ट्र के प्रति विश्वास…उन्होंने अपने वर्तमान का त्याग कर आने वाली पीढ़ियों के बेहतर भविष्य का सपना देखा था.
आज 2026 का भारत उस यात्रा का परिणाम है…शिक्षा गाँवों तक पहुँची, विज्ञान और तकनीक ने देश को नई ऊँचाइयाँ दीं और डिजिटल क्रांति ने ज्ञान तथा अवसरों की सीमाएँ लगभग समाप्त कर दीं. लेकिन आज की Gen-Z के सामने चुनौतियाँ अलग हैं…उसके पास साधन और विकल्प पहले से कहीं अधिक हैं, पर साथ ही परस्पर तुलना, सोशल मीडिया का अंधानुकरण, तीव्र प्रतिस्पर्धा, और तुरंत सफलता की चाह जैसे संकट भी हैं.
पिछली पीढ़ी पूछती थी — “साधन कम हैं, आगे कैसे बढ़ें?” आज की पीढ़ी पूछती है — “इतने विकल्पों में सही रास्ता कौन-सा चुनें?”
मेरे हिसाब से आज की शिक्षा केवल डिग्री और नौकरी तक सीमित नहीं होनी चाहिए…बल्कि शिक्षा युवा को ‘ज्ञान के साथ विवेक’, ‘तकनीक के साथ जिम्मेदारी’ और ‘सफलता के साथ संवेदना’ दे सके, ऐसी होनी चाहिए.
हम जानते हैं कि विकास हमें गति देता है, शिक्षा क्षमता देती है और संस्कृति दिशा देती है…हमें ऐसा युवा चाहिए जो आधुनिक और वैश्विक हो, लेकिन अपनी जड़ों और मूल्यों से भी जुड़ा रहे…1947 की पीढ़ी ने हमें स्वतंत्र भारत दिया… अगली पीढ़ियों ने उसे खड़ा किया… अब Gen-Z की जिम्मेदारी है कि वह भारत को केवल आर्थिक रूप से नहीं, बल्कि ज्ञान, चरित्र, संस्कृति और संवेदना से भी समृद्ध बनाए…
आखिर आने वाली पीढ़ियाँ हमसे यही पूछेंगी — जब भारत को आगे ले जाने का अवसर आपके हाथ में था, तब आपने भारत को क्या दिया?
यही स्वतंत्रता का अगला अर्थ है — हमने क्या पाया नहीं, बल्कि हम आगे क्या देकर जाएँगे…!!
– शोभा अवस्थी, रायपुर, छत्तीसगढ़
अस्वीकरण: इस लेख में व्यक्त विचार लेखक के व्यक्तिगत हैं। इससे सहमत या असहमत होना पाठकों का व्यक्तिगत अधिकार है। यह लेख जानकारी और जागरूकता के उद्देश्य से है, यह किसी भी प्रकार की पेशेवर सलाह का विकल्प नहीं है।