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ग्लोबल वार्मिंग पर गंभीर चेतावनी, 1.5°C की सीमा पार करने की ओर दुनिया

by desk

यूएनईपी की रिपोर्ट में चिंता जताई गई, मौजूदा नीतियां जारी रहीं तो 2.6 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ सकता है वैश्विक तापमान

नई दिल्ली। जलवायु परिवर्तन को लेकर दुनिया के सामने खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) की ‘Limiting Overshoot’ रिपोर्ट में ग्लोबल वार्मिंग को लेकर गंभीर चेतावनी दी गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया तापमान वृद्धि की 1.5 डिग्री सेल्सियस की महत्वपूर्ण सीमा को पार करने की दिशा में बढ़ रही है।

रिपोर्ट में मौजूदा जलवायु नीतियों और उत्सर्जन में कमी लाने के प्रयासों को देखते हुए अनुमान जताया गया है कि यदि वर्तमान रफ्तार में बदलाव नहीं आया तो वैश्विक तापमान में वृद्धि 2.6 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकती है।

1.5 डिग्री की सीमा क्यों अहम है?

वैश्विक तापमान में 1.5 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि को जलवायु परिवर्तन के गंभीर प्रभावों को सीमित करने के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। तापमान बढ़ने के साथ ही अत्यधिक गर्मी, भारी बारिश, सूखा, समुद्र के बढ़ते स्तर और अन्य चरम मौसमी घटनाओं का खतरा बढ़ सकता है।

विशेषज्ञ लंबे समय से दुनिया के देशों से ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में तेजी से कटौती करने और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने की अपील कर रहे हैं।

मौजूदा नीतियों पर उठे सवाल

UNEP की रिपोर्ट का संकेत है कि केवल मौजूदा नीतियों के भरोसे जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को सीमित करना मुश्किल हो सकता है। तापमान वृद्धि को नियंत्रित करने के लिए देशों को उत्सर्जन कम करने की दिशा में और अधिक प्रभावी कदम उठाने होंगे।

ऊर्जा, परिवहन, उद्योग और अन्य क्षेत्रों से होने वाले कार्बन उत्सर्जन को कम करना इस दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

बढ़ते तापमान का दुनिया पर असर

अगर वैश्विक तापमान में लगातार वृद्धि होती रही तो इसका असर केवल मौसम तक सीमित नहीं रहेगा। कृषि, जल संसाधन, जैव विविधता, स्वास्थ्य और अर्थव्यवस्था पर भी इसके गंभीर प्रभाव पड़ सकते हैं।

रिपोर्ट की चेतावनी ऐसे समय में सामने आई है जब दुनिया के कई हिस्सों में अत्यधिक गर्मी, बाढ़, सूखा और अन्य मौसम संबंधी घटनाएं चिंता बढ़ा रही हैं।

जलवायु परिवर्तन की चुनौती से निपटने के लिए वैश्विक स्तर पर तत्काल और ठोस कार्रवाई की जरूरत है। 1.5 डिग्री सेल्सियस की सीमा के करीब पहुंचती दुनिया के लिए आने वाले वर्ष जलवायु नीति और उत्सर्जन नियंत्रण के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।

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