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खेती में मिट्टी की सेहत बताएगा सूती कपड़ा, 2 महीने के प्रयोग से सामने आएगा मिट्टी में जीवों की सक्रियता

खेती में मिट्टी की सेहत बताएगा सूती कपड़ा, 2 महीने के प्रयोग से सामने आएगा मिट्टी में जीवों की सक्रियता

by desk

रायपुर । मिट्टी की सेहत का आकलन करने के लिए वैज्ञानिकों ने एक आसान और कम खर्चीला तरीका बताया है। इसके तहत खेत की मिट्टी में सूती कपड़े का एक टुकड़ा दबाकर कुछ समय बाद उसकी स्थिति देखी जाती है। कपड़ा मिट्टी में मौजूद सूक्ष्मजीवों और दूसरे जीवों की गतिविधियों के कारण धीरे-धीरे टूटने लगता है।

अध्ययन के अनुसार, मिट्टी में जैविक गतिविधि जितनी अधिक होगी, सूती कपड़ा उतनी तेजी से टूटेगा। करीब दो महीने बाद कपड़े की स्थिति देखकर मिट्टी में जैविक गतिविधि का सामान्य अंदाजा लगाया जा सकता है।

मिट्टी में मौजूद सूक्ष्मजीव और अन्य जीव पौधों के लिए पोषक तत्वों को उपलब्ध कराने तथा जैविक पदार्थों के अपघटन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसलिए मिट्टी की जैविक सक्रियता खेती की गुणवत्ता का एक अहम संकेतक मानी जाती है।

कैसे किया जाता है प्रयोग?

कपास के सूती कपड़े को मिट्टी के अंदर दबाया जाता है और निर्धारित समय के बाद उसे बाहर निकालकर देखा जाता है कि वह कितना टूट चुका है। यदि कपड़ा काफी कमजोर या क्षतिग्रस्त हो गया है, तो यह मिट्टी में अधिक जैविक गतिविधि का संकेत हो सकता है। वहीं कपड़ा कम बदला है तो जैविक गतिविधि अपेक्षाकृत कम होने का संकेत मिल सकता है।

यह तरीका किसानों और विद्यार्थियों के लिए मिट्टी की जैविक गतिविधि को आसान तरीके से समझने का एक उपयोगी प्रयोग हो सकता है।

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