सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की उस याचिका को जल्द सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने पर सहमति जताई, जिसमें उन्होंने चुनाव आयोग के तृणमूल कांग्रेस (TMC) का नाम और चुनाव चिह्न फ्रीज करने के फैसले को चुनौती दी है।
कोर्ट में क्या हुआ
ममता बनर्जी की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति ज्योतिमल्य भट्टाचार्य और न्यायमूर्ति वी. मोहना की बेंच के सामने इस मामले का जिक्र करते हुए तत्काल सुनवाई की मांग की। सिब्बल ने कहा कि आयोग उपचुनाव की अधिसूचना जारी करने के बीच में ही चुनाव चिह्न फ्रीज कर देता है, और यह समझ से परे है। CJI ने जवाब में कहा कि दूसरे पक्ष को भी अपनी बात रखने का मौका मिलेगा और कोर्ट इस मामले को सूचीबद्ध करने की कोशिश करेगा।
विवाद की जड़
चुनाव आयोग ने गुरुवार रात एक अंतरिम आदेश जारी कर TMC के दोनों धड़ों को “ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस” नाम और पार्टी के आरक्षित चिह्न के इस्तेमाल से रोक दिया था। आयोग के मुताबिक दोनों प्रतिद्वंद्वी गुट खुद को असली पार्टी बता रहे हैं, इसलिए चुनाव चिह्न आदेश, 1968 के पैराग्राफ 15 के तहत इसका ठोस निर्धारण जरूरी है।
दोनों धड़ों को अलग नाम-चिह्न
6 अक्टूबर के नंदीग्राम और रेजिनगर उपचुनाव के लिए आयोग ने ममता गुट को “ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस” नाम और “फुटबॉल खिलाड़ी” चिह्न दिया है। अरूप रॉय के नेतृत्व वाले प्रतिद्वंद्वी गुट को “डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस” नाम और “लिफाफा” चिह्न मिला है।
पार्टी में फूट की पृष्ठभूमि
मई के विधानसभा चुनाव में हार के बाद TMC में यह फूट सामने आई थी। जून में 58 बागी विधायकों ने ममता खेमे के उम्मीदवार सोवनदेब चट्टोपाध्याय की जगह निष्कासित नेता ऋतब्रत बनर्जी को विपक्ष का नेता चुन लिया था, जिसे विधानसभा अध्यक्ष ने मान्यता भी दे दी। यह बगावत बाद में संसद तक पहुंची, जहां काकोली घोष दस्तीदार के नेतृत्व में 20 TMC सांसद एक अलग दल में शामिल हो गए।
ममता का रुख
ममता बनर्जी ने आयोग के इस अंतरिम फैसले को खारिज करते हुए कहा था कि वे पार्टी की मूल पहचान और “फूल-घास” चिह्न को राजनीतिक, लोकतांत्रिक और कानूनी रूप से वापस पाने तक लड़ेंगी। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में चुनाव आयोग और विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी को प्रतिवादी बनाया है।
नंदीग्राम-रेजिनगर उपचुनाव क्यों
पश्चिम बंगाल में ये उपचुनाव जरूरी हुए क्योंकि मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम और भवानीपुर दोनों सीटों से जीत के बाद नंदीग्राम खाली की, जबकि AJUP नेता हुमायूं कबीर ने नवदा और रेजिनगर दोनों सीटें जीतने के बाद रेजिनगर छोड़ी।
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