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नरकासुर के अत्याचारों से मुक्ति की याद में मनाई जाती है नरक चतुर्दशी, जानिए भगवान श्रीकृष्ण से जुड़ी पौराणिक कथा

नरक चतुर्दशी पर अभ्यंग स्नान और दीपदान की परंपरा, भगवान कृष्ण ने नरकासुर का वध कर हजारों महिलाओं को दिलाई थी मुक्ति

by desk

दीपावली के पांच दिवसीय उत्सव में छोटी दिवाली का विशेष महत्व है। इसे छोटी दीपावली के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन लोग अपने घरों की साफ-सफाई और सजावट करते हैं। शाम होते ही घरों के मुख्य द्वार, आंगन और छतों पर मिट्टी के दीपक जलाए जाते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, दीप जलाने से घर में सकारात्मक ऊर्जा और सुख-शांति का आगमन होता है।

छोटी दिवाली क्यों मनाई जाती है?

छोटी दिवाली को बड़ी दिवाली से पहले उत्सव की तैयारियों और प्रकाश पर्व के स्वागत के रूप में मनाया जाता है। इस दिन दीपदान करने की परंपरा है। कई क्षेत्रों में इसे नरक चतुर्दशी के रूप में भी मनाया जाता है। इस अवसर पर भगवान श्रीकृष्ण की नरकासुर पर विजय को याद किया जाता है।

घर की सफाई और दीपदान का महत्व

छोटी दिवाली पर घरों की विशेष साफ-सफाई की जाती है। लोग रंगोली बनाकर घर को सजाते हैं और शाम को दीपक जलाते हैं। मान्यता है कि दीपक का प्रकाश अंधकार और नकारात्मकता को दूर करने का प्रतीक है।

मिठाइयों और खुशियों के साथ मनाया जाता है त्योहा

इस अवसर पर परिवार के सदस्य एक-दूसरे को मिठाइयां खिलाते हैं और दीपावली की तैयारियों को अंतिम रूप देते हैं। कई जगहों पर पूजा-पाठ और पारंपरिक रीति-रिवाजों का आयोजन भी होता है।

छोटी दिवाली का पर्व हमें अपने जीवन से नकारात्मक विचारों को दूर कर खुशियों और सकारात्मकता का स्वागत करने का संदेश देता है।

दीपावली उत्सव के दौरान मनाया जाने वाला नरक चतुर्दशी का पर्व धार्मिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इसे रूप चौदस और काली चौदस के नाम से भी जाना जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, यह दिन बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। वर्ष 2026 में नरक चतुर्दशी का पर्व 7 नवंबर को मनाया जाएगा।

क्या है नरक चतुर्दशी की पौराणिक कथा?

पौराणिक कथा के अनुसार, नरकासुर नामक राक्षस ने अपनी शक्ति के अहंकार में देवताओं और मनुष्यों को परेशान करना शुरू कर दिया था। उसने हजारों महिलाओं को बंदी बना लिया था। उसके अत्याचारों से परेशान होकर देवताओं ने भगवान श्रीकृष्ण से सहायता मांगी।

इसके बाद भगवान श्रीकृष्ण ने नरकासुर का वध किया और बंदी महिलाओं को मुक्त कराया। इसी विजय की स्मृति में नरक चतुर्दशी मनाई जाती है।

अभ्यंग स्नान की क्यों है परंपरा?

इस दिन सूर्योदय से पहले तेल लगाकर स्नान करने की परंपरा को अभ्यंग स्नान कहा जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस स्नान से व्यक्ति को शुद्धि और आरोग्य का आशीर्वाद मिलता है। दक्षिण भारत में इस परंपरा का विशेष महत्व है।

यम दीपदान से जुड़ी है विशेष मान्यता

नरक चतुर्दशी पर कई परिवारों में यमराज के निमित्त दीपक जलाया जाता है। इसे यम दीपदान कहा जाता है। मान्यता है कि इससे परिवार के सदस्यों की अकाल मृत्यु से रक्षा की कामना की जाती है।

बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश देता है पर्व

नरक चतुर्दशी हमें सिखाती है कि अहंकार, अन्याय और अत्याचार का अंत निश्चित है। यह पर्व जीवन में अच्छे कर्मों, सकारात्मक विचारों और सच्चाई के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।

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