दिल्ली में मतदाता सूची की विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को लेकर सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को तीखी बहस हुई। कोर्ट ने चुनाव आयोग (ECI) से 33 लाख मतदाताओं को भेजे गए नोटिसों पर स्पष्ट जवाब मांगा है।
कोर्ट में क्या हुआ
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति ज्योतिमल्य भट्टाचार्य और न्यायमूर्ति वी. मोहना की बेंच इस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें आरोप है कि चुनाव आयोग और दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने नोटिस पाने वाले मतदाताओं के नाम और सटीक कारण सार्वजनिक नहीं किए। यह याचिका अंजलि भारद्वाज और अमृता जोहरी ने दायर की है।
“मशीन-जनरेटेड” नोटिस पर सवाल
याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि यह पूरी प्रक्रिया “चौंकाने वाले” ढंग से चल रही है और 33 लाख से ज्यादा मतदाताओं को मामूली आधार पर नोटिस भेज दिए गए। न्यायमूर्ति भट्टाचार्य ने भी इस दलील से सैद्धांतिक सहमति जताते हुए कहा कि नोटिस लगभग यंत्रवत भेजे जा रहे हैं और संभवतः ये मशीन-जनरेटेड हैं।
“लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी” पर स्पष्टता की मांग
याचिका में यह भी मांग की गई है कि मतदाताओं को “लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी” श्रेणी में डालने के पीछे के मानदंड, परिभाषाएं, एल्गोरिदमिक पैरामीटर और ऑपरेशनल गाइडलाइंस सार्वजनिक की जाएं। कोर्ट ने भी माना कि “लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी” तय करने का आधार स्पष्ट होना चाहिए।
आंकड़ों का पूरा गणित
31 अगस्त को प्रकाशित ड्राफ्ट मतदाता सूची से 47 लाख से ज्यादा नाम हटाए गए थे। इसके अलावा करीब 33.13 लाख मतदाताओं को “नो मैपिंग” या “लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी” के आधार पर नोटिस के लिए चिन्हित किया गया, जिनमें से 13.79 लाख को “नो मैपिंग” और 19.33 लाख को “लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी” श्रेणी में रखा गया।
कोर्ट ने दिए ये सुझाव
कोर्ट ने चुनाव आयोग को सुझाव दिया कि वह मतदाताओं के लिए सुरक्षा उपाय बढ़ाए, बूथ लेवल ऑफिसर्स (BLO) से मदद उपलब्ध कराए और SIR प्रक्रिया तथा नोटिस मिलने के बाद उठाए जाने वाले कदमों को समझाने के लिए FAQ तैयार करे।
दिल्ली CEO का स्पष्टीकरण
इस बीच दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय ने सोमवार को साफ किया कि ड्राफ्ट इलेक्टोरल रोल 2026 में विसंगतियों का नोटिस मिलने का मतलब अपने-आप नाम कट जाना नहीं है। CEO कार्यालय के मुताबिक ये नोटिस दो श्रेणी के मतदाताओं को भेजे जा रहे हैं: वे जिनका पिछली गहन पुनरीक्षण की सूची से मिलान नहीं हो सका, और वे जिनमें मिलान के दौरान लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी पाई गई। दफ्तर ने यह भी कहा कि बिना सुनवाई का मौका दिए और उचित आदेश पारित किए किसी का भी नाम नहीं काटा जा सकता।
कितने राज्यों में SIR
फिलहाल SIR की यह प्रक्रिया 16 राज्यों और 3 केंद्रशासित प्रदेशों में चल रही है, जिसमें दिल्ली भी शामिल है। आयोग ने मतदाताओं की मदद के लिए 14,000 BLO और 1,200 इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर तैनात किए हैं। आपत्ति और जवाब जमा करने की अंतिम तारीख 29 अक्टूबर है, जरूरत पड़ने पर इसे बढ़ाया भी जा सकता है।
क्यों अहम है यह मामला
यह मामला सीधे मतदाताओं के वोट देने के अधिकार से जुड़ा है और आने वाले चुनावों में मतदाता सूची की सटीकता व पारदर्शिता तय कर सकता है। कोर्ट की अगली सुनवाई में चुनाव आयोग का जवाब अहम होगा।