आज 10 अक्टूबर को विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस है। इस मौके पर यह सवाल उठा है कि स्कूलों के लिए मानसिक स्वास्थ्य नीति पर काम शुरू क्यों नहीं हुआ और UGC के दिशा-निर्देश कहां अटके हैं।
बच्चों पर दबाव के आंकड़े
एनसीईआरटी के 2022 के सर्वे के अनुसार देश के सरकारी और निजी स्कूलों में छठी से 12वीं कक्षा के 85% बच्चे पढ़ाई और परीक्षा के कारण तनाव में हैं। 37% बच्चों ने कहा कि शिक्षकों के पर्याप्त ध्यान न देने से वे चिंतित रहते हैं। इसी सर्वे में 36% बच्चे अपने प्रदर्शन को लेकर चिंतित बताए गए, पर उपलब्ध अंश में इस आंकड़े का आगे का ब्योरा कटा हुआ है।
नीति और दिशा-निर्देश कहां अटके
राज्यों से स्कूलों के लिए नीति पर काम करने को कहा गया था, पर अधिकतर राज्यों ने इस पर काम शुरू तक नहीं किया और कुछ केवल योजना बना रहे हैं। UGC ने 2022 में मानसिक स्वास्थ्य दिशा-निर्देश बनाने का काम शुरू किया था। मसौदा तैयार हुआ, लेकिन आज तक लागू नहीं हो सका।
2026 की थीम और WHO का जोर
इस साल WFMH और WHO ने थीम “Lived experiences heard: real voices, real change” रखी है। हिंदी में इसका संदेश है “अनुभवों को सुनें, असली बदलाव लाएं”। WHO ने मानसिक समस्याओं का सामना कर चुके लोगों के अनुभवों को महत्व देने पर जोर दिया है और कहा है कि उन्हें नीतियां बनाने से लेकर स्वास्थ्य सेवाओं के फैसलों तक में शामिल किया जाना चाहिए। संगठन ने देखभाल को लंबे समय तक अस्पताल में रखने की व्यवस्था से समुदाय आधारित सेवाओं की ओर ले जाने की जरूरत भी बताई है। WHO के अनुसार केवल 10 में से 1 देश पूरी तरह इस बदलाव तक पहुंचा है, जबकि 53% देश शुरुआती चरण में हैं।
दिवस की पृष्ठभूमि
यह दिवस पहली बार 1992 में वर्ल्ड फेडरेशन फॉर मेंटल हेल्थ की पहल पर मनाया गया था। इसका उद्देश्य लोगों में मानसिक स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता बढ़ाना है, ताकि डिप्रेशन, एंग्जायटी और अत्यधिक तनाव जैसी समस्याओं की समय पर पहचान हो सके।
अगर आप या आपके आसपास कोई मानसिक परेशानी से गुजर रहा है, तो किसी भरोसेमंद व्यक्ति या विशेषज्ञ से बात करना मददगार हो सकता है। चाहें तो मैं आपके इलाके के सहायता विकल्प ढूंढने में मदद कर दूं।
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