कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दिपके और अमेरिकी गायिका मैरी मिलबेन के बीच सोशल मीडिया पर तीखी बहस छिड़ गई है। विवाद भारत में विरोध प्रदर्शनों का नेतृत्व कर रहे इस संगठन को कथित तौर पर विदेशों से मिल रही फंडिंग को लेकर है। आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध रिपोर्टों में नहीं है।
मिलबेन ने क्या कहा
मैरी मिलबेन ने एक्स पर लिखा कि भारत के युवा देशभक्तों के लिए चुप रहने का समय नहीं है। उनका दावा है कि दिपके और सीजेपी को अमेरिका के उन दानदाताओं से फंडिंग मिल रही है जो प्रधानमंत्री मोदी और उनके नेतृत्व के खिलाफ हैं। उन्होंने भारत के सभी युवाओं से सीजेपी के खिलाफ शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करने की अपील की।
दिपके का जवाब
दिपके ने पूछा कि प्रधानमंत्री अपने ही देशवासियों को बदनाम करने के लिए अमेरिकियों का समर्थन क्यों मांग रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि भारत के आंतरिक मामलों में दखल देने का अधिकार विदेशी नागरिकों को किसने दिया। उनका कहना है कि भारत अपने मुद्दे खुद संभालने में पूरी तरह सक्षम है और उसे बाहरी लोगों के दखल की जरूरत नहीं।
मिलबेन का पलटवार
मिलबेन ने कहा कि जब अमेरिकी दानदाताओं को लगेगा कि दिपके सफल नहीं हो रहे, तो वे उनका साथ छोड़ देंगे, और कानून तोड़कर सफलता नहीं मिलती। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री को अमेरिकी समर्थन की जरूरत नहीं है, क्योंकि उन्हें 1.5 अरब भारतीयों का समर्थन मिला हुआ है। उन्होंने दिपके को चेताया कि अराजकता कभी नहीं जीतती और उन्हें अपनी अमेरिकी शिक्षा अच्छे कामों में लगानी चाहिए। उन्होंने दिपके को प्रधानमंत्री मोदी से मिलकर देश के विकास में योगदान देने की सलाह भी दी।
पृष्ठभूमि
दिपके ने अपनी पोस्ट में मिलबेन के उस इंटरव्यू का भी जिक्र किया था, जिसमें उन्होंने भारतीय युवाओं से सीजेपी के खिलाफ खड़े होने की अपील की थी। इसी बीच सीजेपी के नेता आशुतोष रांका और सौरव दास तिहाड़ जेल में हैं। तिहाड़ में रांका जेल नंबर 4 और दास जेल नंबर 2 में बताए गए हैं।
यह विवाद आरोप-प्रत्यारोप पर आधारित है और किसी भी पक्ष ने कोई दस्तावेजी प्रमाण सार्वजनिक नहीं किया है।