Home » Blog » दुश्मन की जासूसी पर लगेगी लगाम: डीआरडीओ ने चांदीपुर में किया क्वांटम की डिस्ट्रीब्यूशन तकनीक का सफल परीक्षण…

दुश्मन की जासूसी पर लगेगी लगाम: डीआरडीओ ने चांदीपुर में किया क्वांटम की डिस्ट्रीब्यूशन तकनीक का सफल परीक्षण…

सैन्य सूचनाओं की जासूसी रोकने की दिशा में भारत को बड़ी कामयाबी मिली है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने ऐसी तकनीक का सफल परीक्षण किया है,

by desk

सैन्य सूचनाओं की जासूसी रोकने की दिशा में भारत को बड़ी कामयाबी मिली है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने ऐसी तकनीक का सफल परीक्षण किया है, जिससे सैन्य सूचनाओं के आदान-प्रदान के दौरान किसी की सेंधमारी की कोशिश का पता लगाया जा सकेगा। इस तकनीक को क्वांटम की डिस्ट्रीब्यूशन (क्यूकेडी) कहा जाता है।

कहां और कैसे हुआ परीक्षण

डीआरडीओ ने बुधवार को बताया कि इसका परीक्षण ओडिशा के चांदीपुर स्थित अपने परीक्षण केंद्र के लाइव नेटवर्क में किया गया। यह परीक्षण चांदीपुर की डायनामिक टेस्ट रेंज के लाइव नेटवर्क में हुआ।

क्या फायदा होगा

इस तकनीक से तोपों और बख्तरबंद हथियारों के परीक्षण के दौरान जुटाई जाने वाली अहम जानकारियों को सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी। इन जानकारियों में हथियारों के प्रदर्शन और परीक्षण के नतीजे शामिल हैं। न्यूजबाइट्स के अनुसार नई तकनीक संवेदनशील संदेशों की जासूसी करना बहुत मुश्किल बना देती है और सेना की सुरक्षित संचार व्यवस्था को मजबूत करेगी।

साझेदारी

इस क्यूकेडी प्लेटफॉर्म को टैकबिट लैब्स के सहयोग से विकसित किया गया है। टैकबिट लैब्स बेंगलुरु की भारतीय कंपनी है, जो क्वांटम साइबर सुरक्षा, क्वांटम रैंडम नंबर जेनरेटर और पोस्ट-क्वांटम क्रिप्टोग्राफी जैसे क्षेत्रों में काम करती है।

क्यूकेडी कैसे काम करता है

क्वांटम कम्युनिकेशन में जानकारी भेजने के लिए फोटॉन, यानी प्रकाश के अत्यंत छोटे कणों का इस्तेमाल होता है। एक रिपोर्ट के अनुसार फाइबर-आधारित क्यूकेडी मौजूदा ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क के साथ काम कर सकता है, इसलिए नई केबल बिछाने की जरूरत कम पड़ती है। ऐसी प्रणाली में रास्ते में कोई सुन नहीं सकता और सेंध लगाने की कोशिश पकड़ में आ जाती है।

आगे की तैयारी

डीआरडीओ फ्री-स्पेस क्यूकेडी पर भी काम कर रहा है, जिससे दुर्गम इलाकों में भी फाइबर केबल के बिना सुरक्षित संचार हो सके। इससे पहले डीआरडीओ ने आईआईटी दिल्ली के साथ मिलकर एक किलोमीटर से ज्यादा दूरी तक फ्री-स्पेस ऑप्टिकल लिंक से एंटैंगलमेंट आधारित सुरक्षित संचार का सफल प्रदर्शन भी किया था।
परीक्षण की सटीक दूरी, गति या तैनाती की समय-सीमा का ब्योरा उपलब्ध रिपोर्टों में नहीं है, इसलिए उसे शामिल नहीं किया गया है।

Read more:-IIT जोधपुर की नई तकनीक से आसान होगी दिल की जांच, AI और रोबोट मिलकर करेंगे डॉक्टरों की मदद…

You may also like