राजस्थान पुलिस की वेबसाइट से डेटा चोरी होने का मामला सामने आया है। हैकर्स ने दावा किया है कि उनके पास वेबसाइट से जुड़े करीब 86 लाख ई-मेल आईडी और हजारों मोबाइल नंबर का डेटा मौजूद है। इस दावे के बाद साइबर सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। हालांकि, डेटा चोरी की वास्तविकता और इसके दायरे की आधिकारिक पुष्टि जरूरी है।
यूजर्स को पासवर्ड बदलने की सलाह
डेटा लीक की आशंका के बीच यूजर्स को अपने ऑनलाइन अकाउंट की सुरक्षा मजबूत करने की सलाह दी जा रही है। यदि किसी यूजर का ई-मेल या मोबाइल नंबर प्रभावित हुआ है, तो उसका इस्तेमाल फिशिंग मैसेज, फर्जी कॉल और ऑनलाइन ठगी के लिए किया जा सकता है।
सुरक्षा के लिए यूजर्स को अपना पासवर्ड बदलना चाहिए, खासकर तब जब वही पासवर्ड दूसरे अकाउंट पर भी इस्तेमाल किया जा रहा हो। साथ ही, टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन चालू करना और संदिग्ध लिंक से दूर रहना जरूरी है।
सीसाइबर ठगी से बचने के लिए क्या करें?
– ई-मेल और अन्य महत्वपूर्ण अकाउंट के पासवर्ड बदलें।
– हर अकाउंट के लिए अलग और मजबूत पासवर्ड रखें।
– अनजान लिंक और संदिग्ध अटैचमेंट पर क्लिक न करें।
– OTP, बैंकिंग जानकारी और पासवर्ड किसी के साथ साझा न करें।
– किसी भी सुरक्षा संबंधी सूचना की पुष्टि आधिकारिक वेबसाइट या संबंधित विभाग से करें।
डेटा सुरक्षा पर फिर उठे सवाल
यह मामला सरकारी वेबसाइटों पर मौजूद डिजिटल जानकारी की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े करता है। हालांकि, हैकर्स के दावे को ही डेटा चोरी का प्रमाण नहीं माना जा सकता। फिलहाल, डेटा की प्रामाणिकता, प्रभावित यूजर्स की संख्या और संभावित नुकसान के बारे में आधिकारिक पुष्टि के आधार पर ही स्थिति स्पष्ट होगी।
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