दीपावली का त्योहार केवल दीप जलाने और खुशियां मनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति, धार्मिक मान्यताओं और सदियों पुरानी परंपराओं को जानने का भी अवसर है। इसी कड़ी में दैनिक भास्कर ने दीपावली 2026 के लिए एक विशेष एक्सक्लूसिव सीरीज़ तैयार की है। इसमें देश के अलग-अलग हिस्सों में प्रचलित दीपावली की परंपराओं और रामायण से जुड़ी रोचक कथाओं को प्रस्तुत किया जा रहा है।
खील-बताशे ही क्यों चढ़ाए जाते हैं?
दीपावली पर पूजा के दौरान खील-बताशे चढ़ाने की परंपरा कई क्षेत्रों में प्रचलित है। इस विशेष सीरीज़ में इस परंपरा के पीछे की मान्यताओं और सांस्कृतिक महत्व को समझने का अवसर मिलेगा। साथ ही यह भी जानने को मिलेगा कि भारत के अलग-अलग हिस्सों में दीपावली किस तरह मनाई जाती है।
7 दिन, 7 रामायण: अलग-अलग क्षेत्रों की अपनी रामकथा
सीरीज़ का एक खास हिस्सा ‘7 दिन, 7 रामायण’ है। इसमें भारत के विभिन्न क्षेत्रों में प्रचलित रामायण की कथाओं और उनके अलग-अलग प्रसंगों को सामने लाया जाएगा। इनमें कम्ब रामायण की एक रोचक मान्यता भी शामिल है।
इस कथा के अनुसार, पराई स्त्री को जबरन स्पर्श करने पर रावण के टुकड़े-टुकड़े हो जाने का भय था। इसी कारण उसने सीता हरण के लिए पर्णकुटी को जमीन सहित उखाड़ने के बजाय अपने हाथों से गहराई तक जमीन खोदने का रास्ता अपनाया। यह प्रसंग रामायण की क्षेत्रीय कथाओं में मिलने वाली विविधताओं को दर्शाता है।
राम वन गमन पथ यात्रा में लोणार के मंदिर की कहानी
एक्सक्लूसिव सीरीज़ में ‘राम वन गमन पथ यात्रा’ के चौथे भाग के तहत महाराष्ट्र के लोणार से जुड़ी एक विशेष धार्मिक मान्यता को भी शामिल किया गया है। यहां स्थित एक मंदिर के बारे में बताया गया है कि इसमें वनवासी स्वरूप में भगवान श्रीराम आशीर्वाद की मुद्रा में विराजमान हैं। यह स्थल भगवान राम के वनवास से जुड़ी आस्था और क्षेत्रीय धार्मिक परंपराओं की झलक प्रस्तुत करता है।
संस्कृति और विरासत को जानने का अवसर
दीपावली विशेष सीरीज़ का उद्देश्य पाठकों को त्योहार से जुड़ी परंपराओं, रामायण के विविध रूपों और धार्मिक स्थलों की अनसुनी कहानियों से परिचित कराना है। ऐसी कथाएं भारतीय सांस्कृतिक विरासत की विविधता को समझने और अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का माध्यम बन सकती हैं।