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आयुर्वेद में नाभि में तेल लगाना क्यों है फायदेमंद, जानें कौन से तेल का करें इस्तेमाल

नाभि पूरण या पेचोटी थेरेपी से त्वचा, पाचन, नींद और जोड़ों के दर्द में मिलते हैं कई लाभ

by desk

आयुर्वेद में नाभि को शरीर का केंद्र बिंदु और ऊर्जा का मुख्य स्रोत माना गया है। गर्भ अवस्था के दौरान बच्चा नाभि के जरिए ही मां से पोषक तत्व प्राप्त करता है। शरीर की लगभग 72,000 नसें नाभि से जुड़ी होती हैं। यही वजह है कि आयुर्वेद में नाभि में तेल लगाने को ‘नाभि पूरण’ या ‘पेचोटी थेरेपी’ कहा जाता है और इसे बेहद असरदार स्वास्थ्य उपाय माना गया है।

नाभि में नियमित रूप से तेल लगाने से कई स्वास्थ्य लाभ मिलते हैं। त्वचा और बालों के लिए यह फायदेमंद है। फटे होंठ, रूखी त्वचा और फटी एड़ियों की समस्या से राहत मिलती है। बादाम या नीम का तेल लगाने से कील-मुहांसे, डार्क सर्कल्स और चेहरे का कालापन कम होता है। नारियल का तेल बालों का झड़ना कम करता है और चमक बढ़ाता है।

पाचन क्रिया में सुधार होता है। सरसों या हींग मिला तेल लगाने से गैस, ब्लोटिंग, कब्ज और पेट दर्द में आराम मिलता है। यह पाचन अग्नि को सक्रिय करता है।

रात को सोने से पहले तेल लगाने से नर्वस सिस्टम शांत होता है, तनाव और चिंता कम होती है तथा गहरी नींद आती है। सर्दियों में तिल या सरसों का तेल जोड़ों के दर्द और अकड़न दूर करता है। महिलाओं को पीरियड्स के दौरान पेट और कमर के ऐंठन में तिल के तेल से राहत मिलती है।

यह प्रजनन स्वास्थ्य और हार्मोनल संतुलन सुधारने में भी मदद करता है। आंखों की ड्राईनेस कम होती है।

इस्तेमाल के लिए उपयुक्त तेल हैं—सरसों का तेल, बादाम का तेल, नीम का तेल, तिल का तेल, नारियल का तेल और देसी घी।

(नोट: ये टिप्स सामान्य जानकारी के लिए हैं। कोई भी उपाय शुरू करने से पहले डॉक्टर से सलाह लें।)

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