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दुर्ग में स्कूलों की बदहाल व्यवस्था पर बच्चों का फूटा गुस्सा, 10-12 घंटे सड़क पर बैठे छात्र; कहीं शिक्षक तो कहीं टॉयलेट-बाउंड्रीवॉल की मांग

दुर्ग में स्कूलों की बदहाल व्यवस्था पर बच्चों का फूटा गुस्सा, 10-12 घंटे सड़क पर बैठे छात्र; कहीं शिक्षक तो कहीं टॉयलेट-बाउंड्रीवॉल की मांग

by desk

दुर्ग, छत्तीसगढ़: छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में सरकारी स्कूलों की व्यवस्थाओं को लेकर छात्र-छात्राओं का आक्रोश सामने आया है। पेंड्रावन और सेलूद के स्वामी आत्मानंद स्कूलों में शिक्षकों की कमी और बुनियादी सुविधाओं की समस्या को लेकर बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने प्रदर्शन किया। पेंड्रावन में जहां विद्यार्थियों ने पर्याप्त शिक्षक उपलब्ध कराने की मांग को लेकर घंटों सड़क पर बैठकर विरोध जताया, वहीं सेलूद में करीब 200 विद्यार्थियों ने स्कूल में शौचालय और बाउंड्रीवॉल जैसी मूलभूत सुविधाओं की मांग को लेकर तालाबंदी कर मुख्य मार्ग पर चक्काजाम कर दिया। प्रदर्शन के बाद प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई और व्यवस्थाओं में सुधार के आश्वासन सामने आए हैं। इस पूरे मामले को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी तेज हो गए हैं।

पेंड्रावन स्कूल में 400 विद्यार्थियों पर सिर्फ 3 शिक्षक होने का दावा

पेंड्रावन के स्वामी आत्मानंद स्कूल में विद्यार्थियों ने शिक्षकों की कमी को लेकर विरोध प्रदर्शन किया। छात्रों के अनुसार स्कूल में करीब 400 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं, जबकि उन्हें पढ़ाने के लिए पर्याप्त शिक्षक उपलब्ध नहीं थे।

विद्यार्थियों का कहना था कि विज्ञान, गणित, अंग्रेजी और वाणिज्य जैसे प्रमुख विषयों की पढ़ाई प्रभावित हो रही थी। पढ़ाई बाधित होने से नाराज छात्र-छात्राएं स्कूल ड्रेस में सड़क पर उतर आए और करीब 10 से 12 घंटे तक प्रदर्शन किया।

विद्यार्थियों की मांग थी कि स्कूल में पर्याप्त शिक्षकों की नियुक्ति की जाए, ताकि नियमित पढ़ाई सुचारु रूप से हो सके।

प्रदर्शन के बाद प्राचार्य को हटाया गया

छात्रों के प्रदर्शन के बाद प्रशासन की ओर से मामले में कार्रवाई की गई। जानकारी के मुताबिक स्कूल के प्राचार्य को हटाने का निर्णय लिया गया और नए शिक्षकों की नियुक्ति की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई।

छात्रों का कहना था कि उनकी मुख्य चिंता पढ़ाई को लेकर थी और वे चाहते थे कि स्कूल में सभी जरूरी विषयों के लिए पर्याप्त शिक्षक उपलब्ध हों।

सेलूद में टॉयलेट और बाउंड्रीवॉल की मांग को लेकर तालाबंदी

दुर्ग जिले के सेलूद स्वामी आत्मानंद स्कूल में भी विद्यार्थियों ने मूलभूत सुविधाओं की कमी को लेकर विरोध किया।

यहां करीब 200 छात्र-छात्राओं ने स्कूल गेट पर ताला लगा दिया। विद्यार्थियों की प्रमुख मांगों में शौचालय और बाउंड्रीवॉल जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना शामिल था।

इसके बाद विद्यार्थियों ने दुर्ग-पाटन मुख्य मार्ग पर चक्काजाम किया। प्रदर्शन के कारण सड़क पर आवागमन प्रभावित हुआ और प्रशासन को मौके पर पहुंचकर स्थिति संभालनी पड़ी।

दोनों स्कूलों में अलग-अलग समस्याओं को लेकर प्रदर्शन

पेंड्रावन और सेलूद के मामलों में विद्यार्थियों की मांगें अलग थीं, लेकिन दोनों प्रदर्शनों का केंद्र स्कूलों की व्यवस्थाएं रहीं।

पेंड्रावन: शिक्षकों की कमी और पढ़ाई प्रभावित होने की शिकायत।

सेलूद: शौचालय, बाउंड्रीवॉल और अन्य मूलभूत सुविधाओं की मांग।

इन घटनाओं ने सरकारी स्कूलों में उपलब्ध सुविधाओं और शिक्षकों की स्थिति को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।

शिक्षा मंत्री ने जताया राजनीतिक हस्तक्षेप का अंदेशा

यह मामला शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव के गृह जिले दुर्ग से जुड़ा होने के कारण राजनीतिक रूप से भी चर्चा में आ गया है।

शिक्षा मंत्री ने प्रदर्शन के पीछे विपक्षी दल कांग्रेस और राजनीतिक गतिविधियों के प्रभाव की आशंका जताई। मंत्री की ओर से यह सवाल उठाया गया कि क्या छात्रों के प्रदर्शन के पीछे राजनीतिक लोगों या अन्य समूहों की भूमिका है।

हालांकि, विद्यार्थियों की ओर से उठाई गई शिक्षकों और मूलभूत सुविधाओं की मांगें भी इस पूरे विवाद के केंद्र में हैं।

कांग्रेस ने सरकार पर लगाया नाकामी छिपाने का आरोप

शिक्षा मंत्री के बयान के बाद कांग्रेस नेताओं ने सरकार पर पलटवार किया। कांग्रेस का आरोप है कि सरकार स्कूलों की वास्तविक समस्याओं और व्यवस्थागत कमियों से ध्यान हटाने के लिए विद्यार्थियों के प्रदर्शन को राजनीतिक रंग दे रही है।

विपक्ष का कहना है कि यदि सरकारी स्कूलों में पर्याप्त शिक्षक और बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध होतीं तो छात्रों को सड़क पर उतरकर प्रदर्शन करने की जरूरत नहीं पड़ती।

CJP ने राज्यपाल और मुख्यमंत्री को लिखा पत्र

छात्रों के प्रदर्शन के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने भी मामले को लेकर सक्रियता दिखाई। पार्टी ने राज्यपाल और मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर प्रदेशभर के सरकारी स्कूलों की व्यवस्थाओं की जांच कराने की मांग की है।

CJP की ओर से सरकारी स्कूलों में शिक्षकों, शौचालय, बाउंड्रीवॉल और अन्य मूलभूत सुविधाओं की स्थिति की समीक्षा कराने की मांग रखी गई है।

स्कूलों की व्यवस्था पर उठे बड़े सवाल

दुर्ग में हुए इन प्रदर्शनों ने सरकारी स्कूलों में शिक्षक उपलब्धता और आधारभूत सुविधाओं को लेकर महत्वपूर्ण सवाल खड़े किए हैं।

एक ओर विद्यार्थियों का कहना है कि शिक्षकों की कमी के कारण उनकी पढ़ाई प्रभावित हो रही है, वहीं दूसरी ओर कुछ स्कूलों में शौचालय और बाउंड्रीवॉल जैसी बुनियादी जरूरतों की मांग सामने आई है।

अब देखने वाली बात होगी कि प्रशासन इन मांगों को कितनी जल्दी पूरा करता है और प्रदेश के अन्य सरकारी स्कूलों में ऐसी समस्याओं की वास्तविक स्थिति क्या है।

मुख्य बिंदु

– पेंड्रावन में करीब 400 विद्यार्थियों के लिए शिक्षकों की कमी की शिकायत।
– विज्ञान, गणित, अंग्रेजी और वाणिज्य की पढ़ाई प्रभावित होने का दावा।
– विद्यार्थियों ने करीब 10-12 घंटे तक सड़क पर प्रदर्शन किया।
– प्रदर्शन के बाद प्राचार्य को हटाने और नए शिक्षकों की नियुक्ति की कार्रवाई।
– सेलूद में करीब 200 विद्यार्थियों ने टॉयलेट और बाउंड्रीवॉल की मांग की।
– छात्रों ने स्कूल गेट पर तालाबंदी कर दुर्ग-पाटन मुख्य मार्ग पर चक्काजाम किया।
– शिक्षा मंत्री ने प्रदर्शन में राजनीतिक हस्तक्षेप की आशंका जताई।
– कांग्रेस ने सरकार पर वास्तविक समस्याओं से ध्यान भटकाने का आरोप लगाया।
– CJP ने राज्यपाल और मुख्यमंत्री से सरकारी स्कूलों की जांच की मांग की।

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