दिल्ली की विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के तहत मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के खिलाफ दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट सोमवार को सुनवाई कर रहा है। यह सुनवाई मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति ज्योतिमल्य भट्टाचार्य और न्यायमूर्ति वी. मोहना की बेंच के सामने होनी है।
कितने वोटरों पर असर
31 अगस्त को चुनाव आयोग ने दिल्ली की जो मसौदा मतदाता सूची जारी की, उसमें कुल 1.45 करोड़ मतदाताओं में से करीब 47 लाख के नाम हटा दिए गए। यानी हर तीन में से करीब एक मतदाता का नाम सूची से बाहर हुआ। आयोग के मुताबिक 43.32 लाख से ज्यादा लोग या तो घर बदल चुके थे या SIR के दौरान मौजूद नहीं मिले, 2.82 लाख से ज्यादा मृत पाए गए, जबकि 1.41 लाख से ज्यादा एक से ज्यादा जगह पर दर्ज थे।
याचिकाकर्ताओं की मांग
अंजलि भारद्वाज और अमृता जोहरी की ओर से पेश वकील प्रशांत भूषण ने अदालत को बताया कि आयोग ने इन 47 लाख में से 33 लाख लोगों को नोटिस जारी किए हैं। उनकी दलील है कि आयोग ने न तो यह बताया है कि नोटिस किसे मिले, न ही किस आधार पर नाम हटाए गए। भूषण के मुताबिक “लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी” और “अनमैप्ड” जैसी श्रेणियां कैसे तय हुईं, यह भी साफ नहीं है।
क्या चाहते हैं याचिकाकर्ता
याचिका में मांग की गई है कि सभी नोटिस पाने वाले मतदाताओं की पता और कारण सहित एक समेकित, खोजी जा सकने वाली सूची सार्वजनिक की जाए। साथ ही हर नोटिस में सटीक खामी और तथ्य बताए जाएं, ताकि मतदाता सुनवाई में ठीक से हिस्सा ले सकें। याचिका में यह भी मांग की गई है कि जिन नोटिसों में ठोस तथ्य नहीं बताए गए, उनके आधार पर नाम हटाने पर रोक लगाई जाए।
आंकड़ों की तस्वीर
याचिका के मुताबिक “नो मैपिंग” या “लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी” के आधार पर कुल 33,12,919 मतदाताओं को नोटिस के लिए चिन्हित किया गया, जिनमें से 13,79,785 को एक खास वजह से पहचाना गया।
पहले भी लगी थी अदालत में गुहार
17 सितंबर को कोर्ट ने इस मामले को 21 सितंबर के लिए सूचीबद्ध करने पर सहमति जताई थी, क्योंकि SIR से जुड़े अन्य मामले भी अगले हफ्ते सूचीबद्ध हैं।
क्यों अहम है यह मामला
यह मामला सीधे दिल्ली के मतदाताओं के वोट देने के अधिकार से जुड़ा है। सुनवाई का नतीजा आने वाले चुनावों में मतदाता सूची की सटीकता और पारदर्शिता तय कर सकता है।
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