डॉक्टर गूगलानंद प्रसाद
मैं एक बाल रोग विशेषज्ञ हूँ. बच्चों की बीमारियों के साथ-साथ मैंने एक नई बीमारी को भी खूब बढ़ते देखा है—”गूगल पैरेंट सिंड्रोम.”
“डॉक्टर साहब, पाँच दिन की दवा थी, लेकिन बच्चा दो दिन में ठीक हो गया तो हमने बंद कर दी.”
“लेकिन इसका कम्पलीट कोर्स 5 दिन करना था.”
“मैडम, गूगल पर सर्च किया तो बताया की ज़्यादा एंटीबायोटिक देने से बच्चे के गुड बैक्टीरिया ख़त्म हो जाते हैं.”
“जी, लेकिन कोर्स कम्पलीट न करने पर बैड बैक्टीरिया का एंटीबायोटिक प्रतिरोध बढ़ सकता है.”
“मैडम, बच्चे का वज़न बढ़ नहीं रहा है. कोई लिवर की बीमारी तो नहीं?”
जांच करने के बाद मैं : “लिवर की तो कोई बीमारी नहीं है। खान-पान कमज़ोर लगता है.”
“खाना तो सब खाता है. गूगल पर देखा था, वज़न न बढ़ना लिवर की बीमारी हो सकती है”
“अच्छा, सुबह से शाम क्या-क्या खाता है?”
“सुबह देर से उठता है, तो स्कूल जाने के पहले नाश्ता तो नहीं कर पाता, टिफ़िन में एक एप्पल ले जाता है, ३ बजे स्कूल से आता है तो खाना खाता है, शाम को फिर रोज़ इसको मंचिंग के लिए चिप्स या आलू फ्राइज चाहिए, सब्जी तो खाता ही नहीं, रात को अक्सर बाहर चाट खा लेता है, या एक रोटी सॉस.”
“जिस बच्चे को कम से कम 4-5 बार बैलेंस्ड डाइट लेना चाहिए, वो अगर 2-3 बार इस प्रकार खाये तो वज़न कैसे बढ़ेगा?”
माता-पिता की चिंता बिल्कुल स्वाभाविक है. लेकिन ये समझने की ज़रूरत है कि गूगल की हर जानकारी आपके बच्चे पर लागू नहीं होती.
बच्चों के स्वास्थ्य के लिए चाहिए—संतुलित भोजन, टीकाकरण, पर्याप्त नींद, खेल, सीमित स्क्रीन टाइम और माता-पिता का समय.
क्योंकि अच्छे डॉक्टर के साथ जागरूक और धैर्यवान माता-पिता भी बच्चे की सेहत की सबसे बड़ी ताकत हैं.
और हाँ—अगली बार बच्चे को कुछ परेशानी हो तो पहले डॉक्टर से सलाह लें, गूगलानंद प्रसाद से नहीं!
– डॉक्टर रिमझिम श्रीवास्तव, रायपुर, छत्तीसगढ़
अस्वीकरण: इस लेख में व्यक्त विचार लेखक के व्यक्तिगत हैं। इससे सहमत या असहमत होना पाठकों का व्यक्तिगत अधिकार है। यह लेख जानकारी और जागरूकता के उद्देश्य से है, यह किसी भी प्रकार की पेशेवर सलाह का विकल्प नहीं है।