भारत में रहने के लिए अब वीजा जरूरी! पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए लोगों पर लागू होगा नया नियम
पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से धार्मिक उत्पीड़न के कारण भारत आए छह गैर-मुस्लिम समुदायों के लोगों के लिए केंद्र सरकार ने इमिग्रेशन नियमों में बदलाव किया है। गृह मंत्रालय की ओर से 6 नवंबर 2026 को जारी नए संशोधन के बाद इन समुदायों के लोगों को भारत में रहने के लिए वीजा संबंधी नियमों का पालन करना होगा। इनमें हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदाय के लोग शामिल हैं।
इस बदलाव का असर उन लोगों पर पड़ेगा, जो 31 दिसंबर 2024 या उससे पहले भारत आए थे। इनमें वे लोग भी शामिल हैं, जो बिना वैध पासपोर्ट या यात्रा दस्तावेजों के भारत पहुंचे थे अथवा जिनके दस्तावेजों की अवधि समाप्त हो चुकी है। पहले इन लोगों को पासपोर्ट और वीजा की अनिवार्यता से छूट मिली हुई थी।
गृह मंत्रालय के नए आदेश में केवल इन छह समुदायों से जुड़े नियम ही नहीं बदले गए हैं, बल्कि पाकिस्तानी नागरिकों, मलेशिया और सिंगापुर की नागरिकता लेने वाले भारतीय मूल के लोगों तथा भारत, नेपाल और भूटान के बीच यात्रा के नियमों को लेकर भी कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं।
क्या हैं नए नियम, जानिए 5 बड़े बदलाव
1. पाकिस्तानी नागरिकों को पासपोर्ट नवीनीकरण में राहत
नए आदेश के तहत 31 दिसंबर 2009 या उससे पहले भारत आए कुछ पाकिस्तानी नागरिकों को पासपोर्ट नवीनीकरण से छूट दी गई है। यह राहत उन लोगों के लिए है, जो भारत में स्थायी रूप से बस गए हैं और पाकिस्तानी राष्ट्रीय पहचान पत्र (सीएनआईसी) नहीं होने के कारण अपना पासपोर्ट नवीनीकृत नहीं करा पा रहे हैं। हालांकि, इसके लिए उन्हें लिखित आश्वासन देना होगा कि वे दोबारा पाकिस्तान नहीं लौटेंगे।
2. मलेशिया और सिंगापुर में बसे भारतीय मूल के लोगों को राहत
मलेशिया और सिंगापुर की नागरिकता ले चुके कुछ भारतीय मूल के लोगों को भी पासपोर्ट नवीनीकरण से राहत दी गई है। यह छूट उन लोगों को मिलेगी, जो 31 दिसंबर 2009 या उससे पहले संबंधित देशों के पासपोर्ट पर भारत लौटे थे और अब अपने पुराने पासपोर्ट का नवीनीकरण नहीं करा पा रहे हैं।
3. भारत, नेपाल और भूटान के बीच यात्रा के नियम स्पष्ट
तीनों देशों के नागरिक अब निर्धारित पहचान पत्रों के आधार पर जमीन और हवाई मार्ग से एक-दूसरे के देश की यात्रा कर सकेंगे। हालांकि, कुछ विशेष परिस्थितियों में पासपोर्ट और वीजा अनिवार्य होंगे। खासकर तीसरे देश से आने-जाने वाले भारतीय नागरिकों और चीन, हांगकांग, मकाऊ या पाकिस्तान के रास्ते यात्रा करने वाले नेपाली तथा भूटानी नागरिकों के लिए अतिरिक्त शर्तें लागू होंगी।
4. श्रीलंकाई तमिल और तिब्बतियों को पुरानी छूट जारी
भारत में शरण लेने वाले कुछ पंजीकृत श्रीलंकाई तमिलों और निर्धारित अवधि में विशेष परमिट के आधार पर भारत आए तिब्बतियों को पासपोर्ट और वीजा संबंधी छूट पहले की तरह मिलती रहेगी। हालांकि, तिब्बती नागरिकों के लिए निर्धारित पंजीकरण और प्रमाणपत्र की शर्तें लागू रहेंगी।
5. सेना के जवानों और विदेशी सैन्य जहाजों के कर्मचारियों को भी राहत
नए इमिग्रेशन संशोधन में सैन्य कर्मियों और विदेशी सैन्य जहाजों के कर्मचारियों से संबंधित छूट के प्रावधान भी शामिल किए गए हैं।
सीएए और नए इमिग्रेशन आदेश में क्या है अंतर?
नागरिकता संशोधन कानून (सीएए), 2019 और इमिग्रेशन आदेश, 2026 दोनों का संबंध पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए छह गैर-मुस्लिम समुदायों से है। हालांकि, दोनों के उद्देश्य अलग-अलग हैं।
सीएए के तहत पात्र लोगों को भारतीय नागरिकता प्राप्त करने के लिए आवेदन करने का रास्ता मिलता है। वहीं, नया इमिग्रेशन आदेश पासपोर्ट और यात्रा दस्तावेजों से संबंधित छूट एवं शर्तों को निर्धारित करता है।
इसलिए यह समझना जरूरी है कि वीजा और पासपोर्ट संबंधी छूट का अर्थ अपने आप भारतीय नागरिकता मिलना नहीं है। दोनों के लिए अलग-अलग कानूनी प्रावधान हैं।