Infosys, TCS, Wipro समेत 8 कंपनियों पर ग्रीन कार्ड कार्रवाई, भारत पर क्या होगा असर?

 

US H-1B Visa News: Infosys, TCS, Wipro समेत 8 कंपनियों पर अमेरिका की कार्रवाई, ग्रीन कार्ड प्रक्रिया रुकी; भारत के IT सेक्टर पर क्या होगा असर?

अमेरिका में नौकरी करने और स्थायी रूप से बसने का सपना देख रहे भारतीय IT प्रोफेशनल्स के लिए बड़ी खबर है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने 8 अक्टूबर 2026 को Infosys, Tata Consultancy Services (TCS), Wipro, HCLTech और Cognizant समेत आठ बड़ी टेक कंपनियों को रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड प्रक्रिया के अहम हिस्से PERM (Permanent Labor Certification) कार्यक्रम से निलंबित कर दिया। इस सूची में Microsoft, Adobe और Capgemini भी शामिल हैं।

अमेरिकी प्रशासन का आरोप है कि कुछ कंपनियां विदेशी कर्मचारियों की भर्ती के लिए इमिग्रेशन कार्यक्रमों का दुरुपयोग कर रही हैं और इससे अमेरिकी कर्मचारियों के रोजगार पर असर पड़ सकता है। सरकार ने प्रभावित कंपनियों के नए PERM आवेदन स्वीकार करने और लंबित आवेदनों पर कार्रवाई रोकने की घोषणा की है। हालांकि, इस कार्रवाई को सभी H-1B वीजा रद्द होने का आदेश समझना गलत होगा।

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किन आठ कंपनियों पर कार्रवाई हुई?

क्रम कंपनी देश/पहचान
1 Infosys भारत
2 Tata Consultancy Services (TCS) भारत
3 Wipro भारत
4 HCLTech भारत
5 Cognizant अमेरिका में मुख्यालय वाली IT सेवा कंपनी
6 Microsoft अमेरिका
7 Adobe अमेरिका
8 Capgemini फ्रांस

अमेरिकी श्रम सचिव कीथ सोंडरलिंग ने निलंबन की घोषणा की। उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कंपनियों की विदेशी कर्मचारियों पर निर्भरता और अमेरिकी कर्मचारियों की छंटनी को लेकर सवाल उठाए। अधिकारियों के अनुसार, प्रभावित कंपनियों ने 2009 से अब तक लगभग 30 लाख विदेशी कर्मचारियों से संबंधित अनुरोध किए हैं। प्रशासन ने 2.3 लाख से अधिक H-1B वीजा अनुमोदनों और एक लाख से अधिक स्थायी श्रम प्रमाणपत्रों का भी उल्लेख किया। ये आंकड़े प्रशासन द्वारा प्रस्तुत किए गए हैं और अपने आप में किसी कंपनी द्वारा नियम तोड़ने का प्रमाण नहीं हैं।

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PERM क्या है और ग्रीन कार्ड की प्रक्रिया कैसे प्रभावित होगी?

PERM का पूरा नाम Program Electronic Review Management है। यह अमेरिकी श्रम विभाग की श्रम प्रमाणन प्रक्रिया है, जिसके जरिए नियोक्ता सामान्यतः यह प्रमाणित करता है कि किसी स्थायी पद पर विदेशी कर्मचारी को नियुक्त करने से अमेरिकी कर्मचारियों के वेतन और रोजगार के अवसरों पर प्रतिकूल असर नहीं पड़ेगा।

यह रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड की सामान्य प्रक्रिया का एक अहम चरण है। PERM के बाद नियोक्ता आम तौर पर I-140 इमिग्रेंट याचिका दाखिल करता है। इसके बाद उपलब्धता और पात्रता के अनुसार कर्मचारी स्थायी निवास के अगले चरण में जा सकता है।

अमेरिकी सरकार की मौजूदा कार्रवाई से प्रभावित कंपनियां नए PERM आवेदन दाखिल नहीं कर पाएंगी और उनके लंबित आवेदनों पर भी रोक रहेगी। इस कारण ग्रीन कार्ड की प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी कर रहे कर्मचारियों को इंतजार करना पड़ सकता है।

भारत में इसका क्या प्रभाव पड़ेगा?

इस फैसले का असर केवल अमेरिका में काम कर रहे कर्मचारियों तक सीमित नहीं रह सकता। भारत की IT कंपनियां अमेरिकी ग्राहकों को सॉफ्टवेयर विकास, क्लाउड सेवाएं, साइबर सुरक्षा, डेटा प्रबंधन और अन्य तकनीकी सेवाएं देती हैं। इन सेवाओं के लिए भारत और अमेरिका, दोनों जगह काम करने वाली टीमें महत्वपूर्ण हैं।

1. भारतीय IT कंपनियों की लागत बढ़ने का जोखिम

यदि अमेरिकी कंपनियों के लिए भारतीय कर्मचारियों को अमेरिका भेजना या वहां लंबे समय तक बनाए रखना कठिन होता है, तो कुछ परियोजनाओं की लागत बढ़ सकती है। कंपनियों को स्थानीय कर्मचारियों की भर्ती, कानूनी अनुपालन और कर्मचारियों की तैनाती की रणनीति में बदलाव करना पड़ सकता है।

हालांकि, PERM पर रोक का मतलब यह नहीं है कि अमेरिकी ग्राहक भारतीय कंपनियों को काम देना बंद कर देंगे। इसका वास्तविक कारोबारी असर इस बात पर निर्भर करेगा कि प्रतिबंध कितने समय तक जारी रहता है और किन कर्मचारियों की प्रक्रियाएं प्रभावित होती हैं।

2. भारत में IT नौकरियों के अवसर बढ़ सकते हैं

यदि अमेरिकी कंपनियां कर्मचारियों को अमेरिका भेजने के बजाय भारत में ही तकनीकी काम करवाने का विकल्प चुनती हैं, तो भारत में सॉफ्टवेयर इंजीनियरों, AI विशेषज्ञों, क्लाउड इंजीनियरों और साइबर सुरक्षा पेशेवरों की मांग बढ़ने की संभावना है।

कंपनियां भारत में अपने ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC), रिसर्च एंड डेवलपमेंट केंद्र और इंजीनियरिंग टीमें बढ़ा सकती हैं। लेकिन यह अभी एक संभावित अवसर है, घोषित भर्ती योजना या सुनिश्चित रोजगार वृद्धि नहीं।

3. भारतीय कर्मचारियों की अमेरिका में बसने की योजना प्रभावित

Infosys, TCS, Wipro और HCLTech जैसी कंपनियों में काम करने वाले जिन भारतीय कर्मचारियों की ग्रीन कार्ड प्रक्रिया नियोक्ता द्वारा दाखिल PERM आवेदन पर निर्भर है, उन्हें देरी का सामना करना पड़ सकता है।

विशेष रूप से उन कर्मचारियों के लिए स्थिति अधिक जटिल हो सकती है, जिनके H-1B वीजा की सामान्य छह साल की अवधि समाप्त होने के करीब है। कुछ परिस्थितियों में नियमों के तहत अतिरिक्त अवधि मिल सकती है, लेकिन पात्रता प्रत्येक कर्मचारी के मामले पर निर्भर करेगी।

4. भारतीय IT शेयरों पर भी नजर

अमेरिकी बाजार में कारोबार के दौरान Infosys और Wipro के अमेरिकी डिपॉजिटरी रिसीट्स (ADRs) में गिरावट दर्ज की गई। NDTV Profit की रिपोर्ट के अनुसार, रिपोर्टिंग के समय Wipro ADR लगभग 2.4% और Infosys ADR करीब 3.13% नीचे थे।

यह शुरुआती बाजार प्रतिक्रिया थी। इससे यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि भारतीय शेयर बाजार में आगे भी उतनी ही गिरावट होगी या सभी IT कंपनियों के कारोबार पर समान असर पड़ेगा।

NDTV Profit

भारत की क्या प्रतिक्रिया आई?

इस मुद्दे पर भारत की IT इंडस्ट्री और कर्नाटक सरकार के प्रतिनिधि की प्रतिक्रिया सामने आई है। हालांकि, उपलब्ध रिपोर्टों में 9 अक्टूबर 2026 तक केंद्र सरकार या विदेश मंत्रालय की ओर से इस विशेष फैसले पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया स्पष्ट रूप से सत्यापित नहीं हुई है।

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1. नैसकॉम ने H-1B और ग्रीन कार्ड प्रक्रिया को अलग बताया

भारत की IT इंडस्ट्री संस्था नैसकॉम ने कहा कि इमिग्रेशन और कुशल कर्मचारियों की अंतरराष्ट्रीय आवाजाही दो अलग विषय हैं, जिन्हें एक ही नजरिए से नहीं देखना चाहिए।

संस्था के मुताबिक, भारतीय IT कंपनियों ने पिछले कुछ वर्षों में H-1B वीजा पर निर्भरता घटाई है और अमेरिका में स्थानीय कर्मचारियों की भर्ती बढ़ाई है। नैसकॉम ने यह भी कहा कि PERM प्रक्रिया के जरिए H-1B कर्मचारियों के स्थायी निवास में बदलने वाले कर्मचारियों की संख्या अपेक्षाकृत सीमित है।

नैसकॉम ने उम्मीद जताई कि भारतीय कंपनियां अमेरिका के लागू नियमों का पालन करती रहेंगी।

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2. कर्नाटक के IT मंत्री प्रियांक खरगे ने बताए दूरगामी असर

कर्नाटक के IT एवं BT मंत्री प्रियांक खरगे ने 9 अक्टूबर को कहा कि अमेरिकी फैसले के भारत के लिए जटिल और दूरगामी परिणाम हो सकते हैं।

उन्होंने पारंपरिक भारतीय IT आउटसोर्सिंग मॉडल के सामने संभावित चुनौतियों का उल्लेख किया। उनके अनुसार, अमेरिका में भारतीय कर्मचारियों को नियुक्त करने और बनाए रखने में कठिनाई बढ़ने पर कंपनियों की लागत बढ़ सकती है और कुशल कर्मचारियों को बनाए रखना मुश्किल हो सकता है।

दूसरी ओर, उन्होंने कहा कि यदि भारतीय इंजीनियरों को अमेरिका भेजना अधिक कठिन और महंगा होता है, तो उच्च मूल्य वाले तकनीकी काम भारत में स्थानांतरित हो सकते हैं। इससे भारत में ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर, रिसर्च, इंजीनियरिंग और उत्पाद विकास के अवसर बढ़ सकते हैं।

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3. TCS ने कारोबारी रणनीति पर बड़े असर की आशंका नहीं जताई

TCS ने कहा कि इस निलंबन से उसकी अमेरिकी कार्यबल रणनीति और ग्राहकों के साथ कामकाज पर कोई महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ने की आशंका नहीं है। कंपनी ने अमेरिका में अगले पांच वर्षों में 15,000 कर्मचारियों की भर्ती की अपनी योजना जारी रखने की बात कही।

कंपनी के अनुसार, पिछले दो वर्षों में उसके PERM आवेदन एकल अंकों में थे। TCS ने यह भी कहा कि अमेरिका में उसकी स्थानीय भर्ती और कैंपस भर्ती व्यवस्था मजबूत है।

अमेरिका ने कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई क्यों की?

अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और श्रम सचिव कीथ सोंडरलिंग ने आरोप लगाया कि कुछ कंपनियां अमेरिकी कर्मचारियों की छंटनी के दौरान विदेशी कर्मचारियों के लिए इमिग्रेशन कार्यक्रमों का इस्तेमाल कर रही हैं। प्रशासन का कहना है कि रोजगार प्रमाणन प्रक्रिया यह सुनिश्चित करने के लिए है कि विदेशी कर्मचारी की नियुक्ति से अमेरिकी कर्मचारियों के वेतन और रोजगार को नुकसान न हो।

Microsoft ने इन आरोपों पर अपना पक्ष रखते हुए कहा कि उसके पिछले वित्त वर्ष के लगभग 80% H-1B आवेदन मौजूदा कर्मचारियों की अवधि बढ़ाने या उनकी स्थिति बदलने के लिए थे, न कि नए कर्मचारियों को भर्ती करने के लिए। कंपनी ने कहा कि तुलनीय काम करने वाले H-1B कर्मचारियों को समान वेतन दिया जाता है।

प्रभावित अन्य कंपनियों की ओर से शुरुआती रिपोर्टों में सभी के विस्तृत जवाब उपलब्ध नहीं थे। इसलिए प्रशासन के आरोपों को सभी आठ कंपनियों के खिलाफ सिद्ध उल्लंघन के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं होगा।

क्या भारतीयों का H-1B वीजा रद्द हो जाएगा?

नहीं, केवल इस PERM निलंबन के कारण सभी भारतीय कर्मचारियों के H-1B वीजा स्वतः रद्द नहीं होते।

  • मौजूदा वैध H-1B स्थिति इस आदेश से अपने आप समाप्त नहीं होती।
  • प्रभावित कंपनियों के नए और लंबित PERM आवेदनों पर रोक से ग्रीन कार्ड प्रक्रिया बाधित हो सकती है।
  • जिन कर्मचारियों की ग्रीन कार्ड प्रक्रिया पहले ही आगे बढ़ चुकी है, उनकी स्थिति इस बात पर निर्भर करेगी कि उनका आवेदन किस चरण में है और उन पर कौन-से नियम लागू होते हैं।
  • भविष्य में अमेरिकी प्रशासन की ओर से अतिरिक्त नियम या स्पष्टीकरण आने पर स्थिति बदल सकती है।

इसलिए अमेरिका में काम कर रहे कर्मचारियों को अपनी व्यक्तिगत इमिग्रेशन स्थिति के बारे में कंपनी की इमिग्रेशन टीम या योग्य अमेरिकी इमिग्रेशन वकील से सलाह लेनी चाहिए।

निष्कर्ष: भारत के लिए चुनौती भी, अवसर भी

अमेरिका का यह कदम भारतीय IT कंपनियों और वहां स्थायी निवास पाने की कोशिश कर रहे कर्मचारियों के लिए अनिश्चितता बढ़ाता है। अल्पकाल में ग्रीन कार्ड प्रक्रिया में देरी, कर्मचारियों को बनाए रखने में कठिनाई और अनुपालन लागत बढ़ने जैसी चुनौतियां सामने आ सकती हैं।

दूसरी ओर, यदि अमेरिकी कंपनियां तकनीकी काम भारत में स्थानांतरित करती हैं, तो भारतीय इंजीनियरों, AI विशेषज्ञों, उत्पाद विकास टीमों और GCC केंद्रों के लिए अवसर पैदा हो सकते हैं। फिलहाल यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रतिबंध कितने समय तक लागू रहता है, कंपनियां क्या कदम उठाती हैं और अमेरिकी सरकार आगे क्या स्पष्टीकरण देती है।

 

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