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Rath Yatra Food: सिर्फ प्रसाद नहीं ‘महाप्रसाद’ — छप्पन भोग से खाजा तक, जानें जगन्नाथ भक्तों की थाली में क्या-क्या

दुनिया की सबसे बड़ी रसोई में मिट्टी के बर्तनों में पकता है भोग; रथ यात्रा के दिन गजामूंग प्रसाद की परंपरा छत्तीसगढ़ के मंदिरों में भी.

by desk

Rath Yatra Food: सिर्फ प्रसाद नहीं, ‘महाप्रसाद’ — रथ यात्रा में क्या खाते हैं महाप्रभु जगन्नाथ के भक्त?

रथ यात्रा सिर्फ आंखों का उत्सव नहीं, स्वाद और श्रद्धा का संगम भी है. पुरी के जगन्नाथ मंदिर का भोजन दुनिया में इकलौता ऐसा प्रसाद है जिसे ‘महाप्रसाद’ कहा जाता है. मान्यता है कि भगवान को अर्पित होने के बाद यह भोजन इतना पवित्र हो जाता है कि इसे ग्रहण करने में जाति, धर्म या ऊंच-नीच का कोई भेद नहीं रहता — सब एक ही पंगत में बैठकर खाते हैं. दुनिया की सबसे बड़ी रसोई का चमत्कार पुरी मंदिर की रसोई को दुनिया की सबसे बड़ी रसोइयों में गिना जाता है.

यहां का तरीका भी अनूठा है — मिट्टी के बर्तन एक के ऊपर एक रखकर लकड़ी की आंच पर भोजन पकाया जाता है, और कहते हैं कि सबसे ऊपर रखा बर्तन सबसे पहले पकता है. भक्त इसे महाप्रभु का चमत्कार मानते हैं. भोग लगने के बाद यह महाप्रसाद मंदिर परिसर के आनंद बाजार में भक्तों को मिलता है. छप्पन भोग में क्या-क्या होता है?

भगवान जगन्नाथ को प्रतिदिन छप्पन भोग यानी 56 तरह के व्यंजन अर्पित किए जाते हैं। इनमें कुछ नाम ऐसे हैं जो हर जगन्नाथ भक्त की जुबान पर रहते हैं:
खाजा — मैदे और चीनी से बनी परतदार, कुरकुरी मिठाई, जो पुरी की पहचान बन चुकी है। रथ यात्रा से लौटा कोई भी श्रद्धालु खाजा लाना नहीं भूलता.    
दालमा — दाल और सब्जियों को साथ पकाकर बनाया जाने वाला ओडिशा का पारंपरिक व्यंजन, जो बिना प्याज-लहसुन के सात्विक रूप में भगवान को अर्पित होता है.


खिचड़ी भोग — चावल और मूंग दाल की सादगी भरी खिचड़ी, जिसे महाप्रभु का प्रिय भोजन माना जाता है.


पोड़ा पीठा — धीमी आंच पर सेंका गया चावल, नारियल और गुड़ का केक जैसा पकवान — कहा जाता है कि यह भगवान जगन्नाथ को विशेष प्रिय है.


रसाबली और मालपुआ — छेने और मावे से बनी रस भरी मिठाइयां, जो भोग की थाली की शान बढ़ाती हैं.

रथ यात्रा के दिन गजामूंग का विशेष भोग रथ यात्रा के दिन एक और खास परंपरा है — गजामूंग का भोग. भीगी हुई अंकुरित मूंग, नारियल, केला और गुड़ से बना यह सादा प्रसाद रथ यात्रा के दौरान भक्तों में बांटा जाता है. छत्तीसगढ़ के जगन्नाथ मंदिरों में भी यही गजामूंग महाप्रसाद अर्पित करने की परंपरा है, और घरों में लोग इस दिन खिचड़ी, मालपुआ और मूंग का प्रसाद बनाकर महाप्रभु को भोग लगाते हैं. कहते हैं, जगन्नाथ का महाप्रसाद सिर्फ पेट नहीं भरता — यह बराबरी का वह स्वाद है जो एक पंगत में राजा और रंक को साथ बिठा देता है.

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