Home » Blog » Karwa Chauth 2026: करवा चौथ पर नहीं दिखे चांद तो कैसे खोलें व्रत? जानें 3 पारंपरिक उपाय…

Karwa Chauth 2026: करवा चौथ पर नहीं दिखे चांद तो कैसे खोलें व्रत? जानें 3 पारंपरिक उपाय…

by desk

नई दिल्ली। करवा चौथ का व्रत सुहागिन महिलाओं के लिए विशेष महत्व रखता है। इस दिन महिलाएं पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना के साथ निर्जला व्रत रखती हैं। परंपरा के अनुसार, चंद्रमा के दर्शन और अर्घ्य देने के बाद व्रत खोला जाता है। लेकिन कई बार बादल, बारिश या खराब मौसम के कारण चांद दिखाई नहीं देता। ऐसे में महिलाओं के मन में सवाल उठता है कि चंद्रमा के दर्शन न होने पर व्रत कैसे खोलें। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ऐसी स्थिति में कुछ पारंपरिक उपाय अपनाए जा सकते हैं।

1. चंद्रोदय के समय की जानकारी लेकर करें इंतजार

यदि आसमान में बादल छाए हों और चांद दिखाई न दे रहा हो, तो सबसे पहले अपने शहर में चंद्रोदय का समय पता करें। निर्धारित समय के बाद कुछ देर तक आसमान साफ होने का इंतजार किया जा सकता है। ध्यान रखें कि चंद्रोदय का समय शहर के अनुसार अलग-अलग हो सकता है।

2. भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करें

धार्मिक मान्यताओं में भगवान शिव और माता पार्वती को अखंड सौभाग्य तथा वैवाहिक सुख का प्रतीक माना जाता है। यदि खराब मौसम के कारण चंद्रमा के दर्शन संभव न हों, तो महिलाएं भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान गणेश की पूजा कर सकती हैं। इस दौरान अपने परिवार की सुख-समृद्धि और पति की लंबी उम्र की कामना की जाती है।

3. पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार लें निर्णय

चांद दिखाई नहीं देने की स्थिति में व्रत खोलने की परंपरा अलग-अलग परिवारों और क्षेत्रों में भिन्न हो सकती है। कुछ परिवारों में चंद्रोदय के समय चंद्रमा की दिशा में अर्घ्य देकर प्रार्थना करने की परंपरा है, जबकि कुछ लोग अपने परिवार की धार्मिक मान्यताओं या पुरोहित की सलाह के अनुसार निर्णय लेते हैं। इसलिए ऐसी स्थिति में परिवार की परंपरा के अनुसार उचित निर्णय लिया जा सकता है।

चांद नहीं दिखने पर घबराएं नहीं

करवा चौथ का व्रत श्रद्धा, विश्वास और पति-पत्नी के रिश्ते की मंगलकामना से जुड़ा है। खराब मौसम के कारण चंद्रमा दिखाई न देने पर परेशान होने के बजाय अपने शहर का चंद्रोदय समय जांचें और परिवार की परंपरा के अनुसार पूजा करें। व्रत खोलने के लिए किसी एक उपाय को सभी जगह अनिवार्य मानने के बजाय अपनी धार्मिक परंपरा का पालन करना उचित है।

Read more:-Chhattisgarh Navratri 2026: जानिए छत्तीसगढ़ में कैसे मनाई जाती है नवरात्रि…

You may also like