साइबर सुरक्षा मजबूत करने के लिए मध्य प्रदेश सरकार का कदम, सरकारी ईमेल व्यवस्था में बदलाव; 45 दिन तक लॉगिन नहीं करने पर अकाउंट निष्क्रिय होने की भी खबर
भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार ने सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों की ईमेल व्यवस्था में बदलाव की पहल की है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, राज्य के अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए भारतीय कंपनी जोहो (Zoho) के मेल प्लेटफॉर्म का उपयोग अनिवार्य किया गया है। इस फैसले का उद्देश्य सरकारी डिजिटल संचार को अधिक सुरक्षित बनाना और विदेशी क्लाउड सेवाओं पर निर्भरता कम करना बताया जा रहा है।
रिपोर्ट के अनुसार, इस व्यवस्था के तहत प्रत्येक ईमेल आईडी के लिए सालाना करीब 2,000 रुपये का भुगतान किया जाएगा। सरकारी कामकाज में ईमेल के जरिए महत्वपूर्ण दस्तावेज, विभागीय निर्देश और संवेदनशील सूचनाओं का आदान-प्रदान होता है। ऐसे में संचार व्यवस्था की सुरक्षा को मजबूत करना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।
साइबर सुरक्षा को लेकर क्यों लिया गया फैसला?
सरकारी विभागों में डिजिटल माध्यम से कामकाज बढ़ने के साथ साइबर हमलों, फिशिंग और अनधिकृत पहुंच का खतरा भी बढ़ा है। ऐसे में सरकारी ईमेल खातों की सुरक्षा, डेटा की गोपनीयता और सुरक्षित संचार व्यवस्था महत्वपूर्ण हो गई है।
नई व्यवस्था के पीछे सरकारी संचार को अधिक सुरक्षित बनाने और डेटा पर नियंत्रण मजबूत करने का उद्देश्य बताया जा रहा है। हालांकि, मध्य प्रदेश में लागू किए गए निर्देशों के विस्तृत दायरे और सभी विभागों पर लागू होने वाली शर्तों की पुष्टि संबंधित सरकारी आदेश से की जानी चाहिए।
Zoho Mail पर होगा सरकारी ईमेल का इस्तेमाल
जोहो एक भारतीय प्रौद्योगिकी कंपनी है, जो ईमेल और अन्य डिजिटल सेवाएं उपलब्ध कराती है। सरकारी ईमेल के लिए इस प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करने की पहल को स्वदेशी डिजिटल सेवाओं को बढ़ावा देने की दिशा में भी देखा जा रहा है।
केंद्र सरकार के स्तर पर भी सुरक्षित सरकारी ईमेल सेवाओं और डेटा संप्रभुता पर जोर दिया गया है। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय से जुड़ी जानकारी के अनुसार, सरकारी ईमेल समाधान में डेटा की सुरक्षा, एन्क्रिप्शन और भारत में डेटा के संरक्षण जैसी आवश्यकताओं पर ध्यान दिया जाता है।
प्रति ईमेल आईडी सालाना 2,000 रुपये का खर्च
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मध्य प्रदेश में नई व्यवस्था के तहत प्रति ईमेल आईडी सालाना 2,000 रुपये खर्च किए जाने की बात कही गई है। इससे सरकारी ईमेल सेवा के संचालन पर होने वाला खर्च चर्चा में है।
हालांकि, इस राशि का भुगतान किस विभाग या मद से होगा, कितनी ईमेल आईडी बनाई जाएंगी और किन कर्मचारियों को यह सुविधा दी जाएगी, इन विवरणों को आधिकारिक आदेश के आधार पर स्पष्ट करना जरूरी है।
45 दिन तक लॉगिन नहीं करने पर अकाउंट निष्क्रिय होने की चर्चा
कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में यह भी बताया गया है कि यदि सरकारी ईमेल खाते में 45 दिनों तक लॉगिन नहीं किया जाता है, तो अकाउंट निष्क्रिय हो सकता है। ऐसे नियम का उद्देश्य निष्क्रिय खातों की निगरानी और डिजिटल सुरक्षा को मजबूत करना हो सकता है।
हालांकि, इस शर्त की वास्तविक प्रक्रिया, अकाउंट दोबारा सक्रिय कराने के नियम और लागू होने वाले अपवादों की पुष्टि संबंधित विभागीय निर्देशों से की जानी चाहिए।
सरकारी डिजिटल व्यवस्था में बदलाव पर नजर
सरकारी ईमेल व्यवस्था में बदलाव का असर अधिकारियों और कर्मचारियों के रोजमर्रा के कामकाज पर पड़ सकता है। विभागीय पत्राचार, दस्तावेज साझा करने और आधिकारिक सूचनाओं के आदान-प्रदान के लिए कर्मचारियों को नई व्यवस्था के अनुरूप काम करना होगा।
फिलहाल, इस फैसले से जुड़े विस्तृत नियम, लागू होने की समयसीमा और विभागवार निर्देशों की जानकारी आधिकारिक आदेश से स्पष्ट होगी। सरकारी कर्मचारियों को अपने विभाग की ओर से जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार ही ईमेल सेवा का उपयोग करना चाहिए।