Raipur Rath Yatra 2026: रायपुर में पुरी जैसा नजारा, राज्यपाल और सीएम साय ने सोने की झाड़ू से बुहारा महाप्रभु का रास्ता
रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी आज महाप्रभु जगन्नाथ के जयकारों से गूंज उठी. गायत्री नगर स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर से निकली भव्य रथ यात्रा में आस्था का ऐसा रंग दिखा कि पल भर को लगा जैसे पुरी की गलियां रायपुर उतर आई हों. भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा तीनों दिव्य रथों पर विराजमान होकर नगर भ्रमण पर निकले तो सड़कों के दोनों ओर श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा.
राज्यपाल और मुख्यमंत्री ने निभाई छेरा पहंरा की रस्म. यात्रा की सबसे खास तस्वीर रही ‘छेरा पहंरा’ की रस्म — राज्यपाल रमेन डेका और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने रथों के आगे सोने की झाड़ू से मार्ग की सफाई की. पुरी में यह रस्म गजपति महाराज निभाते हैं, छत्तीसगढ़ में यही सेवा प्रदेश के संवैधानिक प्रमुखों ने निभाई. सेवा, समर्पण और समानता का इससे सुंदर संदेश और क्या होगा.
सुबह से चले अनुष्ठान, गजामूंग महाप्रसाद का भोग.
मंदिर में सुबह से ही अनुष्ठानों का सिलसिला चलता रहा. वैदिक पंडितों ने विशेष अभिषेक और हवन कराया, भगवान को चंदन, केसर, कस्तूरी और कपूर जैसे सुगंधित द्रव्यों से दिव्य स्नान कराया गया और पारंपरिक गजामूंग महाप्रसाद अर्पित किया गया. इसके बाद शंखनाद और मंगल वाद्यों के बीच तीनों देव रथों पर विराजे. दोपहर बाद रथ खींचने का सिलसिला शुरू हुआ. महिला मंडलों के भजन-कीर्तन, सांस्कृतिक झांकियों और लोकनृत्यों ने पूरे आयोजन को उत्सव में बदल दिया. 24 जुलाई को बाहुड़ा यात्रा के साथ भगवान की मंदिर वापसी होगी. राजनांदगांव में 87 साल पुरानी परंपरा आज भी जिंदा.
रथ यात्रा का उल्लास सिर्फ राजधानी तक सीमित नहीं. संस्कारधानी राजनांदगांव में आज 87वीं रथ यात्रा निकाली गई — करीब नौ दशक पुरानी यह परंपरा आज भी उसी श्रद्धा से जीवित है. गांधी चौक स्थित मंदिर से शुरू हुई यात्रा पुरानी हटरी के श्री राम जानकी मंदिर पहुंची, जहां देवशयनी एकादशी तक भगवान भक्तों को दर्शन देंगे.
ओडिशा-छत्तीसगढ़ की साझा संस्कृति का पर्व. ओडिशा से लगे छत्तीसगढ़ में जगन्नाथ संस्कृति की जड़ें बेहद गहरी हैं. यहां की रथ यात्राएं दोनों राज्यों के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक रिश्ते की जीवंत गवाही हैं — एक ऐसा रिश्ता जो हर आषाढ़ में रथ के पहियों के साथ और मजबूत हो जाता है.
