नई दिल्ली। पितृ पक्ष में बुधवार, 7 अक्टूबर 2026 का दिन श्राद्ध कर्म की दृष्टि से खास रहेगा। इस दिन आश्विन कृष्ण पक्ष की द्वादशी तिथि के साथ मघा नक्षत्र का संयोग बन रहा है। इसी वजह से 7 अक्टूबर को द्वादशी श्राद्ध के साथ मघा श्राद्ध भी किया जाएगा। श्राद्ध कर्म के लिए कुतुप और रौहिण मुहूर्त को महत्वपूर्ण माना जाता है।
7 अक्टूबर को द्वादशी श्राद्ध
पितृ पक्ष में जिस पूर्वज का निधन आश्विन कृष्ण पक्ष की द्वादशी तिथि को हुआ हो, उनके लिए द्वादशी तिथि पर श्राद्ध किया जाता है। द्वादशी को कई स्थानों पर बारस भी कहा जाता है।
पंचांग के अनुसार 7 अक्टूबर को कृष्ण पक्ष की द्वादशी तिथि रात 11:17 बजे तक रहेगी। इसके बाद त्रयोदशी तिथि शुरू होगी।
कुतुप और रौहिण मुहूर्त
7 अक्टूबर को श्राद्ध कर्म के लिए प्रमुख मुहूर्त इस प्रकार बताए गए हैं
- कुतुप मुहूर्त: सुबह 11:36 बजे से दोपहर 12:23 बजे तक
- रौहिण मुहूर्त: दोपहर 12:23 बजे से 1:10 बजे तक
श्राद्ध कर्म के लिए अपराह्न काल को विशेष महत्व दिया जाता है। स्थानीय पंचांग के अनुसार इन समयों में थोड़ा अंतर हो सकता है।
द्वादशी तिथि पर मघा नक्षत्र का संयोग
7 अक्टूबर की खास बात यह है कि इस दिन द्वादशी तिथि के साथ मघा नक्षत्र भी मौजूद रहेगा। पितृ पक्ष में मघा नक्षत्र के दौरान किए जाने वाले श्राद्ध को मघा श्राद्ध कहा जाता है।
मघा श्राद्ध की तारीख केवल द्वादशी तिथि के आधार पर तय नहीं होती। इसके लिए पितृ पक्ष के अपराह्न काल में मघा नक्षत्र की मौजूदगी देखी जाती है। इस वर्ष 7 अक्टूबर को यह संयोग बन रहा है।
रात 9:42 बजे तक रहेगा मघा नक्षत्र
पंचांग के अनुसार 7 अक्टूबर को मघा नक्षत्र रात 9:42 बजे तक रहेगा। इस दौरान चंद्रमा सिंह राशि में रहेगा। श्राद्ध के मुहूर्त और नक्षत्र के समय में स्थान के अनुसार कुछ अंतर संभव है।
इसके बाद कब होंगे श्राद्ध?
द्वादशी और मघा श्राद्ध के बाद पितृ पक्ष की अंतिम तिथियां इस प्रकार रहेंगी—
- 8 अक्टूबर: त्रयोदशी श्राद्ध
- 9 अक्टूबर: चतुर्दशी श्राद्ध
- 10 अक्टूबर: सर्वपितृ अमावस्या
10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या के साथ पितृ पक्ष का समापन होगा।
क्यों खास है 7 अक्टूबर?
7 अक्टूबर को एक साथ द्वादशी तिथि और मघा नक्षत्र का संयोग बन रहा है। इसलिए यह दिन पितृ पक्ष में श्राद्ध कर्म के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। जिन परिवारों में तिथि या नक्षत्र के अनुसार श्राद्ध करने की परंपरा है, वे स्थानीय पंचांग और परिवार की परंपरा के अनुसार कर्मकांड कर सकते हैं।
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