नई दिल्ली। रक्षा मंत्रालय ने भारतीय सेना के लिए बेहतर क्षमता वाले हल्के रडार (LLLR-I) खरीदने के लिए भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) के साथ लगभग 770 करोड़ रुपये का अनुबंध किया है। 21 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह की मौजूदगी में इस पर हस्ताक्षर हुए। मंत्रालय और BEL के अधिकारी भी इस मौके पर मौजूद थे।
ड्रोन के खतरे का जवाब
इन रडार की मदद से लड़ाकू विमान के आकार वाले हवाई लक्ष्यों के साथ छोटे और सूक्ष्म ड्रोन का भी पता लगाया जा सकेगा। इससे मानवरहित हवाई प्रणालियों से पैदा होने वाले खतरों का मुकाबला करने में सेना को मदद मिलेगी। ये रडार निम्न ऊंचाई पर निगरानी करने की क्षमता से लैस होंगे। आज के युद्ध में छोटे ड्रोन सबसे बड़ी चुनौती बनकर उभरे हैं, इसलिए यह क्षमता खास अहमियत रखती है।
स्वदेशीकरण और आत्मनिर्भरता
रक्षा मंत्रालय के अनुसार यह करार देश में एयर डिफेंस सिस्टम के स्वदेशीकरण की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है और इससे भारत के रक्षा विनिर्माण क्षेत्र को बढ़ावा मिलेगा। यह खरीद “विकसित भारत @2047” के लक्ष्य की दिशा में अहम मानी गई है और इससे MSME समेत भारतीय रक्षा उद्योग को मजबूती मिलेगी। मंत्रालय का उद्देश्य एक मजबूत, आत्मनिर्भर और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम रक्षा उद्योग तैयार करना है।
विशेषज्ञों की राय
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह करार सेना की हवाई निगरानी क्षमता मजबूत करने के साथ आधुनिक वायु रक्षा उपकरणों के स्वदेशी निर्माण को भी आगे बढ़ाएगा।
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