बस्तर दशहरा में शुरू हुई 600 साल पुरानी फूल रथ परिक्रमा, मां दंतेश्वरी के छत्र के साथ आरंभ हुआ धार्मिक विधान; राष्ट्रपति मुर्मू के दौरे से उत्साह…

**हेडिंग:** बस्तर दशहरा में शुरू हुई 600 साल पुरानी फूल रथ परिक्रमा, मां दंतेश्वरी के छत्र के साथ आरंभ हुआ धार्मिक विधान; राष्ट्रपति मुर्मू के दौरे से उत्साह

 

**स्लग:** bastar-dussehra-2026-phool-rath-parikrama-president-murmu-muria-darbaछत्तीसगढ़ के जगदलपुर में चल रहे बस्तर दशहरा में फूल रथ की परिक्रमा शुरू हो गई है। बस्तर दशहरा की 600 साल पुरानी फूल रथ परिक्रमा मां दंतेश्वरी के छत्र के साथ धार्मिक विधान शुरू होने के बाद आरंभ हुई। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के प्रस्तावित दौरे से लोगों में उत्साह बढ़ गया है।

बस्तर दशहरा क्या है

बस्तर दशहरा छत्तीसगढ़ का पर्व है, जिसका मुख्य केंद्र जगदलपुर है। यह लगभग 75 दिन चलता है और इसकी आराध्या मां दंतेश्वरी हैं। इस साल का शुभारंभ 12 अगस्त को पाट जात्रा से हुआ। मां दंतेश्वरी को समर्पित यह पर्व अपनी अलग जनजातीय परंपराओं, लोक आस्था और सामुदायिक भागीदारी के लिए पूरे देश में पहचाना जाता है।

कार्यक्रम की रूपरेखा

एक शैक्षणिक गाइड के अनुसार 10 अक्टूबर को काछनगादी, 11 अक्टूबर को कलश स्थापना और 12 अक्टूबर को जोगी बिठाई की रस्में हुईं। 13 से 18 अक्टूबर तक नवरात्रि पूजा और रथ परिक्रमा होगी। 19 अक्टूबर को महाअष्टमी और निशा जात्रा, 20 को मावली परघाव, 21 को भीतर रैनी और 22 को बाहर रैनी होगी। 23 अक्टूबर को काछन जात्रा और मुरिया दरबार है, 24 को कुटुम्ब जात्रा और 27 अक्टूबर को मावली माता की डोली विदाई है। इन तारीखों में आयोजकों की ओर से बदलाव संभव है।

राष्ट्रपति का दौरा

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के निमंत्रण पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 23 अक्टूबर 2026 को जगदलपुर में होने वाले मुरिया दरबार में शामिल होने का आमंत्रण स्वीकार कर लिया है। निमंत्रण के दौरान मुख्य सचिव समेत अधिकारी उपस्थित रहे। एक अन्य रिपोर्ट में दौरा 22 अक्टूबर से बताया गया है। उसके मुताबिक राष्ट्रपति 22 अक्टूबर को छत्तीसगढ़ पहुंचेंगी। आधिकारिक कार्यक्रम का अंतिम ब्योरा आना बाकी है।

मुरिया दरबार का महत्व

मुरिया दरबार बस्तर दशहरा की परंपराओं में विशेष स्थान रखता है और इसे बस्तर की जीवंत सामाजिक परंपरा कहा गया है। उसी दौर की रिपोर्ट के अनुसार बस्तर की संस्कृति में मांझी और चालकी जैसे पारंपरिक पदों की अहम भूमिका रही है।

बस्तर से राष्ट्रपति का जुड़ाव

राष्ट्रपति ने फरवरी 2026 में जगदलपुर में बस्तर पंडुम का उद्घाटन किया था। उस दौरान उन्होंने बस्तर दशहरा की परंपरा की सराहना की और इसे जनजातीय संस्कृति, लोक आस्था और भाईचारे की अनूठी मिसाल बताया था। उन्होंने जुलाई 2026 में बस्तर के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात के दौरान भी मांझी और चालकी के सामाजिक जीवन से जुड़े महत्व पर बात की थी।

फूल रथ परिक्रमा की रोज की गतिविधियों और भीड़-प्रबंधन का ब्योरा उपलब्ध रिपोर्टों में नहीं है, इसलिए उसे शामिल नहीं किया गया है।

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