अंकिता भंडारी हत्याकांड: इंडिया गेट पर राहुल-प्रियंका गांधी ने पीड़ित परिवार से की मुलाकात

 

दुष्यंत गौतम को सिक्किम का राज्यपाल नियुक्त किए जाने का अंकिता के परिजनों ने किया विरोध, राष्ट्रपति से की नियुक्ति रोकने की अपील

नई दिल्ली। उत्तराखंड के चर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर एक बार फिर राजनीतिक और सामाजिक हलचल तेज हो गई है। बुधवार, 14 अक्टूबर 2026 को कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी दिल्ली के इंडिया गेट पहुंचे, जहां उन्होंने अंकिता भंडारी के माता-पिता से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने परिवार से बातचीत कर मामले से जुड़ी जानकारी ली। अंकिता के परिजन अपनी बेटी के लिए न्याय की मांग कर रहे हैं।

 

दुष्यंत गौतम की नियुक्ति का विरोध क्यों?

 

अंकिता भंडारी के परिजन दुष्यंत गौतम को सिक्किम का राज्यपाल नियुक्त किए जाने के फैसले का विरोध कर रहे हैं। परिवार की मांग है कि मामले में कथित रूप से सामने आए सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच हो और न्याय सुनिश्चित किया जाए।

 

अंकिता के पिता वीरेंद्र सिंह भंडारी ने राष्ट्रपति से अपील करते हुए कहा कि CBI जांच पूरी होने तक दुष्यंत गौतम को राज्यपाल नियुक्त नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी उठाई है। हालांकि, इन आरोपों और मांगों को संबंधित पक्षों के आधिकारिक बयान तथा जांच के निष्कर्षों के संदर्भ में देखना जरूरी है।

 

क्या है अंकिता भंडारी हत्याकांड?

 

अंकिता भंडारी उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले में स्थित एक रिसॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के रूप में काम करती थीं। सितंबर 2022 में उनकी हत्या का मामला सामने आया था। इस घटना के बाद पूरे उत्तराखंड में आक्रोश फैल गया और मामले में निष्पक्ष जांच तथा दोषियों को कड़ी सजा देने की मांग उठी।

 

इस मामले में रिसॉर्ट मालिक पुलकित आर्य और दो अन्य आरोपियों के खिलाफ मुकदमा चला। जून 2025 में कोटद्वार की अदालत ने तीनों आरोपियों को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।

 

परिवार की मांग: निष्पक्ष जांच और न्याय

 

अंकिता के परिवार का कहना है कि मामले से जुड़े सभी सवालों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। परिवार की मांगों को लेकर दिल्ली में हुई मुलाकात ने इस प्रकरण को एक बार फिर राष्ट्रीय चर्चा में ला दिया है।

 

अंकिता भंडारी हत्याकांड केवल एक आपराधिक मामला नहीं, बल्कि महिलाओं की सुरक्षा, कार्यस्थल पर संरक्षण और न्यायिक प्रक्रिया में जनता के विश्वास से जुड़ा मुद्दा भी बन गया है।

 

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