छत्तीसगढ़ के चार शहरों में ई-बसों की तैयारी तेज, नवंबर से शुरू हो सकती है सेवा
राज्य समाचार | 14 अक्टूबर 2026: छत्तीसगढ़ के शहरों में सार्वजनिक परिवहन की तस्वीर बदलने की तैयारी है। लंबे इंतजार के बाद प्रधानमंत्री ई-बस सेवा योजना के तहत प्रदेश के चार प्रमुख शहरों—रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग-भिलाई और कोरबा—में कुल 240 इलेक्ट्रिक बसें चलाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। 11 अक्टूबर 2026 को चारों नगर निगमों और चयनित संचालन एजेंसी के बीच समझौता हुआ। शुरुआती चरण में बिलासपुर और भिलाई में 20-20 बसें चलाने का लक्ष्य रखा गया है। हालांकि, यात्रियों के लिए सबसे बड़ा सवाल यही है कि बसें वास्तव में सड़कों पर कब उतरेंगी और उन्हें किन सुविधाओं का लाभ मिलेगा।
किस शहर को कितनी ई-बसें मिलेंगी?
1. रायपुर — 100 बसें

प्रदेश की राजधानी को सबसे अधिक इलेक्ट्रिक बसें आवंटित की गई हैं। इनसे शहर में सार्वजनिक परिवहन का विस्तार करने और निजी वाहनों पर निर्भरता घटाने की उम्मीद है। हालांकि, बस डिपो और चार्जिंग व्यवस्था की तैयारियों के कारण यहां सेवा शुरू होने में अधिक समय लग सकता है।
2. दुर्ग-भिलाई — 50 बसें

दुर्ग-भिलाई में पहले चरण के लिए 20 इलेक्ट्रिक बसें शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, नवंबर 2026 की शुरुआत तक संचालन शुरू करने की तैयारी है।
3. बिलासपुर — 50 बसें

बिलासपुर में भी शुरुआती चरण में 20 बसें चलाने का लक्ष्य है। योजना के अनुसार आगे चलकर कुल 50 बसों का संचालन किया जाना है।

कोरबा को 40 इलेक्ट्रिक बसें आवंटित की गई हैं। यहां बसों के संचालन की तारीख और विस्तृत मार्गों की जानकारी अभी स्पष्ट रूप से सामने नहीं आई है।
ई-बसों में यात्रियों को क्या खास सुविधाएं मिलेंगी?
योजना से जुड़ी उपलब्ध जानकारियों के अनुसार, बसों को आधुनिक सुविधाओं से लैस करने की तैयारी है। इनमें यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
डिजिटल टिकट: मोबाइल के माध्यम से टिकट लेने और किराये का भुगतान करने की सुविधा प्रस्तावित है।
प्रदूषण में कमी: बिजली से चलने वाली बसें सीधे तौर पर डीजल इंजन की तरह धुआं नहीं छोड़तीं, जिससे शहरों में स्थानीय वायु प्रदूषण घटाने में मदद मिल सकती है।
सार्वजनिक परिवहन में सुधार: बेहतर बस सेवा मिलने से विद्यार्थियों, नौकरीपेशा लोगों, महिलाओं और अन्य दैनिक यात्रियों को लाभ मिल सकता है।
आधुनिक संचालन व्यवस्था: बसों के संचालन, रखरखाव और यात्री सुविधाओं को व्यवस्थित बनाने की योजना है।
ध्यान देने वाली बात यह है कि सभी बसों में सुविधाओं की अंतिम सूची, किराया, निर्धारित मार्ग और समय-सारणी की पूरी जानकारी अभी सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं है। इसलिए किसी खास मार्ग या किराये को फिलहाल तय मानना उचित नहीं होगा।
सबसे बड़ा सवाल: अब तक ई-बसें क्यों नहीं चलीं?
छत्तीसगढ़ में ई-बसों की घोषणा सितंबर 2024 में हुई थी, लेकिन अक्टूबर 2026 तक सेवा शुरू होने में देरी रही। इसकी प्रमुख वजहों में बसों के लिए डिपो तैयार करना, चार्जिंग स्टेशन विकसित करना, बिजली कनेक्शन उपलब्ध कराना और संचालन की व्यवस्थाएं पूरी करना शामिल हैं।
रायपुर में जरवाय क्षेत्र में डिपो और चार्जिंग स्टेशन का निर्माण भी देरी से चलने की खबरें सामने आई थीं। दूसरी ओर, दुर्ग-भिलाई और बिलासपुर में शुरुआती बसें चलाने की तैयारी को प्राथमिकता दी गई है।
यानी, बसों की मंजूरी मिलना और उनका वास्तव में सड़कों पर उतरना दो अलग-अलग चरण हैं। 11 अक्टूबर का समझौता संचालन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, लेकिन यात्रियों को वास्तविक लाभ तभी मिलेगा जब बसें नियमित रूप से चलने लगेंगी।
आम लोगों को कैसे मिलेगा फायदा?
यदि निर्धारित योजना के अनुसार बसें शुरू होती हैं और उनके मार्ग प्रमुख बाजारों, अस्पतालों, शिक्षण संस्थानों तथा आवासीय क्षेत्रों से जुड़ते हैं, तो शहरों में आने-जाने के लिए एक अतिरिक्त विकल्प मिलेगा।
निजी वाहन से रोजाना यात्रा करने वालों को सार्वजनिक परिवहन का विकल्प मिल सकता है।
डीजल आधारित परिवहन पर निर्भरता कम करने में सहायता मिलेगी।
शहरों में यातायात व्यवस्था और सार्वजनिक परिवहन को बेहतर बनाने का अवसर मिलेगा।
डिजिटल टिकटिंग लागू होने पर यात्रियों के लिए भुगतान अधिक सुविधाजनक हो सकता है।
हालांकि, बस सेवा कितनी सफल होगी, यह उसके किराये, मार्गों, समय पर संचालन और बसों की पर्याप्त संख्या पर भी निर्भर करेगा।
छत्तीसगढ़ के चार शहरों के लिए स्वीकृत 240 ई-बसें शहरी परिवहन को बेहतर बनाने की बड़ी योजना हैं। रायपुर को 100, बिलासपुर और दुर्ग-भिलाई को 50-50 तथा कोरबा को 40 बसें मिलनी हैं। फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण लक्ष्य बिलासपुर और भिलाई में नवंबर की शुरुआत तक शुरुआती 20-20 बसों का संचालन शुरू करना है। अब देखना होगा कि निर्धारित समयसीमा के अनुसार बसें सड़कों पर उतरती हैं या यात्रियों को अभी और इंतजार करना पड़ता है।