रायपुर। छत्तीसगढ़ के शहरी इलाकों में सड़कों पर घूमने वाले आवारा पशुओं को लेकर अब प्रशासन नई व्यवस्था की तैयारी में है। बेसहारा पशुओं और आवारा कुत्तों की पहचान और निगरानी के लिए उनका डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करने की योजना बनाई जा रही है। इस व्यवस्था के लागू होने के बाद पशुओं से जुड़ी जानकारी को एक जगह दर्ज किया जा सकेगा।
डिजिटल प्रोफाइल में दर्ज होगी जरूरी जानकारी
योजना के तहत आवारा पशुओं की पहचान कर उनका पंजीयन किया जाएगा। इसके बाद उनकी तस्वीर, पहचान से जुड़ी जानकारी और अन्य जरूरी विवरण डिजिटल रिकॉर्ड में दर्ज किए जा सकते हैं। इससे प्रशासन को ऐसे पशुओं की संख्या और उनकी स्थिति पर नजर रखने में मदद मिलेगी।
सड़क हादसों और पशुओं की समस्या पर लगेगी लगाम
शहरों की सड़कों पर आवारा पशुओं के कारण अक्सर यातायात प्रभावित होता है और दुर्घटनाओं का खतरा भी बना रहता है। नई डिजिटल व्यवस्था से पशुओं की पहचान और प्रबंधन को बेहतर बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
आवारा कुत्तों की निगरानी और उनसे जुड़े मामलों में भी यह रिकॉर्ड प्रशासन के लिए उपयोगी हो सकता है। इससे पशु प्रबंधन से जुड़ी योजनाओं को व्यवस्थित तरीके से लागू करने में मदद मिलेगी।
शहरों में व्यवस्था सुधारने की कोशिश
डिजिटल रिकॉर्ड तैयार होने के बाद प्रशासन के पास यह जानकारी उपलब्ध रहेगी कि किस क्षेत्र में कितने बेसहारा पशु हैं और उनके प्रबंधन के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं। आने वाले समय में यह व्यवस्था शहरी क्षेत्रों में पशु प्रबंधन को अधिक व्यवस्थित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।
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