परिसर में सुरक्षित आवास, नियमित निगरानी और प्रशासन से समन्वय पर जोर
रायपुर। जिले में अध्ययनरत विदेशी विद्यार्थियों की सुरक्षा, उनके लिए बेहतर शैक्षणिक वातावरण तथा कानून-व्यवस्था से जुड़े विभिन्न विषयों को लेकर आज कलेक्ट्रेट रायपुर में जिला प्रशासन एवं पुलिस अधिकारियों ने जिले के विश्वविद्यालयों और अन्य शैक्षणिक संस्थानों के प्रमुखों के साथ बैठक की। बैठक में कलेक्टर रायपुर डॉ. गौरव कुमार सिंह तथा पुलिस अधीक्षक रायपुर ग्रामीण श्रीमती श्वेता श्रीवास्तव सिन्हा ने विश्वविद्यालयों के कुलपतियों एवं प्रतिनिधियों से विदेशी विद्यार्थियों से संबंधित व्यवस्थाओं की जानकारी ली और आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
बैठक के दौरान विदेशी विद्यार्थियों के आवास, उनकी सुरक्षा, संस्थान स्तर पर निगरानी, स्थानीय प्रशासन एवं पुलिस के साथ समन्वय तथा किसी भी अप्रिय स्थिति से पहले आवश्यक सावधानी बरतने जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। अधिकारियों ने कहा कि भारत में शिक्षा प्राप्त करने के लिए अलग-अलग देशों से आने वाले विद्यार्थियों को सुरक्षित, अनुशासित और सकारात्मक वातावरण उपलब्ध कराना विश्वविद्यालयों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।
कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षक ने कहा कि विदेशी विद्यार्थियों की सुरक्षा के साथ-साथ स्थानीय नागरिकों की सुरक्षा और क्षेत्र में शांतिपूर्ण वातावरण बनाए रखना भी प्रशासन की प्राथमिकता है। इसके लिए विश्वविद्यालय प्रबंधन और प्रशासन के बीच लगातार बेहतर समन्वय आवश्यक है। संस्थानों से कहा गया कि विद्यार्थियों की समस्याओं और उनकी सुरक्षा से जुड़े विषयों को गंभीरता से लेते हुए समय पर आवश्यक कदम उठाए जाएं।
बैठक में विशेष रूप से विदेशी विद्यार्थियों के आवास को लेकर निर्देश दिए गए। विश्वविद्यालयों एवं शैक्षणिक संस्थानों को कहा गया कि जो विदेशी विद्यार्थी वर्तमान में संस्थान के छात्रावास से बाहर निजी मकानों, पीजी अथवा अन्य स्थानों पर रह रहे हैं, उनके लिए सुरक्षित एवं सुव्यवस्थित आवास की व्यवस्था की जाए। ऐसे विद्यार्थियों को अगले 15 से 30 दिनों के भीतर विश्वविद्यालय अथवा कॉलेज द्वारा उपलब्ध कराए गए या संस्थान से संबद्ध सुरक्षित छात्रावास में स्थानांतरित करने की प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए गए।
प्रशासन ने कहा कि आवास की व्यवस्था करते समय विद्यार्थियों की सुविधा, सुरक्षा, संस्थान से दूरी, स्थानीय परिस्थितियों और उपलब्ध संसाधनों का विशेष ध्यान रखा जाए। इसके लिए प्रत्येक संस्थान को अपनी स्थिति के अनुसार कार्ययोजना तैयार करने तथा उसे प्रभावी रूप से लागू करने के निर्देश दिए गए।
बैठक में कानून-व्यवस्था से जुड़े विषयों पर भी विस्तार से चर्चा हुई। अधिकारियों ने कहा कि किसी अप्रिय घटना, दुर्घटना या कानून-विरोधी गतिविधि के सामने आने का इंतजार करने के बजाय संभावित कारणों की पहले से पहचान करना जरूरी है। इसके लिए संस्थानों को अपने स्तर पर निगरानी व्यवस्था मजबूत करने और विद्यार्थियों के साथ नियमित संवाद बनाए रखने को कहा गया।
प्रशासन और पुलिस को स्थानीय नागरिकों की ओर से समय-समय पर विदेशी विद्यार्थियों से संबंधित शिकायतें एवं सूचनाएं प्राप्त होती रही हैं। कुछ मामलों में विद्यार्थियों द्वारा अनुशासनहीनता अथवा कानून-विरोधी गतिविधियों में शामिल होने की आशंका से जुड़ी शिकायतों का भी उल्लेख किया गया। इन परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए विश्वविद्यालय प्रबंधन को अपने स्तर पर प्रभावी अनुशासन व्यवस्था, निगरानी और काउंसलिंग की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि किसी विद्यार्थी के खिलाफ केवल उसकी राष्ट्रीयता को आधार बनाकर कार्रवाई नहीं की जाएगी। यदि किसी व्यक्ति द्वारा कानून का उल्लंघन किया जाता है, तो उसकी राष्ट्रीयता से अलग हटकर संबंधित कानून और निर्धारित नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन ने सभी पक्षों से तथ्यों के आधार पर शिकायतों और मामलों को देखने की अपील की।
बैठक में यह भी कहा गया कि अलग-अलग देशों से आने वाले विद्यार्थियों की सामाजिक और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि स्थानीय परिस्थितियों से अलग हो सकती है। ऐसे में विश्वविद्यालयों की जिम्मेदारी है कि वे विदेशी विद्यार्थियों को भारत के कानून, स्थानीय सामाजिक व्यवहार, रीति-रिवाज, सार्वजनिक आचरण और स्थानीय संवेदनशीलताओं की जानकारी दें। इससे विद्यार्थियों को स्थानीय वातावरण को समझने में मदद मिलेगी और अनावश्यक विवादों की स्थिति को भी रोका जा सकेगा।
विश्वविद्यालय प्रबंधन को विदेशी विद्यार्थियों के लिए नियमित ओरिएंटेशन और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने के निर्देश दिए गए। इन कार्यक्रमों में विद्यार्थियों को स्थानीय नियमों के साथ-साथ आपातकालीन परिस्थितियों में संपर्क किए जाने वाले नंबरों, पुलिस सहायता, यातायात नियमों और साइबर सुरक्षा से संबंधित आवश्यक जानकारी देने पर जोर दिया गया।
इसके अलावा विद्यार्थियों को नशीले पदार्थों तथा अन्य कानून-विरोधी गतिविधियों से दूर रहने के संबंध में भी जागरूक करने के निर्देश दिए गए। प्रशासन ने कहा कि विद्यार्थियों को किसी भी समस्या की स्थिति में स्वयं कोई विवाद बढ़ाने के बजाय संबंधित विश्वविद्यालय प्रशासन, पुलिस अथवा जिला प्रशासन से संपर्क करने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।
बैठक में विदेशी विद्यार्थियों से संबंधित रिकॉर्ड को व्यवस्थित एवं अद्यतन रखने पर भी विशेष जोर दिया गया। सभी विश्वविद्यालयों एवं शैक्षणिक संस्थानों को निर्देशित किया गया कि उनके यहां अध्ययनरत विदेशी विद्यार्थियों की सत्यापित जानकारी संस्थान स्तर पर सुरक्षित और व्यवस्थित रूप से उपलब्ध रहे तथा आवश्यकता पड़ने पर जिला प्रशासन एवं पुलिस के साथ साझा की जा सके।
इस रिकॉर्ड में विदेशी विद्यार्थियों की संख्या, उनका देश, संबंधित पाठ्यक्रम, संस्थान में प्रवेश की स्थिति, छात्रावास अथवा निजी आवास का विवरण और आवश्यक संपर्क जानकारी सहित अन्य प्रासंगिक विवरणों को अद्यतन रखने के निर्देश दिए गए। विद्यार्थियों के भारत आगमन से लेकर उनकी अध्ययन अवधि और आवास से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी का रिकॉर्ड भी व्यवस्थित रखने को कहा गया।
प्रशासन ने संस्थानों को यह भी निर्देश दिया कि किसी विदेशी विद्यार्थी के आवास, अध्ययन, संस्थान या अन्य महत्वपूर्ण जानकारी में बदलाव होने पर आवश्यकतानुसार संबंधित अधिकारियों को समय पर जानकारी उपलब्ध कराई जाए। इससे किसी भी आपात स्थिति में विद्यार्थी तक शीघ्र पहुंचने और आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
बैठक में विश्वविद्यालय प्रशासन से यह भी कहा गया कि विदेशी विद्यार्थियों के साथ नियमित संवाद स्थापित किया जाए। उनकी समस्याओं को सुनने और आवश्यक मार्गदर्शन देने के लिए संस्थान स्तर पर उचित व्यवस्था विकसित की जाए। विद्यार्थियों को स्थानीय कानून एवं नियमों की जानकारी देने के साथ-साथ उनके अधिकारों और जिम्मेदारियों के प्रति भी जागरूक किया जाए।
कलेक्टर रायपुर डॉ. गौरव कुमार सिंह एवं पुलिस अधीक्षक रायपुर ग्रामीण श्रीमती श्वेता श्रीवास्तव सिन्हा ने विश्वविद्यालय प्रबंधन, विदेशी विद्यार्थियों और स्थानीय नागरिकों से सहयोग की अपील की। उन्होंने कहा कि रायपुर को विद्यार्थियों के लिए सुरक्षित, शांतिपूर्ण और सकारात्मक शैक्षणिक वातावरण बनाए रखने के लिए सभी पक्षों की सामूहिक जिम्मेदारी है।
प्रशासन ने कहा कि सुरक्षा व्यवस्था केवल पुलिस या जिला प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं है। विश्वविद्यालय प्रबंधन, विद्यार्थी, अभिभावक, स्थानीय नागरिक और प्रशासन आपसी समन्वय से ही बेहतर एवं सुरक्षित वातावरण तैयार कर सकते हैं। सभी संस्थानों से अपेक्षा की गई कि वे विदेशी विद्यार्थियों की सुरक्षा, अनुशासन और बेहतर शैक्षणिक वातावरण के लिए दिए गए निर्देशों का प्रभावी रूप से पालन सुनिश्चित करें।