यूपीआई पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) चार्ज लगाए जाने की संभावना को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार के खिलाफ देशव्यापी विरोध प्रदर्शन तेज कर दिया है। पार्टी का आरोप है कि सरकार ने चुपचाप 2,000 रुपये से अधिक की UPI मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर शुल्क लगाने का रास्ता खोल दिया है।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने इसे मोदी सरकार की “लूट” करार देते हुए कहा कि “UPI पर कोई शुल्क नहीं” के वादे को अब बदलकर “2,000 रुपये तक की UPI ट्रांजैक्शन पर कोई शुल्क नहीं” कर दिया गया है। वहीं लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने दावा किया कि भले ही 2,000 रुपये से ऊपर के ट्रांजैक्शन कुल वॉल्यूम का सिर्फ 5% हों, लेकिन वे UPI के कुल लेनदेन मूल्य का करीब 65% हिस्सा बनाते हैं। पार्टी प्रवक्ता पवन खेड़ा ने इसे “मोदी टैक्स” नाम दिया है।
दरअसल, 4 अगस्त 2026 को संसद ने Taxation and Other Laws (Amendment) Bill, 2026 पारित किया था, जिसके तहत Payment and Settlement Systems Act, 2007 की धारा 10A में संशोधन किया गया — यही प्रावधान अब तक UPI पर किसी भी तरह का शुल्क लगाने को कानूनन प्रतिबंधित करता था। सरकार का कहना है कि आम उपभोक्ताओं के लिए UPI पूरी तरह मुफ्त बना रहेगा, और कोई भी संभावित MDR सिर्फ बड़े व्यापारियों पर, तय सीमा से ऊपर के चुनिंदा लेनदेन पर ही लागू होगा — इस पर अंतिम फैसला NPCI के नेतृत्व वाली UPI and Services Steering Committee लेगी।
इसी मुद्दे को लेकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने लखनऊ समेत कई राज्यों में सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन किया, जिसमें पुलिस और कार्यकर्ताओं के बीच झड़प की भी खबरें आईं। पार्टी का कहना है कि व्यापारियों पर पड़ने वाला यह अतिरिक्त बोझ आखिरकार बढ़ी हुई कीमतों के जरिए आम उपभोक्ता की जेब से ही वसूला जाएगा।