रायपुर। छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में केंद्र सरकार की स्वामित्व योजना ग्रामीण परिवारों के आर्थिक सशक्तिकरण का माध्यम बन रही है। योजना के तहत अब तक जिले के 54 हजार से अधिक ग्रामीण परिवारों को उनकी आवासीय संपत्ति के अधिकार अभिलेख सौंपे जा चुके हैं। इन दस्तावेजों से ग्रामीणों को अपनी संपत्ति पर कानूनी अधिकार मजबूत करने के साथ बैंक से ऋण लेकर स्वरोजगार शुरू करने के अवसर भी मिल रहे हैं।
78 हजार अधिकार अभिलेख वितरण का लक्ष्य
धमतरी जिले में स्वामित्व योजना के अंतर्गत लगभग 78 हजार अधिकार अभिलेख वितरित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इनमें से 54 हजार से अधिक अभिलेख ग्रामीण परिवारों को दिए जा चुके हैं। शेष अभिलेखों का वितरण आगामी एक माह में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
योजना का उद्देश्य ग्रामीण आबादी क्षेत्रों में आवासीय संपत्तियों का सर्वेक्षण कर पात्र परिवारों को उनकी जमीन का वैधानिक दस्तावेज उपलब्ध कराना है। इससे संपत्ति के स्वामित्व को लेकर स्पष्टता आती है और ग्रामीण परिवारों को अपनी संपत्ति का आर्थिक उपयोग करने में मदद मिलती है।
प्रॉपर्टी कार्ड से मिला 14.75 लाख रुपये का ऋण
धमतरी जिले के ग्राम मड़ईभाटा निवासी लघु कृषक देवेंद्र देवांगन इस योजना के सफल लाभार्थियों में शामिल हैं। उन्हें 17 मई 2025 को स्वामित्व योजना के तहत प्रॉपर्टी कार्ड मिला था। इस दस्तावेज के आधार पर उन्होंने आईडीएफसी बैंक से 14.75 लाख रुपये का ऋण प्राप्त किया।
ऋण की सहायता से देवेंद्र ने अपने गांव में ही ‘देवांगन टेलर्स एंड रेडीमेड गारमेंट्स’ नाम से दुकान शुरू की। उनकी यह पहल बताती है कि संपत्ति के वैध दस्तावेज ग्रामीणों के लिए स्वरोजगार और आजीविका के नए अवसर खोलने में मददगार हो सकते हैं।
संपत्ति के अधिकार से बढ़ेगी आर्थिक आत्मनिर्भरता
स्वामित्व योजना के तहत मिलने वाले अधिकार अभिलेख ग्रामीण परिवारों को उनकी आवासीय संपत्ति का कानूनी प्रमाण उपलब्ध कराते हैं। इन दस्तावेजों से बैंक और वित्तीय संस्थानों से ऋण लेने में सहायता मिल सकती है। ग्रामीण इनका उपयोग पात्रता और बैंक की शर्तों के अनुसार आवास निर्माण, मरम्मत तथा व्यवसाय शुरू करने जैसे कार्यों के लिए कर सकते हैं।
इसके अलावा, संपत्ति के स्पष्ट दस्तावेज होने से भविष्य में स्वामित्व संबंधी विवादों को रोकने और उनका समाधान करने में भी मदद मिल सकती है।
आत्मनिर्भर गांवों की दिशा में महत्वपूर्ण पहल
धमतरी जिले में स्वामित्व योजना का क्रियान्वयन ग्रामीण परिवारों को संपत्ति के अधिकारों से जोड़ने के साथ आर्थिक सुरक्षा और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। देवेंद्र देवांगन जैसे लाभार्थियों की सफलता दूसरे ग्रामीणों को भी अपने गांव में स्वरोजगार शुरू करने के लिए प्रेरित कर सकती है।
योजना का उद्देश्य केवल संपत्ति का दस्तावेज उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि ग्रामीण परिवारों के लिए आर्थिक अवसर बढ़ाना और आत्मनिर्भर गांवों की परिकल्पना को मजबूत करना भी है।
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