नई दिल्ली। भारत के पूर्व राष्ट्रपति और स्वतंत्रता सेनानी डॉ. शंकर दयाल शर्मा की आज 19 अगस्त को जयंती मनाई जा रही है। उनका जन्म 19 अगस्त 1918 को भोपाल में हुआ था। वे देश के ऐसे राजनेताओं में शामिल रहे, जिन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन से लेकर भारतीय राजनीति और संवैधानिक व्यवस्था तक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
स्वतंत्रता आंदोलन में भी लिया हिस्सा
डॉ. शंकर दयाल शर्मा का राजनीतिक जीवन स्वतंत्रता आंदोलन के दौर में शुरू हुआ। उन्होंने ब्रिटिश शासन के खिलाफ चल रहे स्वतंत्रता संघर्ष में भाग लिया और इसके लिए जेल भी गए। आजादी के बाद उन्होंने सार्वजनिक जीवन में सक्रिय भूमिका निभाई और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से जुड़े रहे।
भोपाल के मुख्यमंत्री से राष्ट्रीय राजनीति तक
आजादी के बाद डॉ. शर्मा ने मध्य प्रदेश क्षेत्र की राजनीति में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं। वे 1952 से 1956 तक तत्कालीन भोपाल राज्य के मुख्यमंत्री रहे। इसके बाद भोपाल राज्य का पुनर्गठन होने पर उन्होंने राष्ट्रीय राजनीति में अपनी सक्रियता बढ़ाई।
उन्होंने केंद्र सरकार और कांग्रेस संगठन में भी विभिन्न महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं। वे केंद्रीय संचार मंत्री और कानून एवं न्याय मंत्री जैसे पदों पर भी रहे।
तीन राज्यों के राज्यपाल भी रहे
डॉ. शंकर दयाल शर्मा का संवैधानिक अनुभव काफी व्यापक था। उन्होंने आंध्र प्रदेश, पंजाब और महाराष्ट्र के राज्यपाल के रूप में भी जिम्मेदारी निभाई। इसके बाद वे देश के उपराष्ट्रपति बने।
1987 से 1992 तक भारत के उपराष्ट्रपति रहने के बाद उन्हें देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद की जिम्मेदारी मिली।
बने भारत के नौवें राष्ट्रपति
डॉ. शंकर दयाल शर्मा ने 25 जुलाई 1992 को भारत के नौवें राष्ट्रपति के रूप में पदभार संभाला। उनका राष्ट्रपति कार्यकाल 25 जुलाई 1997 तक रहा।
उनके कार्यकाल के दौरान भारतीय राजनीति में गठबंधन और अल्पमत सरकारों का दौर महत्वपूर्ण रहा। राष्ट्रपति के रूप में उन्होंने संविधान और संसदीय लोकतंत्र की मर्यादा को विशेष महत्व दिया।
संविधान और लोकतंत्र में गहरी आस्था
डॉ. शर्मा एक शिक्षाविद् और कानून के विद्वान भी थे। उन्होंने देश-विदेश के प्रतिष्ठित संस्थानों से शिक्षा प्राप्त की थी। उनका सार्वजनिक जीवन संविधान, लोकतांत्रिक संस्थाओं, कानून के शासन और संसदीय परंपराओं के प्रति प्रतिबद्धता के लिए जाना जाता है।
उनके सार्वजनिक जीवन से जुड़ा एक महत्वपूर्ण संदेश था कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में संवैधानिक संस्थाओं और कानून के शासन का सम्मान सर्वोपरि होना चाहिए।
राष्ट्रपति भवन से पहले लंबा सार्वजनिक जीवन
डॉ. शर्मा का जीवन केवल राष्ट्रपति पद तक सीमित नहीं था। स्वतंत्रता सेनानी, शिक्षाविद्, वकील, मुख्यमंत्री, केंद्रीय मंत्री, राज्यपाल, उपराष्ट्रपति और राष्ट्रपति—उन्होंने सार्वजनिक जीवन में कई महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाईं।
26 दिसंबर 1999 को नई दिल्ली में उनका निधन हुआ। हर वर्ष उनकी जयंती पर देश उनके योगदान और सार्वजनिक जीवन में निभाई गई महत्वपूर्ण भूमिकाओं को याद करता है।