विदेश मंत्रालय ने भारतीय पासपोर्ट नियमों में बड़ा बदलाव किया है, जो नाबालिग आवेदकों को सीधे प्रभावित करता है। पासपोर्ट (संशोधन) नियम, 2026 के तहत अब यह स्पष्ट कर दिया गया है कि 15 साल से कम उम्र के बच्चों को जारी होने वाला पासपोर्ट अधिकतम 5 वर्ष तक ही वैध रहेगा, या फिर बच्चे के 18 वर्ष का होने तक — इन दोनों में से जो भी पहले हो।
यह नियम इसलिए बनाया गया है क्योंकि बचपन और किशोरावस्था के दौरान चेहरे की बनावट तेजी से बदलती है, जिससे पुरानी फोटो पहचान में दिक्कत पैदा कर सकती है। यही वजह है कि सरकार बार-बार वैरिफिकेशन के झंझट से बचने के लिए न्यूनतम वैधता अवधि तय करती है।
खास बात यह है कि 15 से 18 वर्ष की आयु वर्ग के आवेदकों के पास एक विकल्प भी है — वे चाहें तो सामान्य वयस्क श्रेणी की तरह पूरा शुल्क भरकर 10 साल की वैधता वाला पासपोर्ट भी बनवा सकते हैं। लेकिन अगर वे मानक नाबालिग श्रेणी के तहत आवेदन करते हैं, तो उन्हें रियायती दर पर केवल 5 साल की वैधता वाला पासपोर्ट मिलेगा।
गौरतलब है कि इससे पहले 25 जून 2026 को अधिसूचित इन संशोधित नियमों के साथ पासपोर्ट सेवा शुल्क में भी संशोधन किया गया था, जो 1 जुलाई 2026 से प्रभावी हुआ। नए आवेदकों को पासपोर्ट सेवा केंद्र पर आवेदन करते समय इन अपडेटेड नियमों और शुल्क संरचना का ध्यान रखना जरूरी है।