साइबर अपराध के खिलाफ रायपुर में बड़ी पहल: इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय में 800 छात्रों को दिया गया डिजिटल सुरक्षा का मंत्र

रायपुर। छत्तीसगढ़ में बढ़ते साइबर अपराधों और ऑनलाइन ठगी के मामलों के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए छत्तीसगढ़ पुलिस द्वारा प्रदेशव्यापी “साइबर जागृति अभियान” चलाया जा रहा है। इसी अभियान के तहत गुरुवार 3 सितंबर 2026 को रायपुर स्थित इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, कृषक नगर में विशेष साइबर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया।

कार्यक्रम में लगभग 800 छात्र-छात्राओं, प्रोफेसरों, शिक्षकों और विश्वविद्यालय के अधिकारियों ने हिस्सा लिया। इस दौरान युवाओं को साइबर ठगी के नए तरीकों और उनसे बचने के उपायों की विस्तृत जानकारी दी गई।

रामविचार नेताम के मुख्य आतिथ्य में हुआ कार्यक्रम

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि छत्तीसगढ़ शासन के कैबिनेट मंत्री एवं कृषि विकास तथा किसान कल्याण मंत्री रामविचार नेताम रहे। उन्होंने विश्वविद्यालय स्तर पर आयोजित साइबर जागरूकता कार्यक्रमों का शुभारंभ किया।

इस अवसर पर पुलिस कमिश्नर डॉ. संजीव शुक्ला, इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर गिरीश चंदेल, पुलिस उपायुक्त मध्य जोन तारकेश्वर पटेल, अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त क्राइम एवं साइबर गौरव मंडल सहित विश्वविद्यालय और पुलिस विभाग के अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

कार्यक्रम में इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के साथ-साथ कलिंगा विश्वविद्यालय और मैट्स विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं एवं शिक्षकों ने भी भाग लिया।

15 अगस्त से 2 अक्टूबर तक चलेगा साइबर जागृति अभियान

छत्तीसगढ़ पुलिस द्वारा प्रदेशवासियों को साइबर अपराधों के प्रति जागरूक और सुरक्षित बनाने के उद्देश्य से 15 अगस्त 2026 से 2 अक्टूबर 2026 तक “साइबर जागृति अभियान” चलाया जा रहा है।

अभियान का मुख्य उद्देश्य आम नागरिकों, विद्यार्थियों और युवाओं को साइबर अपराध के विभिन्न स्वरूपों, ऑनलाइन ठगी के नए तरीकों और डिजिटल धोखाधड़ी से बचाव के उपायों की जानकारी देना है।

फर्जी कॉल से डिजिटल अरेस्ट तक, बताए गए साइबर ठगी के तरीके

कार्यक्रम के दौरान पुलिस अधिकारियों ने बताया कि साइबर अपराधी लगातार नए-नए तरीकों से लोगों को ठगी का शिकार बना रहे हैं। विद्यार्थियों को कई प्रकार के साइबर अपराधों के बारे में जानकारी दी गई।

इनमें फर्जी कॉल, संदिग्ध लिंक, ओटीपी के नाम पर ठगी, बैंक और यूपीआई फ्रॉड, फर्जी कस्टमर केयर नंबर, सोशल मीडिया फ्रॉड, फर्जी निवेश योजनाएं, नौकरी और लोन के नाम पर ठगी, डिजिटल अरेस्ट तथा सेक्सटॉर्शन जैसे मामलों के प्रति विशेष रूप से जागरूक किया गया।

OTP और UPI PIN किसी से साझा न करें

पुलिस अधिकारियों ने युवाओं से सोशल मीडिया और इंटरनेट का उपयोग करते समय विशेष सावधानी बरतने की अपील की। लोगों को बताया गया कि किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ अपना OTP, UPI PIN, ATM या डेबिट कार्ड की जानकारी, बैंक खाते से जुड़ी गोपनीय जानकारी और पासवर्ड साझा नहीं करना चाहिए।

इसके साथ ही अनजान लिंक पर क्लिक करने और संदिग्ध मोबाइल एप्लीकेशन डाउनलोड करने से बचने की सलाह दी गई। सोशल मीडिया पर अपनी निजी और वित्तीय जानकारी साझा करने को भी खतरनाक बताया गया।

“डिजिटल सुरक्षा ही साइबर सुरक्षा की पहली सीढ़ी”

कार्यक्रम में विद्यार्थियों को संदेश दिया गया कि साइबर अपराध से बचने के लिए जागरूकता सबसे बड़ा हथियार है। किसी भी अनजान कॉल, मैसेज, ई-मेल या सोशल मीडिया संदेश पर तुरंत भरोसा नहीं करना चाहिए।

साइबर अपराधी अक्सर लोगों को डराकर, दबाव बनाकर या बड़े फायदे का लालच देकर ठगी करते हैं। ऐसे मामलों में बिना जांच-पड़ताल किए कोई भी ऑनलाइन लेन-देन नहीं करने की सलाह दी गई।

ठगी होने पर तुरंत 1930 पर करें शिकायत

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि यदि कोई व्यक्ति साइबर ठगी का शिकार हो जाता है तो उसे घबराने के बजाय तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए।

साइबर फ्रॉड होने की स्थिति में तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराने और संबंधित बैंक या वित्तीय संस्था को तत्काल जानकारी देने की अपील की गई।

अधिकारियों के अनुसार, साइबर ठगी की शिकायत जितनी जल्दी दर्ज कराई जाएगी, ठगी गई राशि को रोकने या वापस मिलने की संभावना उतनी ही अधिक हो सकती है।

युवाओं से जागरूकता फैलाने की अपील

कार्यक्रम में शामिल छात्र-छात्राओं से अपील की गई कि वे केवल स्वयं ही साइबर अपराधों से बचाव की जानकारी न रखें, बल्कि अपने परिवार, दोस्तों और आसपास के लोगों को भी साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक करें।

आज के डिजिटल युग में मोबाइल फोन और इंटरनेट दैनिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुके हैं। ऐसे में डिजिटल माध्यमों का सुरक्षित और जिम्मेदारी के साथ उपयोग करना हर नागरिक की जिम्मेदारी है।

छत्तीसगढ़ पुलिस ने विद्यार्थियों को संदेश दिया कि “सतर्क रहें, सुरक्षित रहें और साइबर अपराध के विरुद्ध जागरूकता फैलाएं।”

छत्तीसगढ़ पुलिस के अनुसार, साइबर अपराधों से बचाव केवल पुलिस की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसमें आम नागरिकों की भी महत्वपूर्ण भूमिका है। “साइबर जागृति अभियान” के तहत प्रदेशभर के शैक्षणिक संस्थानों और सार्वजनिक स्थानों पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, ताकि लोगों को डिजिटल दुनिया में सुरक्षित रहने के लिए जागरूक किया जा सके।

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